असामान्य परिस्थितियों में लिए जाए असाधारण निर्णय

19 Sep 2016 11:53:27

डॉ. रवि प्रभात

जम्मू और कश्मीर की उडी में सैनिक छावनी पर हुए सनसनीखेज हमले से पूरा देश शोकसंतप्त एवं सन्न है। पूरे देश की भावना, संवेदना, सहानुभूति और एकात्मता सैनिको और उनके परिवारो से जुडी हुई है इसलिए इस हमले को पूरे देश पर हुए हमले के रूप में देखा जाना चाहिए।


पिछले 30 वर्षो से पाकिस्तान इसी तरह का छद्म युद्ध लड़ता आ रहा है, जिसमे हमारी सेनाओ को केवल जवाबी कार्यवाही की अनुमति प्राप्त है। हमला कब और कहा करना है यह पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी तय करते हैं तथा हमारे सुरक्षाबल केवल उन हमलो का जवाब देने के लिए ही आदिष्ट हैं। हमलों की इस श्रृंखला में उडी हमला पठानकोट के बाद एक और बड़ा हमला है। पठानकोट में हमने अधिकतम नुक्सान होने से बचा लिया था, परन्तु इस बार जो नुकसान हुआ है उसकी क्षतिपूर्ति सम्भव नही है।

विशेषज्ञ इस हमले को सेना के मनोबल पर पर चोट मान रहे हैं। पाकिस्तान ने इस बार जहां भौतिक रूप से सेना के जवानो को शहीद कर हमें भौतिक रूप से नुकसान पहुंचाया है वहीँ मानसिक स्तर पर भी बढ़त हासिल की है। हमारे पास पाकिस्तान से तीन युद्ध जीतने की जो मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल है उसे हमने पिछले वर्षो में लगातार क्षीण किया है। अब पूरा देश यह सोचने को मजबूर है कि भारत कैसा सम्प्रभु राष्ट्र है जो लगातार अपने नागरिको और सैनिको के गिरते शवो को झेलता आ रहा है।

यह सर्वविदित ही है कि कोई भी सैन्यदल आक्रामक और सुरक्षात्मक रणनीति का समन्वय बना कर अपनी गतिविधियों को अंजाम देता है। आप अगर हमेशा आक्रामक नही रह सकते तो हमेशा सुरक्षात्मक रहने की रणनीति कैसे अख्तियार कर सकते हैं? हमेशा सुरक्षात्मक रहने से जहां एक तरफ आपकी सेनाओ का मनोबल गिरता है वहीँ सेना को क्षमताये भी प्रभावित होने लगती है। विशेषकर ऐसी स्थिति में जब छद्म युद्ध का वर्षो से सामना करते आ रहे हो। आप ऐसी स्थिति में हमेशा सेना के हाथ बाँध कर रखने की भूल नही कर सकते। इससे सेना की धार कुन्द  होने लगती है और हथियार जंग खाने लगते हैं।

जब संसद पर हमला हुआ था तब भी हमने इसी तरह की चूक की थी, इसका सन्देश भारत के बारे में नकारात्मक ही गया था। आज भी हम उसी मुहाने पर आकर खड़े हो गए हैं। उडी हमले ने भारत देश के अंतस को गहनता से झकझोरा है। जितना बड़ा संकट देश के लिए है उससे बड़ी परीक्षा मोदी सरकार के लिए भी है। ऐसी असामान्य परिस्थितियों में लिए गए असामान्य निर्णय ही आपको इतिहास गढ़ने का अवसर देते हैं। पाकिस्तान को लेकर सत्ता प्रतिष्ठानो में एक अलग तरह की सहानुभूति रही है विशेषकर कांग्रेस सरकारो में। मोदी सरकार को इससे उबरना होगा। देश में इस बात से भी निराशा है कि पाकिस्तान असली सच जानते हुए भी मोदी सरकार ने उसे दो साल समझने-समझाने में ही बर्बाद कर दिए।

दर असल पिछली सरकारो की एकमात्र सुरक्षात्मक नीति से उपजी हताशा का परिणाम है मोदी सरकार, जनता को अपने सैनिको के कटते सरों की नामंजूरी का परिणाम है मोदी सरकार, केवल कोरी बयानबाजी से उचटते मन का परिणाम है मोदी सरकार, निरन्तर भारत की गिरती साख के दुःसह दुःख का परिणाम है मोदी सरकार, सबल राष्ट्र की भारी जनाकांक्षाओं का परिणाम है मोदी सरकार। ऐसे में अगर मोदी सरकार इन स्थितियों से निबटने का कोई अचूक रास्ता नही अपनाती है तो देश की आशाओ के साथ विश्वासघात जैसा होगा।

पिछले साल मणिपुर में सेना पर हुए आतंकवादी हमले के खिलाफ भारत सरकार ने सेनाओ को खुली छूट दी जिसका परिणाम म्यांमार में सर्जिकल आपरेशन के रूप में सामने आया, जहां हमारी सेना ने जिम्मेदार आतंकवादी संगठन की ईट से ईट बजा कर रख दी थी। देश जानता है कि म्यांमार और पाकिस्तान की स्थितियों में धरती आसमान का फर्क है, म्यांमार की सरकार के साथ हम समन्वय में थे, जबकि यहां आतंकवाद पाकिस्तानी निति का हिस्सा है। पाकिस्तान परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र भी है, जिससे युद्ध की स्थिति भी बन सकती है। लेकिन यह सब समझते हुए भी देश म्यांमार-II की प्रतीक्षा में है।

अब पाकिस्तान से दो टूक बात करने का समय है या तो पाकिस्तान इस प्रायोजित आतंकवाद को खत्म करे अन्यथा परिणाम भुगतने को तैयार रहे। पाकिस्तान की इस अंतहीन धूर्तता का तो हर हालात में अंत करना ही होगा। पाकिस्तान अगर खुद को आतंकवादियो से निबटने में सक्षम न होने का बहाना बनाता है तो भारत को नुकसान पहुचाने वाले पाकिस्तानी आतंकवाद के अंत का काम भारतीय सेना को अपने हाथ में ले लेना चाहिए।

यह बात सही है कि सीधा युद्ध आपको कुछ समय के लिए संकट में डाल सकता है, आपके सामने आर्थिक समस्या खड़ी हो सकती है, अंतरराष्ट्रीय मंचो पर दबाव झेलना पड़ सकता है, परन्तु इस सब के बाद भी अगर आप अपनी संप्रभुता में हुए छेद को भर सकें, एक राष्ट्र के रूप में अपनी साख स्थापित कर सकें और जनता के गिरते मनोबल को आत्मविश्वास में बदल सकें, इस समस्या का समूल विनाश कर सकें तो तब भी यह एक महत्त्वपूर्ण एवं विशिष्ट कदम माना जाएगा।

सबसे पहले तो हमे अंतरराष्ट्रीय मंचो की परवाह किये बगैर अगले कुछ महीनो के लिए सुरक्षात्मक नीति को खूँटी पर टांग दे और आक्रामक नीति का वरन करें। पाकिस्तान पोषित आतंकवाद और पोषण को किस तरह खत्म किया जाये इस पर गम्भीरतापूर्वक विचार करना होगा। पाकिस्तान के साथ राजनयिक सम्बन्धो पर पुनर्विचार हो, पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज किये जाएं, बलूचिस्तान और पाक अधिक्रांत जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर मजबूती से आगे बढ़ा जाए, पाकिस्तान को प्राप्त हो रहे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग को बन्द कराने की पुरजोर कोशिश की जाए और पाकिस्तान को आवश्यक सामग्री सप्लाई करने वाले देशो से अनुरोध कर उस पर रोक लगाने के प्रयास किये जाएं।

पाकिस्तान के शस्त्रागारों को नष्ट करने की निति पर भी काम करना होगा। साथ ही अजीत डोभाल साहब के नेतृत्व में तेज तर्रार आफिसरों की एक गोपनीय टास्क फ़ोर्स का गठन किया जाना चाहिए जो कुछ ही समय में इस दिशा में अपेक्षित सही परिणाम दे सके। सीमा पर सेना को खुली छूट दी जाए।

इसके साथ साथ पाकिस्तान को भारत से जिस भी तरह की सहूलियत मिल रही है वह तुरन्त बन्द की जानी चाहिए। पाकिस्तान की जनता की चिंता की आदर्श स्थिति की बजाय अपने नागरिको के हितों को तवज्जो देनी होगी। पिछले दिनों भारत ने अपने क्षेत्र में पाकिस्तानी हवाई उड़ानों पर एक महीने के लिए प्रतिबन्ध लगा दिया था, उतने में ही पाकिस्तान की हालत पतली हो गयी थी। जल समझौते से लेकर व्यापार, आर्थिक , यातायात , खाद्यान्न तक सब पर पुनर्विचार करने की जरुरत अब साफ़ दिखाई पड़ने लगी है। सब कुछ खंगालिए ऐसे कम से कम 1000 मामले मिल जायेंगे जिन पर निर्णायक कठोर कदम उठा कर आप पाकिस्तान को घुटनो पर ला सकते हैं। साथ ही साथ भारत में बैठे पाकिस्तान के मददगारों पर भी कठोर कार्यवाही अब शुरू हो जानी चाहिए।

पाकिस्तान की सच्चाई को पहचान कर तदनुरूप ही रणनीति बनाकर उसका क्रियान्वयन करना पड़ेगा। अगर पाकिस्तान भारत की बर्बादी चाहता है तो हम उसकी आबादी की कामना क्यों पालें? सरकार की जिम्मेदारी देश और जनता के प्रति है अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसके बाद आता है यह गाँठ बाँध कर रख लीजिये। "बिन भय प्रीत नही" यह वाक्य पाकिस्तान के सन्दर्भ में कतई व्यावहारिक व् उपयोगी है। देश को अब प्रतिक्रिया का इन्तजार है। उम्मीद है मोदी जी ने जो कल सार्वजनिक रूप से कहा उस पर अक्षरशः अमल करेंगे " मैं देशवासियो को विश्वास दिलाता हूँ कि किसी भी दोषी को बख्शा नही जाएगा "।

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