पाकिस्तानी आतंकियों ने कश्मीर घाटी में टेके घुटने।

01 Dec 2017 14:57:59


आशुतोष मिश्रा

 

सरकार के तरह से मिली छूट और NIA की कार्यवाही का असर अब जम्मू कश्मीर में दिखाई देने लगा है। जहां 2016 में सेना ने जहां 157 आतंकियों को मार गिराया था वही साल 2017 में अभी तक 200 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया है।  जिनमे से 120 से ज्यादा विदेशी आतंकी भी शामिल है। गुप्तचर एजेंसी की माने तो कश्मीर घाटी में अभी भी 200  आतंकी सक्रिय हैं। लेकिन सुरक्षाबलों का मानना है कि जल्द ही इनका भी सफाया हो जाएगा।अब इनके पास अब दो ही विकल्प बचते हैं. या तो सरेंडर करें नहीं तो मारे जायेंगे।

बीते कुछ समय में जम्मू कश्मीर में लश्कर, जैश और हिज्बुल के टॉप कमांडर के एक-एक करके मारे जाने के बाद से आतंकियों की कमर पूरी तरह से टूट गई है। सुरक्षाबलो ने जैश के प्रमुख मसूद अजहर का भतीजा और लश्कर के नंबर दो माने जाने वाले आतंकी मक्की के बेटे को भी ढ़ेर कर दिया।

पाकिस्तान की ओर से लगातार किये जा रहे संघर्ष विराम के उल्लंघन ने ये साफ़ कर दिया है की वह आतंकियों  सीमापार कराने के लिए कवर फायरिंग कर रहा है। साल के शुरुआत में ही सुरक्षा बलों को पता चला था की दक्षिण कश्मीर में 150-180 आतंकी छिपे हुए हैं। इस जानकारी पर सेना ने तुरंत कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें मुठभेड़ो में ढेर करना शुरू कर दिया था। बीते पूरे साल में सेना सेना को लगातार सफलता मिल रही हैं। लेकिन आतंकियों के साथ हुई इन मुठभेड़ में भारतीय सेना ने भी अपने कई बहादुर सैनिक खोये।

अब सेना ने मुठभेड़ में गए किसी भी विदेशी आतंकी की लाशों को अब जनता को नहीं सौपती। क्योकि 2015 में सेना ने जब लश्कर कमांडर अबू काशिम कासिम  को मारने के बाद उसकी लाश लोगों को सौप दी थी तब उसके जनाजे सुपर्दे ख़ाक में शामिल लोगों ने हिंसा फैलाई थी। उसके बाद सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में घाटी के किसी भी जगह मारे जाने वाले पाकिस्तानी आतंकियों और विदेशी आतंकियों के लिए बारामुला जिले में गटामुला में एक कब्रिस्तान बनाया था। जहां पर सुरक्षा बल स्थानीय औकाफ बोर्ड के साथ इन विदेशी आतंकियों को गाड़ता है। लेकिन 2017 में केवल 11 महीनो के अन्दर ही 200 से अधिक आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया है। जिनमे 100 से ज्यादा विदेशी आतंकी है और जिन्हें उनका देश पाकिस्तान भी अपनाने से मना कर दे रहा है। जिसका असर अब उस कब्रिस्तान पर दिखने लगा है क्यों की वो कब्रिस्तान पूरी तरह से भर गया है।

पत्थरबाजी में कमी से बढ़ी सफलता

केंद्र की सरकार द्वारा 2016 में की गयी नोटबंदी के बाद से घाटी में पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आई है। जिसके बाद आतंकियों के साथ होने वाली मुठभेड़ के दौरान स्थानीय लोग पत्थरबाज बनकर आतंकियों को जो बचाने के लिए सेना के सामने उस तरह नहीं आते, जैसा वो लोग नोटबंदी से पहले आ जाते थे। नोटबंदी से पहले टेरर फंडिंग के लिए आया पैसा, घाटी के कुछ लोगों को पत्थरबाजी के लिए दिया जाता था, जिसकी मदद से कई बार सेना के घेरे में फंस चुके आतंकी बचकर भागने में सफल हो गए थे। लेकिन नोटबंदी के बाद जहां अब इस टेरर फंडिंग के खेल पर अंकुश लगा है, सेना को सफलता भी मिलने लगी है।

सरकार का मिला साथ

सेना के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि पिछले कुछ समय तक सेना के हाथ बंधे हुए रहते थे, लेकिन मोदी सरकार ने सही मायने में सेना को फ्री हैंड दिए हैं। अब आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले अधिकारी सोचते नहीं है। पिछले दिनों घाटी में शांति बहाली के लिए सरकार ने अपना एक प्रतिनिधि नियुक्त किया, जो इस समय अलग-अलग लोगों से बातचीत करने में लगे हैं, लेकिन इस दौरान सेना ने साफ कर दिया था कि वह अपने ऑपरेशन ऑल आउट को नहीं रोकने वाले। वह आतंकियों को ढेर करने का काम करते रहेंगे।

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