संघ प्रमुख मोहन भागवत जी ने नागपुर में रैली को संबोधित करते हुए कहा

02 Oct 2017 11:11:44


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में संघ प्रमुख मोहन भागवत जी ने नागपुर में दशहरा रैली को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने मुख्य रूप से कश्मीर में हो रहे सेना के ऑपरेशन के अलावा समान नागरिक संहिता और म्यांमार की रोहिंग्या शरणार्थी समस्या का जिक्र किया।

 

मोहन भगवत जी ने कहा कि 'समाज में यही चर्चा है कि जम्मू कश्मीर में केंद्र सरकार और भारतीय सेना द्वारा ऐसा काम हो रहा है, और यह भी होना चाहिए। ऐसी चर्चा कहीं नहीं है कि काम नहीं हो रहा है।' गौरतलब है कि भारतीय सेना पिछले वर्ष सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से ही जम्मू कश्मीर क्षेत्र में आतंकवाद के मसले पर लगातार फ्रंट फूट पर है। भारतीय सेना के लगातार सर्च और आतंकरोधी ऑपरेशन के कारण जम्मू कश्मीर के साथ साथ पाकिस्तान पोषित आतंकी संगठनों की कमर पूरी तरह टूट चुकी है। केंद्र सरकार की आतंकियों से निपटने की रणनीति पर भागवत जी ने कहा कि 'आतंकियों को ख़त्म करने की रणनीति का सकारात्मक असर जमीन पर दिखना शुरू हो चुका है। जिस दृढ़ता के साथ आतंकियों और सीमा पार फायरिंग से केंद्र सरकार निपट रही है वह काबिल ए तारीफ है।' सेना ने पिछले एक वर्षों में कई सर्च ऑपरेशन चलाये हैं जिनमें लश्कर और हिजबुल जैसे आतंकी संगठनों के मुख्य आतंकियों को मार गिराया है। इस वर्ष सेना द्वारा शुरू किये गए ऑपरेशन ऑल आउट का तो ये असर है कि लश्कर का कमांडर बनने को कोई आतंकी राजी नहीं है। भारतीय सेना ने हिजबुल, लश्कर, अलकायदा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के 258 आतंकियों की लिस्ट ऑपरेशन ऑल आउट के लिए तैयार किया गया था। वहीं सेना ने अब तक अबु दुजाना, अबु इस्माइल, बशीर लश्करी, जुनैद मट्टू (सभी लश्कर के), महमूद गजनवी (हिजबुल) जैसे मुख्य आतंकियों के साथ लगभग 150 से अधिक आतंकियों को मार गिराया है। वहीं जो ज़िंदा है उनमें इतना खौफ़ है कि अब किसी संगठन की कमान सम्हालने वाले नहीं मिल रहे।

 

आतंकवाद और सुरक्षा के अलावा संघ प्रमुख मोहन भागवत जी ने जम्मू कश्मीर की राजनीति पर भी दोहरे व्यवहार का आरोप लगाया। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर आरोप लगाते हुए कहा 'जम्मू और लद्दाख के साथ पहले सौतेला व्यवहार किया गया। 2-3 महीने पहले कश्मीर में स्थितियां अनिश्चित थीं, लेकिन जिस तरह से अलगाववादियों से निपटा गया है, पुलिस और सेना को पूरा कंट्रोल दिया गया, वह सराहनीय है।'

 

27 सालों से जूझ रहे कश्मीरी हिन्दुओं के लिए भागवत जी ने कहा कि 'कश्मीरी पंडित नागरिक आज भी अधिकारों से वंचित हैं।' उन्होंने 35A जैसे पुराने प्रावधानों पर इशारों इशारों में टिप्पणी भी कि, उन्होंने कहा कि "अलगाववादियों पर सख्ती जारी रखते हुए वहां के नागरिकों को आत्मीयता का अनुभव कराना चाहिए, इसके लिए नए प्रावधान बनाने पड़े तो बनाना चाहिए, पुराने प्रावधान हटाने पड़े तो हटाना चाहिए।"

 

रोहिंग्या मुद्दें पर संघ प्रमुख भागवत जी पूरी तरह सरकार के फैसले का समर्थन करते दिखे। उन्होंने कहा कि 'रोहिंग्या शरणार्थियों को अगर आश्रय दिया तो रोजगार पर भार और सुरक्षा पर संकट होगा। मानवता की बात ठीक है पर उसके लिए कोई अपने मानवों को समाप्त करे ये ठीक नहीं। वह वहां से यहां क्यों आए हैं? वहां क्यों नहीं रह सकते? जब हम इन सारी जानकारी को लेते हैं तो पता चलता है कि उनकी अलगाववादी, हिंसक और आपराधिक गतिविधियां इसका कारण हैं। जिहादी ताकतों से उनके संबंध वहां पर उजागर हो गए। इसलिए उस देश के शासन का रवैया भी उनके प्रति कड़ा ही है।'

JKN Twitter