हिमालय में विराज चुके हैं बाबा बर्फानी, पहला दस्ता रवाना

29 Jun 2017 11:08:46


अवनीश राजपूत

शिवभक्तों के इंतजार की घड़ियां खत्म हुईं। जम्मू-कश्मीर स्थित हिमालय की गुफा में बाबा बर्फानी विराज चुके हैं। बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पवित्र अमरनाथ यात्रा 29 जून से शुरू हो रही है। यह यात्रा प्रत्येक साल आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर रक्षाबंधन तक पूरे सावन महीने में चलती है। इस यात्रा में पवित्र हिमलिंग दर्शन के लिए लाखों लोग यहां आते हैं। आपको बता दें कि अमरनाथ गुफा दक्षिण कश्मीर के हिमालयवर्ती क्षेत्र में स्थित है। यह श्रीनगर से लगभग 141 किमी. की दूरी पर 3,888 मीटर (12,756 फुट) की उंचाई पर है। इस तीर्थ स्थल पर पहलगाम और बालटाल मार्गों से पहुंचा जाता है।

सुरक्षा में करीब 40 हजार जवान तैनात, आसमान से हो रही निगरानी

अनंतनाग और गंदेरबाल जिलों के पहलगाम और बालटाल आधार शिविर से आज 4,000 यात्रियों के पहले जत्थे को जम्मू कश्मीर के डिप्टी सीएम निर्मल सिंह ने हरी झंडी दिखाई। यात्रा के रास्ते पर तीर्थयात्रियों की सुरक्षा में करीब 40 हजार जवान तैनात किए गए हैं। इसमें स्थानीय पुलिस के साथ ही आर्मी, बीएसएफ और सीआरपीएफ की टीमें शामिल हैं। सुरक्षा में कहीं कोई चूक न रहे इसके लिए सैटेलाइट, ड्रोन कैमरे और बेस कैम्पस में सीसीटीवी से नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही बुलेट प्रूफ बंकर का भी इंतजाम किया गया है। हर बीस मीटर पर स्वचालित हथियार लेकर जवान मौजूद हैं और हर दो सौ से ढ़ाई सौ मीटर पर पुलिस की छावनी बनी हुई है। जहां चालीस हथियारबंद जवान तैनात किये गये हैं। यात्रा के दौरान यात्रियों और श्रद्धालुओं का अपने परिजनों व शुभचिंतकों से संपर्क बना रहे इसके लिए बीएसएनएल विशेष सिम कार्ड जारी कर रहा है।

यात्रा के पांच पड़ाव, जिनको पार करने पर होते हैं बाबा के दर्शन

यात्रा में कुल पांच पड़ाव आते हैं। अमरनाथ यात्रा का पहला पड़ाव पहलगाम है। पहलगाम जम्मू से 315 किलोमीटर की दूरी पर है। यह विख्यात पर्यटन स्थल भी है और यहाँ का नैसर्गिक सौंदर्य देखते ही बनता है। तीर्थयात्रियों की पैदल यात्रा यहीं से आरंभ होती है। पहलगाम के बाद अगला पड़ाव चंदनबाड़ी है, जो पहलगाम से आठ किलोमीटर की दूरी पर है। पहली रात तीर्थयात्री यहीं बिताते हैं। इसके ठीक दूसरे दिन पिस्सु घाटी की चढ़ाई शुरू होती है। कहा जाता है कि पिस्सु घाटी पर देवताओं और राक्षसों के बीच घमासान लड़ाई हुई जिसमें राक्षसों की हार हुई। चंदनबाड़ी से 14 किलोमीटर दूर शेषनाग में अगला पड़ाव है। यह मार्ग खड़ी चढ़ाई वाला और खतरनाक है। यहीं पर पिस्सू घाटी के दर्शन होते हैं। अमरनाथ यात्रा में पिस्सू घाटी काफी जोखिम भरा स्थल है। पिस्सू घाटी समुद्रतल से 11,120 फुट की ऊँचाई पर है। यहाँ पर्वतमालाओं के बीच नीले पानी की खूबसूरत झील है। जिसे शेषनाग झील कहते हैं। यह झील करीब डेढ़ किलोमीटर लम्बाई में फैली है। किंवदंतियों के मुताबिक शेषनाग झील में शेषनाग का वास है और चौबीस घंटों के अंदर शेषनाग एक बार झील के बाहर दर्शन देते हैं। तीर्थयात्री यहाँ रात्रि विश्राम करते हैं और यहीं से तीसरे दिन की यात्रा शुरू करते हैं। शेषनाग से पंचतरणी आठ मील के फासले पर है। मार्ग में बैववैल टॉप और महागुणास दर्रे को पार करना पड़ता हैं। महागुणास चोटी से पंचतरणी तक का सारा रास्ता उतराई का है। यहाँ पांच छोटी-छोटी सरिताएँ बहने के कारण ही इस स्थल का नाम पंचतरणी पड़ा है। यह स्थान चारों तरफ से पहाड़ों की ऊंची-ऊंची चोटियों से ढका है। ऊँचाई की वजह से ठंड भी ज्यादा होती है। बाबा अमरनाथ की गुफा यहाँ से केवल आठ किलोमीटर दूर रह जाती हैं और रास्ते में बर्फ ही बर्फ जमी रहती है। यह रास्ता काफी कठिन है, लेकिन अमरनाथ की पवित्र गुफा में पहुँचते ही सफर की सारी थकान पल भर में छू-मंतर हो जाती है और अद्भुत आत्मिक आनंद की अनुभूति होती है।

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