अमरनाथ यात्रा हमले में शामिल आतंकी सहित तीन को सेना ने किया ढेर, सेना का एक जवान भी शहीद

06 Dec 2017 17:48:09


आशुतोष मिश्रा

दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर काजीगुंड में सुरक्षा बलों के काफिले पर हमला कर भाग रहे लश्कर-ए-तैयबा के तीन पाकिस्तानी आतंकियों को जवानों ने छह घंटे चली मुठभेड़ में 4 दिसंबर को मार गिराया। मुठभेड़ से भागने में सफल एक आतंकी को अनंतनाग के एक अस्पताल से जिन्दा गिरफ्तार करलिया गया है। इस कार्यवाही में एक सैन्यकर्मी शहीद व दो अन्य जवान जख्मी हो गए।  पूरी कार्यवाही के दौरान सुरक्षा को देखते हुए  उस समय हाईवे पर यातायात बंद कर दिया गया था। मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों की पहचान अबु माविया और फुकरान निवासी पाकिस्तान और यावर के रूप में हुई है। इसी वर्ष 24 सितंबर को अबु इस्माइल के मारे जाने के बाद फुकरान को दक्षिण कश्मीर में लश्कर के डिवीजनल कमांडर की कमान सौंपी गई थी।

इन्ही आतंकियों ने जुलाई 2017 में अमरनाथ यात्रियों पर हमला किया था। 10 जुलाई को अमरनाथ यात्रा पर गये श्रद्धालु जब जम्मू लौट रहे थे, तभी श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर उनकी बस पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया। हमले में आठ श्रद्धालुओं की मृत्यु हो गयी थी और करीब 20 अन्य घायल हुए थे।

जम्मू से श्रीनगर की तरफ जा रहे सैन्य वाहनों के काफिले पर घात लगा कर बोनीगाम के पास आतंकियों ने हमला कर दिया। जिसमें दो जवान तुरंत जख्मी हो गए। हमला होते ही काफिले में शामिल जवानों ने जवाबी कार्यवाही। जिसके बाद आतंकी वहां से भाग निकले, लेकिन जवानों ने उनका पीछा किया और हाईवे के साथ सटे नुस्सु क्षेत्र में उन्हें घेर लिया। आतंकी अपनी जान बचाते हुए वहां स्थित एक निजी स्कूल के साथ अब्दुल रशीद लोन की इमारत में घुस गए।

सेना ने आतंकियों को आत्मसमर्पण करने का पूरा मौका दिया गया, लेकिन वे नहीं माने। मुठभेड़ स्थल के आस-पास स्थित सभी घरों के सभी लोगों को सुरक्षाबलों ने आतंकियों की फायरिंग के बीच ही सुरक्षित जगह पर पहुंचाया। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि स्कूल में अवकाश था, अन्यथा वहां पढ़ने वाले बच्चों की जान को खतरा हो सकता था। इस पूरी कार्यवाही के दौरान लोगों को बचाने के लिए श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर वाहनों की दोनों तरफ से आवाजाही भी बंद कर दी गई।

देर शाम आतंकियों की तरफ से गोलियों की बौछार पूरी तरह बंद हो गई। इस दौरान एक जोरदार धमाके में वह इमारत भी नष्ट हो गई, जिसमें आतंकियों ने शरण ली थी। इमारत में एक दर्जन से ज्यादा दुकानें थी। लगभग आधे घंटे बाद सुरक्षाबलों ने तलाशी लेना शुरू की तो उन्हें वहां गोलियों से छलनी दो आतंकियों के शव मिले। फिलहाल, तीसरे आतंकी की तलाश की जा रही है।

इसके मुठभेड़ के बाद जम्मू कश्मीर पुलिस के महानिरीक्षक एसपी वैद ने जवानों को बधाई देते हुए अपने ट्विटर वाल पर लिखा, 'वेल डन ब्वॉयज।'  डीजीपी एसपी वैद ने सोमवार को अपने ट्विटर हैंडल पर जानकारी दी कि एक पाकिस्तानी आतंकी जिसका नाम फुरकान था उसे भी इस एनकाउंटर में मार दिया गया है। उन्होंने बताया था कि फुरकान, लश्कर-ए-तैयबा का डिविजनल कमांडर था। फुरकान के अलावा एक और पाकिस्तानी आतंकी अबु माविया को भी सेना और सुरक्षाबलों ने ढेर कर दिया था।

सेना ने जुलाई में हुए हमले के बाद अपनी कार्यवाही में तेजी ला कर पूरी घाटी में चुन चुन कर आतंकियों का सफाया शुरू कर दिया है। जहां 2016 में सेना ने जहां 157 आतंकियों को मार गिराया था वही साल 2017 में अभी तक 200 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया है।  जिनमे से 120 से ज्यादा विदेशी आतंकी भी शामिल है। गुप्तचर एजेंसी की माने तो कश्मीर घाटी में अभी भी 200  आतंकी सक्रिय हैं। लेकिन सुरक्षाबलों का मानना है कि जल्द ही इनका भी सफाया हो जाएगा। अब इनके पास अब दो ही विकल्प बचते हैं। सुरक्षा बलों ने इनके लिए अब एक ही नीति तय कर दी कि 'आतंकी या तो सरेंडर करें नहीं तो मारे जायेंगे'।

बीते कुछ समय में जम्मू कश्मीर में लश्कर, जैश और हिज्बुल के टॉप कमांडर के एक-एक करके मारे जाने के बाद से आतंकियों की कमर पूरी तरह से टूट गई है। सुरक्षाबलो ने जैश के प्रमुख मसूद अजहर का भतीजा और लश्कर के नंबर दो माने जाने वाले आतंकी मक्की के बेटे को भी ढ़ेर कर दिया।

लेकीन अभी भी पाकिस्तान की ओर से लगातार किये जा रहे संघर्ष विराम उल्लंघन ने ये साफ़ कर दिया है कि वह आतंकियों को सीमापार कराने के लिए कवर फायरिंग करता रहेगा। साल के शुरुआत में ही सुरक्षा बलों को पता चला था की दक्षिण कश्मीर में 150-180 आतंकी छिपे हुए हैं। सेना ने इस पर कार्रवाई करते हुए उन्हें मुठभेड़ो में ढेर करना शुरू कर दिया था लेकिन जुलाई की इस घटना के बाद तो सेना ने अपनी कार्यवाही को और तेज़ कर दिया है। इस पूरे साल सेना को लगातार सफलता मिल रही हैं। लेकिन आतंकियों के साथ हुई इन मुठभेड़ में भारतीय सेना ने भी अपने कई बहादुर सैनिक खोये।

सेना ने मुठभेड़ में गए किसी भी विदेशी आतंकी की लाशों को अब जनता को नहीं सौपती। क्योकि 2015 में जब  सेना ने जब लश्कर कमांडर अबू काशिम को मारने के बाद उसकी लाश लोगों को सौप दी थी तब उसके जनाजे सुपर्दे ख़ाक के शामिल लोगों ने हिंसा फैलाई थी। उसके बाद सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में घाटी के किसी भी जगह मारे जाने वाले पाकिस्तानी आतंकियों और विदेशी आतंकियों के लिए बारामुला जिले में गटामुला में एक कब्रिस्तान बनाया था। जहां पर सुरक्षा बल स्थानीय औकाफ बोर्ड के साथ इन विदेशी आतंकियों को गाड़ता है। लेकिन 2017 में केवल 11 महीनो के अन्दर ही 200 से अधिक आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया है। जिनमे 120 से ज्यादा विदेशी आतंकी है और जिन्हें उनका देश पाकिस्तान भी अपनाने से मना कर रहा है। जिसका असर अब उस कब्रिस्तान पर दिखने लगा जिसे बारामुला जिले में गटामुला में विदेशी आतंकियों को दफनाने के लिए बनाया था। वो कब्रिस्तान भी अब पूरी तरह से भर गया है।

 

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