जम्मू कश्मीर में बाढ़ राहत पर बड़ी अनियमितता : कैग रिपोर्ट

21 Aug 2017 15:46:16


 शुभम उपाध्याय

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने जम्मू कश्मीर राज्य आपदा प्रबंधन द्वारा प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए आवंटित कोष में अनियमितता का खुलासा किया है। कैग ने बचाव एवं राहत कार्यों पर हुए खर्च एवं बचाव हेतु समानों की खरीददारी पर कई सवाल उठाते हुए आपदा प्रबंधन की स्थिति को सामने लाया है। वर्ष 2010-11 से 2014-15 तक राज्य आपदा प्रबंधन प्रतिक्रिया निधि (एसडीआरएफ) से खर्च हुए 1369.16 करोड़ की राशि के ऑडिट रिपोर्ट को समक्ष रखते हुए बताया कि आपदा अल्पीकरण के उद्देश्य के लिए किये जाने वाले व्यय में से 25% जोकि लगभग 342.43 करोड़ है, को 'अयोग्य' तथा गैरजरूरी कार्यों में इस्तेमाल किया गया है। इन सब के अलावा राहत राशि को अधिक भुगतान करने और ऊँचे दामों में सरकारी खरीद के खर्च पर भी ऊँगली उठाया है।

 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बहुत संकटजनक खतरों और पिछले कुछ समय में कई आपदाओं की घटनाओं के बावजूद राज्य सरकार द्वारा आपदाओं के प्रभाव को कम करने और उसके लिए तैयार रहने के लिए उठाये गए कदम उम्मीद के अनुरूप नहीं थे। सांस्थानिक व्यवस्थाओं, नीतियों और योजना निरूपण में कमियां रहीं और आपदा पूर्व उपायों के क्रियान्वन में भी खामियां पाई गयी।

 

2014 में जम्मू कश्मीर में आये बाढ़ में हुई अव्यवस्थाओं का उदाहरण देते हुए कैग ने अपनी में कहा है कि राज्य को विशेष योजना सहायता (एसपीए) तहत क्षतिग्रस्त अवसंरचना के पुनः निर्माण के लिए अक्टूबर 2014 में 1000 करोड़ रुपये दिए गए थे। इसमें से 4.66 करोड़ एसपीए की शर्तों का उल्लंघन करते हुए खर्च किये गए और 37.58 करोड़ रुपये उन कार्यों पर खर्च किए गए जो क्षतिग्रस्त अवसंरचना के पुनःनिर्माण से सम्बंधित नहीं थे।

 

कैग ने रिपोर्ट में श्रीनगर प्रशासन का नाम लेते हुए यह भी कहा कि बाढ़ प्रभावितों को बचाने के लिए श्रीनगर प्रशासन ने 1.77 करोड़ रुपये से कश्मीर शिकारा एसोसिएशन से 504 किश्तियां (नौकाएं) ली गयी, लेकिन बैंक स्टेटमेंट में यह भुगतान 30.16 लाख कम दिखाया गया है। शिकारा एसोसिएशन में जिनके नाम नहीं भी हैं उनको भी 41.48 लाख दिए जाने की बात कही गयी है। नौकाओं के इस्तेमाल, शिविरों के दस्तावेज, बचाये लोगो की संख्या इसका किसी भी तरह का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। कचरा साफ़ करने, मलबा हटाने, और सहायता कार्य में लगे जेसीबी, ट्रक, मालवाहक गाड़ियों की संख्या भी एमएमसी और सेनेटरी इंस्पेक्टरों द्वारा अलग अलग बताई गयी है। जिससे बड़ी अनियमितता का खुलासा हुआ है। निगम मलबे एवं शव हटाने द्वारा किराये से लिए वाहनों के भी पुरे रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। 2.14 करोड़ आवंटित किये गए थे जिसमें केवल 1.13 करोड़ की राशि के खर्च का सही ब्यौरा पता चल पाया है। कैग ने यह भी कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगो के लिए 13.26 करोड़ के तम्बू ख़रीदे जाने की बात की गयी थी लेकिन 2.84 करोड़ के तम्बुओं का इस्तेमाल नहीं हुआ वहीं 34 लाख के तम्बू लापता पाये गए।

 

रिपोर्ट में सरकार को सलाह दी गयी है कि एसडीआरएफ के तहत दी जाने वाली राशि की उपयुक्त निगरानी की जाये तथा उसके सदुपयोग के लिए तंत्र को मजबूत बनाया जाये। अत्यंत संवेदनशील 13 जिलों में खतरा, जोखिम मूल्यांकन कर एक मानचित्र तैयार करने का सलाह दिया गया है जिससे आपदा तत्परता के लिए साधनों की प्राथमिकता के साथ तत्काल चेतावनी जारी करने का सिस्टम भी तैयार किया जा सके।

 

 

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