कश्मीर में आतंक के हमदर्द बनते फारूख अब्दुल्ला

14 Apr 2017 16:00:43


ललित कौशिक


राजनीति में एक शब्द चलता है, कि सब जायज है, लेकिन जायज इतना नही होना चाहिए कि देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा पैदा कर दे

वही हाल इस समय नेशनल कॉन्फेंस के अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला कर रहे है ! जब वो सत्ता में होते है तो अलगावाद और पत्थरबाज उसको देशद्रोही लगते है...लेकिन जैसे ही उनको चुनाव के बाद जनता सत्ता से बाहर करती  है तो उसको पत्थरबाजों की मासूमियत दिखने लगती हैं और उन अलगावादियों और पत्थरबाजों पर अपना सबकुछ कुर्बान करने को उतारू हो जाते है !

हाल ही में फारुक ने पत्थरबाजों के पक्ष में बोलतें हुए बयान दिया था कि ये लोग अपने वतन के लड़  रहे हैं, अपना वतन बोलकर फारुक ने कहीं न कहीं ये दिखा दिया है कि उन पर इस समय पाक प्रेम का भूत सवार है ! इसी तरह का विवादित बयान वे नवंबर 2016 में भी दे चुके है, जिसमे फारुक ने पीओजेके पर भारत के दावे को लेकर कहा था ​कि ​पाकिस्तान ​अधिक्रांत जम्मू कश्मीर हासिल करना  भारत  के लिए आसान नहीं है,  इतनी सी बात भले ही सीधी लगे,लेकिन फारूक ने इसे ऐसे अंदाज में रखा कि उन्होंने कहा पीओजेके तुम्हारे बाप का है क्या, इस प्रकार का बयान देकर वे पहले भी सबकों सख्तें में डाल चुके है.  

जब 1984 में फ़ारूख़ अब्दुल्ला की सरकार को केंद्र ने बर्खास्त कर दिया था, तो उसके बाद से फ़ारूख़ अब्दुल्ला ने तय किया था कि वो केंद्र की सरकार के साथ ही रहेंगे, फिर चाहे वो किसी भी पार्टी की हो. मगर मौजूदा सरकार ने  नेशनलकांफ्रेंस को किनारे कर दिया है. इसलिए अब  उपचुनावों से पहले वो अलगाववादियों की जुबान बोल रहे हैं.

जो अब्दुल्ला बार-बार यह कहते थे कि कश्मीर में सेना की जरूरत नहीं है, लेकिन जब वो  तत्कालीन मुख्यमंत्री थे, तब अब्दुल्ला को उपद्रवियों पर नियंत्रण के लिए सेना बुलानी पड़ी थी। लेकिन कुर्सी पाने के लिए और जीतना के ओछी राजनीति करके जो वे देश और समाज के लिए जो खतरा पैदा कर रहे है, वो ठीक नही है.  

इस तरह की बयानबाजी पर जो वर्तमान परिवेश में अलगाववाद, आतंकवाद और पत्थरबाज की मार को झेल रही भारत की सेना और भारत सरकार को कहीं न कहीं एक तरफ से इस प्रकार के बेतुके बोल बोलनें वाले तथाकथित नेताओं के साथ भी सख्ती से निपटना होगा. ताकि वो इस प्रकार छोटी सोंच वाले बयान देने की कोई हिम्मत न करें !

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