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रवि पाराशर

रवि पाराशर

रवि पाराशर भारतीय हिंदी पत्रकारिता में चर्चित शख़्सियत हैं। प्रिंट और टीवी पत्रकारिता में 28 साल से ज़्यादा का अनुभव है।

वे सहारा ग्रुप के समय न्यूज़ नेटवर्क के सभी चैनलों के एडीटर, कंटेट के पद पर 29 फ़रवरी, 2016 तक कार्यरत रहे। वे टीवीआई, ज़ी न्यूज़, आजतक और सहारा समय के टीवी न्यूज़ चैनलों में अहम पदों पर रह चुके हैं। वे ज़ी समूह के क्षेत्रीय चैनल ज़ी 24 घंटे छत्तीसगढ़ के संपादक के तौर पर रायपुर में भी तैनात रहे।

1988 में उनका चयन टाइम्स ऑफ़ इंडिया ग्रुप के संस्थान टाइम्स रिसर्च फ़ाउंडेशन इंस्टीट्यूट यानी टीआरएफ़आई में पत्रकारिता के डिप्लोमा कोर्स में हुआ। संस्थान की पत्रिका धर्मयुग (मुंबई) में उन्होंने इंटर्नशिप की। रवि पाराशर 1995 तक नव भारत टाइम्स, जयपुर में कार्यरत रहे। अभी तक उनके तीन सौ से ज़्यादा लेख और रिपोर्ट प्रकाशित हुई हैं।

रवि पाराशर का दख़ल साहित्य के क्षेत्र में भी है। वर्ष 1986 में उनकी कहानी– “सिकुड़ते विस्तार” को दिल्ली में ‘मोदी कला भारती सम्मान’ दिया गया। देश की नामचीन पत्रिका हंस के मीडिया विशेषांक में उनकी कहानी – ‘अनुभव की अभिलाषा’- को काफ़ी सराहा गया। रवि पाराशर ग़ज़ल विधा में बेहद सक्रिय और परिचित नाम हैं। उनका ग़ज़ल संग्रह –‘एक पत्ता हम भी लेंगे’- अनन्य प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है।

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