पाकिस्तान के “अघोषित प्रवक्ता” बनते हुए फारुख अब्दुल्ला

31 Oct 2017 14:10:43


ललित कौशिक

एक कहावत है कहते हैं झूठ के पैर नही होते और सच को ज्यादा दिनों तक दबाया नही जा सकता लेकिन थोड़े दिनों तक नकाबपोश बनकर अपने बदले हुए चेहरे को छिपाने की कोशिश कुछ दिन ही कर सकते है.

जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति की तलाश में बातचीत का सिलसिला एक बार फिर शुरू होने जा रहा है. मोदी सरकार ने राज्य के सभी पक्षों से बातचीत शुरू करने के लिए खुफिया ब्यूरो के पूर्व प्रमुख दिनेश्वर शर्मा को अपना प्रतिनिधि बनाया है.जिसपर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अलगाववादी हुर्रियत नेताओं से बातचीत पर फैसला खुद दिनेश्वर शर्मा करेंगे.

जैसे ही बातचीत कर शांति की बात शुरू करने की बात ही चली ही थी कि अल्लाह दीन के चिराग से फारुक फारुख अब्दुल्ला ने “पाकिस्तान” नाम के सांप निकालने की कोशिशों में लग गए. जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला ने कहा कि जब भी जम्मू-कश्मीर का हल निकालनें की बात हो तो हमें  पाकिस्तान को  भी बातचीत के लिए बुलाना चाहिएं क्योंकि एक पार्टी पाकिस्तान भी है. पूर्व मुख्यमंत्री ने इस तरह का बयान देकर कही न कही अपने आपको पाकिस्तान का अघोषित प्रवक्ता के रूप में पेश करने की कोशिश की है.  

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में इनामी आतंकी बुरहान वानी 8 मई, 2016 को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था. इसके बाद घाटी में 14 महीनों से घाटी में लगातार हिंसा हो रही है. सेना भी अपने ऑपरेशन ऑल आउट के तहत इस वर्ष अभी तक करीब 179 के करीब आतंकियों का सफाया कर चुकी है. पिछलें दिनों अलगाववादी नेता नईम खान ने एक टेलीविजन चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में कबूल किया था कि कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए हुर्रियत नेता पाकिस्तान से फंड लेते हैं. जिसके बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईएने जुलाई माह में जम्मू कश्मीर से 10  कश्मीरी अलगाववादी नेताओं को गिरफ्तार किया है इन पर कश्मीर घाटी में पत्थरबाजी के साथ प्रदर्शन और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान से पैसे लेने का आरोप में  गिरफ्तार है. टेरर फंडिंग के लिए पाकिस्तान से जिस रूट से घाटी में हिंसा फ़ैलाने के लिए पैसा आता था. उस रूट के अलगाववादी नेताओं की गिरफ्तारी के बाद और सेना के ऑपरेशन ऑल आउट के तहत घाटी में थोड़ी शांति जैसे होनी शुरू हुई थी. जिसके के बाद केंद्र ने जम्मू कश्मीर में बातचीत के लिए एक सरकारी प्रतिनिधि तय किया जिससें वहा सभी पक्षों से बातचीत हो सकें. लेकिन तभी फारुख अब्दुल्लाका पाकिस्तान प्रेम फिर से जागरूक हो गया. जम्मू-कश्मीर में समस्या अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35 A नही है, बल्कि समस्या जम्मू-कश्मीर के राजकारणी नेता है, इनको भी शायद चुनाव लड़ने के लिए पाकिस्तान से ही पैसा आता हैं. यही काम जम्मू कश्मीर की हाल ही में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने देश विरोधी बयान देतें हुए कहा था. अगर केंद्र सरकार ने 35 A के साथ छेड़छाड़ की तो जम्मू-कश्मीर में तिरंगे को कोई कंधा देने वाला भी नही मिलेगा. मुख्यमंत्री महबूबा ने देश विरोधीइतना बड़ा बयान देते हुए अपने पद और गरिमा का भी ख्याल नही रखा. यही हाल निर्दलीय विधायक इंजीनियर राशिद का है, वो भी भारत के अंदर रहकर  भारत विरोधी बयान देकर देश की थाली में छेद करने का काम कर रहे है

JKN Twitter