बडगाम के में पखेरपोरा में भारतीय सुरक्षा बलों और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों में बीच हुई मुठभेड, इंटरनेट सुविधा की गई बंद

30 Nov 2017 22:43:28

 


आशुतोष मिश्रा

पाकिस्तान जहां एक ओर अन्तराष्ट्रीय सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन करने से बाज नहीं आ रहा है। वही दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर में आतंकी भेज कर घाटी में अशांति फ़ैलाने का प्रयास करता रहा है। पिछले कुछ समय से पाकिस्तान द्वारा किये जा रहा है।

कल रात को मिली एक गुप्त सूचना के आधार पर जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर की दूरी पर सुरक्षाबलों के जवान गांव में जगह-जगह सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। लेकिन मुठभेड़ आज सुबह करीब सात बजे उस समय शुरु हुई, जब गांव में आतंकियों के छिपे होने की गुट सूचना के आधार पर सुरक्षाबलों ने घेराबंदी करते हुए जब मकानों की तलाशी अभियान शुरु किया। जैसे ही सुरक्षा बल मो. अस्सदुल्ला नाम के एक स्थानीय ग्रामीण के घर के पास जैसे ही सुरक्षा बल के जवान पहुचे वैसे ही, घर के अन्दर छिपे आतंकियों ने जवानों पर फायरिंग कर दी। सुरक्षाबलों ने मौके पर ही आतंकियों को माकूल जवाब देना शुरू कर दिया। जिसके बाद सुरक्षा बलों ने चार आतंकियों को मार गिराया है। मारे गए सभी आतंकी जैश-ए मोहम्मद संगठन के बताए जा रहे हैं। ये मुठभेड़ ऐसे स्थान पर हो रही है जो कि फुटलीपोरा, जिला बडगाम के चरार-ए-शरीफ कस्बे के पास ही है। पिछले कई महीनो से इस इलाके में जैश ए मोहम्मद और लश्कर के विदेशी आतंकियों की गतिविधियां होती रही है।

वहीं बडगाम के बाद सोपोर के सागीपोरा में भी लश्कर-ए- तैयबा का एक आतंकी मारा गया है।  सेना के एक अधिकारी की ओर से सोपोर एनकाउंटर पर जानकारी दी गई है कि 22 राष्ट्रीय राइफल्स और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने सागीपोरा के जंगलों में सर्च ऑपरेशन लॉन्च किया था। सेना को यहां पर कुछ आतंकियों के दाखिल होने की सूचना मिली थी। इसके बाद एक ज्वॉइन्ट टीम ने कॉम्बिंग ऑपरेशन शुरू किया। 

 

केंद्र और राज्य सरकार ने घाटी के युवाओं पर फिर दिखाई दरियादिली  

जम्मू कश्मीर राज्य में केंद्र सरकार की ओर से नियुक्त वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा के राज्य में हुए दूसरे  दौरे के बीच में ही घाटी में युवाओं पर पत्थरबाजी के आरोप में दर्ज केस को वापस लेने की खबर आने लगी थी। जिसे जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अपने कल लिए गए एक फैसले में सही सिद्ध कर दिया। कल के दिन मुख्यमंत्री ने एक ऑर्डर पास करके 4,327 पत्थरबाजों पर दर्ज केस वापस लेने की प्रक्रिया आरम्भ कर दी हैं। सरकार की तरफ से यह बताया गया है की यह फैसला एक उच्च स्तरीय समिति की संतुति  के बाद अमल में लाया जा रहा है। जम्मू-कश्मीरराज्य पुलिस के महानिदेशक एसपी वैद उस समिति के अध्यक्ष हैं। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा की सिर्फ आतंकियों के मार करके ही आतंकवाद खत्म नहीं कर सकते है बल्कि इसके लिए हमें  मानवता भी दिखानी होगी। याद रहे की केवल इस वर्ष ही सुरक्षा बलों ने 200 से ज्यादा आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराया है। मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि राज्य में आतंकवाद के बाद नशीली दवाओं का सेवन और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को रोकना भी आज के समय एक बड़ी चुनौती बन कर उभरा है ।

जिन केसों के वापसी का फैसला लिया गया है वो सभी केस 2008 से 2014 तक। मुफ्ती सरकार ने अपने शुरुआती दो महीनों में 634 युवाओं पर दर्ज 104 केसों को वापस लिया था। लेकिन इसके इसके बाद राज्य में हिंसा बढ़ गई और जिसके कारण से यह प्रक्रिया धीरे हो गयी थी। अब 4,327 युवाओं पर दर्ज 744 केस वापस लिए गए हैं। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया सरकार ने केवल उन युवाओं पर दर्ज केस ही वापस लेने का फैसला किया है जिनके खिलाफ गंभीर किसी भी तरह के मामले दर्ज नहीं है। राज्य सरकार ने हाल ही में 2015 से अब तक के केस रिव्यू करने के ऑर्डर दिए थे।

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