एक सफाई कर्मचारी का बेटा बन सकता है केवल सफाई कर्मचारी, अनुच्छेद 35A का दुष्प्रभाव

01 Aug 2017 15:34:01



      
शुभम उपाध्याय

जम्मू कश्मीर में रहने वाले भारत के नागरिक वाल्मीकि समुदाय के लोग आज बेहद विकट परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहें हैं। एक लोकतांत्रिक गणराज्य में किसी नागरिक की ऐसी स्थिति होना चिंताजनक है। अनुच्छेद 35A की वजह से आज हजारों की संख्या में सफाईकर्मी के रूप में बसे हुए वाल्मीकि समुदाय के लोग अपने मूल अधिकारों से पूरी तरह वंचित है।  एक गैरसंवैधानिक तरीके से लाये गए अनुच्छेद 35A का दुष्परिणाम आज राज्य के वाल्मीकि समुदाय को भोगना पड़ रहा है।

1957 में एक समय जम्मू कश्मीर के सफाईकर्मियों ने हड़ताल कर दिया और पुरे राज्य में साफ़-सफाई बंद होने के चलते गन्दगी और बीमारियां फैलने लगी,  तब जम्मू कश्मीर के तत्कालीन प्रधानमंत्री बक्शी गुलाम मोहम्मद ने पंजाब से 206 वाल्मीकि परिवारों को सफाईकर्मी के रूप में बुलाया था साथ ही उन्हें जम्मू कश्मीर के निवासी की पात्रता देने का वादा भी किया था। तत्कालीन समय में सफाईकर्मी के कार्य के लिए नियम लाकर निवासी पात्रता की अनिवार्यता को हटा दिया गया था। तब से लेकर आज 60 साल बाद भी वाल्मीकि समुदाय के लोगों को उनका मूल अधिकार नहीं मिल पाया है। राजनैतिक और संवैधानिक धोखे के शिकार हुए वाल्मीकि समुदाय के लोग आज लोकसभा चुनाव में तो वोट डाल सकते हैं किन्तु अपने राज्य के विधानसभा चुनाव में नहीं। और तो और जम्मू कश्मीर में वाल्मीकि समुदाय का व्यक्ति प्रधानमंत्री तो बन सकता है लेकिन राज्य के किसी ग्राम के सरपंच के लिए नामांकन भी दाखिल नहीं कर सकता।

वाल्मीकि समुदाय की वर्तमान में स्थिति ऐसी है कि इस समुदाय के पढ़े लिखे युवाओं को भी अंततः सफाईकर्मी ही बनना पड़ता है। कोई स्नाकोत्तर किया हुआ युवा भी अनुच्छेद 35A के कारण पूरा जीवन सिर्फ सफाईकर्मी के रूप में गुजारता है। संवैधानिक धोखे के शिकार हुए वाल्मीकि समुदाय के लड़कों की सरकारी नौकरी नहीं लगने की वजह से उनकी शादियों में भी दिक्कतें आती हैं वहीं समुदाय की पढ़ी लिखी लड़कियां किसी अन्य राज्य में शादी कर रही है जिससे की जम्मू कश्मीर राज्य में इस समुदाय की स्थिति दिन ब दिन दयनीय होते जा रही है। भविष्य अंधकार में देखकर वाल्मीकि समुदाय के पढ़े लिखे युवा अन्य राज्यों में पलायन को मजबूर हो रहें हैं।

सफाई कर्मचारियों के उत्थान के लिए राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम और राज्य के समाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के आपसी सहयोग से योजना चलाई गयी थी किन्तु स्थाई निवासी प्रमाण पत्र ना होने की वजह से वाल्मीकि समुदाय को इस योजना का कोई लाभ नहीं मिल पाया।

जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 35A वाल्मीकि समुदाय के लिए एक अभिशाप सा है,  जिससे पुरे समाज का शोषण हो रहा है।

 

 

 

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