मीरपुर मुज्जफराबाद और गिलगिल बाल्टिस्तान - जम्मू कश्मीर का वह हिस्सा राज्य के नक्शे में है लेकिन भारतीय जनता के जेहन में नहीं !!!!!

14 Aug 2017 12:58:16

Neeraj Mishra

आज हम देश के मुकुट जम्मू कश्मीर को जिस स्वरूप में देख रहे हैं हकीकत में वह थोड़ा अलग है। वास्तविकता यह है कि आज़ादी के महज कुछ महीनों के बाद जम्मू कश्मीर के बहुत बड़ा हिस्से पर जो कि भू राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण है , काबिलाई आक्रमण की शक्ल में पाकिस्तानी सेना ने बलात कब्जा कर लिया । देश के बाकी रियासतों का अनुसरण करते हुए जम्मू कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भी 26 अक्टूबर 1947 को विलय पत्र पर बिना  शर्त के हस्ताक्षर कर दिए थे इस आक्रमण के फलस्वरूप सामरिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण  कश्मीर के उत्तरी भाग जिसमें मीरपुर, मुज्जफराबाद, गिलगित बाल्टिस्तान, शाक्छगम घाटी और जिसमे  कुछ हिस्सा जम्मू का भी शामिल था, पाकिस्तान के कब्जे में चला गया ।पिछले 70 सालो में एक आमधारणा बन गई है कि जम्मू कश्मीर का मतलब सिर्फ कश्मीर से है और थोड़ा बहुत जम्मू से लेकिन हकीकत इसके उलट है। जम्मू कश्मीर सिर्फ जम्मू या कश्मीर तक सीमित नहीं है बल्कि भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप  से चार क्षेत्रों में विभक्त है जिसमें लद्दाख और गिलगिल बाल्टिस्तान वाला क्षेत्र भी शामिल है। 


कश्मीर जोकि सबसे छोटा संभाग है 15000 वर्ग किमी में फैला हुआ है जिसके अन्तर्गत 10 जिले आते है। तीन घाटियों वाले इस इलाके में ज्यादातर सुन्नी मुसलमान रहते है परन्तु गुरेज घाटी में शीना समुदाय के लोग भी बहुतायत में रहते है तीसरी घाटी लोबाब घाटी  के नाम से जानी जाती है जो अपने बंगुस मैदानों के लिए प्रसिद्ध है।


जम्मू दूसरा संभाग जो  कि कश्मीर से क्षेत्रफल में लगभग दुगुना है जिसमें भी 10 जिले है और 27000 वर्ग किमी में फैला है। इस हिस्से  में ज्यादातर डोगरा, गुज्जर और पहाड़ी लोग निवास करते है।


तीसरा और सबसे बड़ा संभाग लद्दाख जो बुद्धिस्ट बहुल क्षेत्र है जो क्षेत्रफल  में जम्मू से लगभग दुगुना और कश्मीर में चार गुणा बड़ा है। लद्दाख संभाग 2 जिलों से मिलकर बना है जिसमें कारगिल और लेह आता है तथा जिसका क्षेत्रफल 59000 वर्ग किमी है। 


 

चौथा और महत्वपूर्ण हिस्सा गिलगिल बाल्टिस्तान वाला है जिसपे पाकिस्तान ने 1947 से अनाधिकृत रूप से कब्जा जमाया हुआ है जो आज पाक अधिक्रान्त जम्मू कश्मीर के नाम से जाना जाता है।

 

जम्मू कश्मीर के कुल क्षेत्रफल 2,22,236 वर्ग किमी में से आज  सिर्फ 1,01,000 वर्ग किमी ही भारत के अधिकार क्षेत्र में आता है शेष जिसमें गिलगित बाल्टिस्तान 78114 वर्ग किमी का क्षेत्र , अक्साई चिन (37555 वर्ग किमी) और शाक्छगम घाटी (5180 वर्ग किमी) वाला क्षेत्र जिसे कालांतर में पाकिस्तान ने 1963 अनाधिकृत रूप से चीन को सौंप दिया।चीन ने भारत के अक्साई चिन वाले क्षेत्र पर पहले ही अनाधिकृत रूप से कब्जा कर रखा था जो आज चीन अधिक्रांत जम्मू कश्मीर के नाम से जाना जाता है। भौगलिक दृष्टि से यह क्षेत्र विश्व में अद्वितीय है जिसमें दुनिया की 10 सबसे ऊंची चोटियों मे से 8 यही मिलती है, जिनमें दूसरी सबसे ऊंची चोटी K-2 भी यही पर है जो काराकोरम रेंज आती है। आज चीन ने इस क्षेत्र में चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा का भी निर्माण कर रहा। इस बहाने से उसने अपनी सेना का बेस भी  बना रखा है जो सामरिक दृष्टि से भारत के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण है।

 

 

आज़ादी के 70 साल बाद भी यह एक ऎसी समस्या बनी हुई है जिसने  हमेशा देश की दशा और दिशा को प्रभावित किया है इन सबके बावजूद  देश के आमजन में देश के इस हिस्से के बारे जानकारियों का बहुत अभाव है और जो थोड़ा बहुत है भी  वह आधा अधूरा है। रणनीतिक रूप से महत्वूर्ण , भरपूर खनिज पदार्थों और प्राकृतिक संसाधनों वाला यह हिस्सा  बल्टी, दर्दिक, शीना, कोहिस्तान बोलने वाले हुंजा , नागर, पुनियाल जैसे शिया बहुल मुस्लिम समुदायों का निवास स्थान रहा है जिनकी अपनी एक संस्कृति, रहन सहन और खानपान है। परन्तु पाकिस्तानी सरकार और सेना के कुचक्रों के कारण लुप्तप्राय होते जा रहे । जब भी इन लोगो द्वारा अपने हक के लिए आवाज़ उठाए जाती है तब तब इन्हें पाकिस्तानी सेना के दमन का सामना करना पड़ता है। मानवाधिकारों के हिमायती लोगो तक भी इस दमनचक्र की आवाज़ नहीं पहुंच रही। भारत सरकार ने भी इस मामले की बहुत अनदेखी की है। हालांकि पिछले साल प्रधानमन्त्री ने  लालक़िले से पहली बार इस मुद्दे को उठाया जरूर था पर अभी तक इस मामले में एक ठोस रणनीति का अभाव है। आज जरूरत है आमजन तक को इस मुद्दे कि सही जानकारी पहुंचाने की और देशव्यापी जागरूकता फैलाने की ताकि सरकार और विश्व समुदाय इनपे हो रही अमानवीय घटनाओं का संज्ञान ले और कोई ठोस रणनीति तैयार कर सके।

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