"हम आजाद हैं,​ हमें आजादी नहीं पानी चाहिए"

22 May 2017 18:02:02


ये वीडियो बारामुला के उस गांव की हकीकत बयां कर रही है, जहां न तो विकास की बयार बहती है न ही अच्छे दिनों की सौगात दिखती है। इनकी आवाज सिर्फ इसलिए अनसुनी की जा रही है कि इनके हाथों में पत्थर नहीं बल्कि बाल्टी हैं, इनकी आवाज आजादी के लिए नहीं बल्कि पानी के लिए बुलंद हैं। जब ये प्रदर्शन कर रही महिलाएं बुनियादी सुविधाओं की बात कर रही हैं तो कुछ युवा इन्हें आजादी की परिभाषा समझाते नजर आ रहे हैं। बावजूद इसके महिलाएं साफ कह रही हैं कि वो आजाद हैं और उन्हें आजादी नहीं बुनियादी सुविधाएं चाहिए।

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