काश्मीर में चल रहा अतंकवाद एक पूरी इंडस्ट्री है

05 Jun 2017 18:16:03

डाॅ. दीपक द्विवेदी

जम्मू काश्मीर में चल रहा अतंकवाद पूरे भारत में अस्थिरता पैदा करने के लिए किया जा रहा घृति प्रयास है, जिसे अब धर्म का भी रंग पहना दिया गया है। वास्तव में भारत के लिए यह बेहद संवेदनशील मसला है क्योकि काश्मीर का यह अतंकवाद कोई समान्य अतंकवादी कृत्य नहीं है बल्कि एक संगठित इंडस्ट्री है जिसमें काश्मीर में सक्रिय राजनैतिक समूह के अलावा, मीडिया, पाकिस्तान और अरब देशों में तेल के कारोबार से सक्रिय समूह शामिल है।

पिछले 3 सालों में काश्मीर में ब्लैक फंडिंग के मामले में 800 से अधिक लोग गिरफ्तार हुए तथा 2000 से अधिक फर्जी लेनदेन पकड़े गए है.

 

आमतौर देश भर में सभी जानते है कि काश्मीर में अतंकवादी गतिविधयों को फैलाने का काम पाकिस्तान की ओर से किया जा रहा है,लेकिन वास्तव में यह गतिविधियां केवल पाकिस्तान के द्वारा कर पाना संभव नहीं है जब तक कि काश्मीर में हुर्रियत के देश द्रोही नेतागण और मीडिया समुह का सहयोग ना हो, इसके लिए अतंक के पैरोकार पाकिस्तान ने खुफिया तौर पर काश्मीर में अतंकवाद की एक पूरी इंडस्ट्री खड़ी की गई है और इसके लिए बाकायदा बजट बना कर रखा है। काश्मीर में सक्रिय अतंक के पैरोकार अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए विभिन्न रास्तों से वित्तीय मदद हासिल कर रहे है। काश्मीर में अतंकवादी गतिविधयों के लिए पैसा पहुंचाने के लिए एक पुरा नेटवर्क काम करता है। पिछले 3 सालों में काश्मीर में ब्लैक फंडिंग के मामले में 800 से अधिक लोग गिरफ्तार हुए तथा 2000 से अधिक फर्जी लेनदेन पकड़े गए है जिसमें कई सारी फर्जी कंपनियां भी है। जैसा कि अभी अभी एनआईए ने दो दर्जन से भी अधिक ठिकानों पर छापे मारी कर काफी सारी सूचनाएं सामने आई है कि कैसे से काश्मीर में हुर्रियत के नेतागण, मीडिया और कारोबारी समूह द्वारा पाकिस्तान परस्त पैसे का उपयोग कर के काश्मीर में अशांति फैलाने का काम किया जा रहा है। काश्मीर में पत्थरबाजों की मदद के लिए कई सारे ट्रस्ट और एनजीओं काम कर रहे है, यहां के युवाओ को अतंक के ट्रेनिंग कैंप में भेजने के लिए पैसा उपलब्ध कराने का काम धार्मिक कमेटियों और रजिस्टर्ड एनजीओं के माध्यम से किया जा रहा है और बकायदा ये कार्य बैंक एकाउंट के माध्यम से होता रहा है। कई अंतराष्ट्रीय अनुदान भी ऐसे धार्मिक कमेटियों और रजिस्टर्ड एनजीओ को मिल रहे है जिसका उपयोग अतंक की फंडिग में किया जा रहा है।

कैसे आता है अतंकवाद के लिए पैसा ?

काश्मीर में सक्रिय अतंकवादी समूह और उनका समर्थन करने वाले लोगों का पैसा उपलब्ध कराने के लिए हवाला, धार्मिक कमेटियां और सीमा पार के कारोबार की मदद ली जाती है साथ ही साथ जकात के द्वारा भी पैसा और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराया जाता है।

कैसे बनाते है नए युवाओं को अतंकवादी ?

काश्मीर में सक्रिय एनजीओं, धार्मिक कमेटियां और अतंकवाद का समर्थन करने वाले लोग नए युवाओं को अतंकी गतिविधयों में शामिल करने एवं उसका समर्थन करने के लिए इस्लाम धर्म और पैसे का सहारा लेती है यहां के युवाओं को कई प्रकार के जेहादी साहित्य उपलब्ध कराते है और नौकरी तथा व्यापार के लिए पैसा भी देते है फिर उसके बाद या तो उसे अतंकी बना लिया जाता है या अतंकी गतिविधयों उसका सहयोग लिया जाता है।

कैसे होता है अतंक समर्थित मीडिया समूहों का जाल ?

घाटी में सक्रिय मीडिया के लोगों द्वारा भी अतंकवाद को जेहाद धर्म और सरकार विरोधी भावनों को भडक़ाया जाता है। आतंकवादियों को रोल माडल या हीरो के रूप में न्यूज में पेश किया जाता है, पुलिस और सेना द्वारा कार्यवाही करने पर उसे काश्मीर में आजादी की लड़ाई और मानव आधिकारों का रंग देने का काम करते है साथ ही साथ आतंकवादियों को सरकार, पुलिस, सेना की जानकारियां भी पहुंचाई जाती है। इस काम के बदले अरब देशों में पाकिस्तान परस्त उद्योगों के विज्ञापन, भारत में भी ऐसी कंपनियां जिनका कहीं न कहीं कनेक्शन पाकिस्तान है उनसे पैसा मिलता है।

एनजीओं, धार्मिक कमेटियां और करोबारी समूह कैसे लाते है पैसे ?

काश्मीर में सक्रिय कई रजिस्टर्ड और नान रजिस्टर्ड एनजीओं है इनमें करोड़ो का अनुदान देश और विदेशों से आता है, फर्जी कंपनी और फर्जी कारोबार दिखते है ब्लैक पैसे को आतंकवाद में लगते है इसी प्रकार धामिर्क कमेटियां देश भर से करोड़ों का चंदा इकट्ठा करती है और तो और जकात के नाम पर विदेशों से पैसा भी लेती है।  इसी पैसे ये लोग ऐश करते है तथा कुछ पैसे का उपयोग कर पत्थरबाजों, बेरोजगारों को आतंकवाद का समर्थन करने के लिए प्रेरित करने में करती है।

कितने पैसे की है ये आतंक की इंडस्ट्री?

जितने लोगों को आतंकी काम में जोड़ते है और जितनी गंभीर आतंकवादी गतिविधयां करते है उसके हिसाब से पैसे का बँटवारा किया जाता है। फइनंशियल इंटेलिजेंस यूनिट के मुताबिक पाकिस्तान और चीन दोनों मिल कर आतंकवाद के माध्यम से भारत को अस्थिर करने के लिए लगभग 300 अरब डालर सलाना खर्च कर रहे है। जिसमें से 65 फिसदी पैसा केवल और केवल जम्मू काश्मीर में खर्च किया जा रहा है।

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