फिर बाहर आया आतंकी हाफिज सईद लेकिन घाटी में रहेगी शांति

24 Nov 2017 17:09:22


आशुतोष मिश्रा

एक तरफ जहां मुंबई हमले का मास्टर माइंड और घोषित अंतरराष्ट्रीय आतंकी हाफिज सईद को पाकिस्तान की न्यायपालिका रिहा कर दिया है। भारत सरकार ने इस घटना के लिया पाकिस्तान को दोषी बताते हुए कहा है की अदालत में सही तरह से सबूतों को नहीं रखा है।   इस घटना के बाद पाकिस्तान का असली चेहरा बेनकाब हुआ है। इससे साफ है कि उसने आतंकियों को मदद देने की अपनी नीति को नहीं बदला है। पंजाब (पाकिस्तान) के ज्युडिशियल रिव्यू बोर्ड की तरफ से सईद को रिहा करने का आदेश आने के बाद उसे गुरुवार देर रात रिहा कर दिया गया। इसके बाद जमात-उद-दावा के प्रवक्ता के सईद की रिहाई की जानकारी दिया है। इस घटना के बाद पाकिस्तान के खिलाफ पश्चिमी देशों का रवैया सख्त हो सकता है।

पाकिस्तान का सिस्टम हमेशा ही खतरनाक आतंकवादियों को बचाता रहा है। पाकिस्तान सरकार को हाफिज सईद जैसे आतंकियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। हाफ़िज़ सईद बाहर आते ही फिर से अपनी साजिशों को अंजाम देगा।

क्योंकी वो सेना के मौजूदा गेम प्लान में फिट बैठता है। इसलिए वह उसकी रिहाई में अड़ंगा नहीं डालेगी। बाहर आने के बाद अब सईद न सिर्फ पाक सेना की मदद से कश्मीर में आतंकी घटनाओं को अंजाम देगा है , बल्कि अपनी पार्टी की मदद से राजनीतिक अस्थिरता लाएगा जो पाकिस्तानी सेना के हित में है।

भारत सरकार की सख्त प्रतिक्रिया से पाकिस्तानी सरकार भी दबाव में दिख रही है। दूसरी तरफ पाकिस्तान के समाचार चैनलों ने इस घटना को पूरी प्रमुखता से दिखाया है। हाफिज सईद की रिहाई को लेकर पाकिस्तानी सेना और पंजाब सरकार के बीच भी तनाव देखने को मिल रहा है।

एक तरफ जहां पाकिस्तान में हाफिज सईद की रिहाई हुई है उसके दूसरे तरफ सीमावर्ती एरिया में गोलाबारी को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। भारतीय रिहायशी इलाकों पर हमेशा बम बरसाए जाता रहा हैं। बीते कुछ वर्षो में रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर बहुत ज्यादा गोलाबारी की गई है। लेकिन भारतीय सेना भी कड़ी चौकसी बरतते हुए पड़ोसी देश के नापाक इरादों को नाकाम बनाने का काम किया है।

पकिस्तान हमेशा से कश्मीर में अशांति फ़ैलाने का प्रयास करता रहा है। पिछले बीते कुछ समय से जहां सरकार की सख्ती के बाद घाटी में आतकंवाद की फंडिग रुकी है वही NIA के रेड ने अलगावादियों को भी छुपने पर मजबूर कर दिया है।

घाटी के युवाओं को फिर से देश समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के लिये कई पहल की है। केंद्रीय वार्ताकार की सिफारिश के आधार पर वादी में पहली बार पत्थरबाजी में लिप्त युवकों के खिलाफ 4500 से ज्यादा मामले वापस लिए जाएंगे। कश्मीर घाटी में बीते साल आतंकी बुरहान की मौत के बाद भड़की हिंसा के दौरान पत्थरबाजों के खिलाफ 11500 मामले दर्ज किए गए। इनमें 4500 से ज्यादा मामले उन किशोरों के खिलाफ हैं जो पहली बार पत्थरबाजी में लिप्त पाए गए हैं।

 

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा ने अपने  ट्विटर पर लिखा कि पहली बार पत्थरबाजी में लिप्त पाए गए लड़कों के खिलाफ एफआइआर वापस लेने की प्रक्रिया को दोबारा शुरू करते हुए मुझे बहुत तसल्ली हो रही है। मेरी सरकार ने यह प्रक्रिया बीते साल मई, 2016 में भी शुरू की थी, लेकिन जुलाई, 2016 में पैदा हुई कानून- व्यवस्था की स्थिति के चलते यह प्रक्रिया अधर में लटक गई थी। अपने ट्विटर हैंडल पर उन्होंने आगे लिखा कि यह प्रक्रिया पत्थरबाजी के मामलों में पकड़े गए लड़कों व उनके परिजनों के लिए उम्मीद की एक नई किरण है। इससे इन लोगों को अपना जीवन सुधारने का एक और मौका मिला है।

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