धारा 370 के कारण ज़ोया की दुर्दशा

10 Mar 2017 13:14:32


किरन बत्रा

मेरा नाम ज़ोया है |   मैं कश्मीर (श्रीनगर) की रहने वाली हूँ |     मैं किसी कारणवश कानपुर आई थी |   वहाँ मैं एक लड़के से मिली |   कुछ समय बाद हमारी दोस्ती हो गई |   धीरे-धीरे हमें लगा की अब हमें विवाह कर लेना चाहिए |   कुछ समय बाद मैंने उसी कानपुर के लड़के से विवाह कर लिया, जो कश्मीर का नहीं है |   हम हँसी ख़ुशी रह रहे थे |   हमारे दो बच्चे हुए |   हमारा जीवन खुशियों से भर गया था और मैं भी उनके साथ विवाह करके बहुत खुश थी |   थोड़े समय बाद मेरे पति की तबियत ख़राब रहने लगी और एक दिन अचानक मेरे पति की मृत्यु हो गई |   अब मेरे पास मेरे अपने घर (श्रीनगर) जाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा था |   मैं जब कश्मीर (श्रीनगर) पहुँची तो मुझे पता चला की धारा 370 के अनुसार  मेरे बच्चों को यहाँ न तो शिक्षा का अधिकार मिलेगा, न यहाँ कोई जमीन खरीद सकते हैं और न ही किसी तरीके का कोई व्यापार आदि कर सकते है |   यहाँ तक की मेरा स्थाई निवास पत्र भी रद हो गया था |   अब आप ही बताएं कि मैं क्या करूँ ? कहाँ जाऊँ ?

 अब मैं जीवन के ऐसे दोराहे पर आ गई हूँ ,जहाँ मेरे लिए कोई रास्ता नहीं बचा |   सारे रास्ते मानो बंद से हो गए हैं |   धारा 370 ने मेरी सारी जिंदगी को बदल कर रख दिया हैं |   

(लेखिका एक समाज सेवी हैं | ज़ोया के साथ लेखिका की बातचीत का एक अंश )

 

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