जम्मू-कश्मीर को जैसा मैंने देखा और समझा (भाग 1)

22 Aug 2016 15:56:59

P. Kumar

आचार्य अभिनवगुप्त सन्देश यात्रा कलश के रूप में दक्षिड भारत के कांची कामकोटि मठ और गोवा से सुरु हुई थी और दिल्ली में आकर दोनों कलश एकाकार हो गए थे। और वहां से यात्रा विभिन्न राज्यों से होते हुए जम्मू काश्मीर पहुंची । जम्मू काश्मीर राज्य के लगभग 50 स्थानों पर यथोक्त पूजा और सम्मान स्वीकार करते हुए दिनांक 10-06-2016 को ये यात्रा खीर भवानी मन्दीर पहुंची जहां वृहद स्तर पर आयोजन किया गया था । समाज के हर स्तर के श्रद्धालु वहां हजारों की संख्यामें पहुंचे हुए थे। जिसकी अध्यक्षता, अभिनवगुप्त सन्देश यात्रा समिति के अध्यक्ष श्री श्री रविशंकर जी ने की।

हम इस यात्रा के अंतिम चरण में सम्मिलित होने के लिए 10-06-2016 की रात्रि को श्रीनगर पहुंचे, लाल चौक से थोड़ी पहले के रीगल चौक पर अवस्थित ' श्री चन्द्र चिनार उदासीन आखाड़ा' में यही पर हमारे ठहरने की व्यवस्था थी। दूसरे दिन सवेरे शक्ति स्वीट्स में जलपान करने के बाद हम तय कार्यक्रम में ज्येठादेवी मन्दीर पहुंचे।

ज्येठा देवी मन्दीर में इस यात्रा का विधिवत समापन कार्यक्रम हुआ । जिसके मंच को  श्री श्री रविशंकर जी  और जवाहरलाल कौल जी ने विभूषित किया। मंच पर स्थानीय प्रोफेसर जफ़र और कथा वाचक श्री अतुल गिरी जी महाराज भी मौजूद थे।

अंदाजन 700 के करीब लोगों ने इस समापन कार्यक्रम में भाग लिया। ज्येष्ठा देवी मन्दीर में अभिनवगुप्त और उनकी त्रिका दर्शन के ऊपर चर्चा हुई । दोपहर के भोजन के बाद कार्यक्रम समाप्त हुआ।

ये पूरा आयोजन जिसमे मैं श्रीनगर में सम्मिलित हुआ, काश्मीर और श्रीनगर के प्रति मेरी धारणाओं को बनाने में काफी सहायक हुआ। इस समापन कार्यक्रम के बाद हम श्रीनगर में कई स्थानों पर गए। श्रीनगर के बाद हम काश्मीर के कई स्थानों पर गए और जम्मू क्षेत्र में भी कुछ जगहों पर गए।

निम्नलिखित स्थानों पर हमने दर्शन लिए :

श्रीनगर में

१) सनातन धर्मशाला , लालचौक

२) चन्द्र चिनार उदासीन आश्रम , रीगल चौक

३) ज्येष्ठा देवी मन्दीर , गुपकार रोड

४) गोपेश्वर महादेव मन्दीर ,

५) विचारनाग मन्दीर , विचारनाग , शौरा

६) मंगलेश्वर महादेव मन्दीर , फत्तेकदल , डाउन टाउन

७) पोखरी बल मन्दीर , हारी पर्वत

अवंतिपुरा में

१) अवंतिपुरा मन्दीर

अनन्तनाग में :

१) मट्टन मन्दीर

२) मार्तण्ड मन्दीर

३) नागडण्डी मन्दीर

४) वेरीनाग मन्दीर

जम्मू , चनैनी :

१) गौरी कुंड

२) सुद्धमहादेव मन्दीर

३) मानतलाई मन्दीर

यात्रा वृतांत का पहला भाग मैं यहीं समाप्त करता हूँ. अगले भागों में हम आपसे उपरोक्त स्थान से जुड़े विवरण साझा करेंगे. 

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