पुलवामा हमले के स्थानीय शहीद के लिए घाटी रोई

31 Aug 2017 12:49:37


 

Neeraj Mishra

सीआरपीएफ की त्वरित कार्रवाई टीम के कांस्टेबल मोहम्मद यासीन तेली ने पुलवामा में जिला पुलिस लाइन पर हमला करने वाले जैश-ए-मोहम्मद  के तीन फिदायीनों के खिलाफ आतंकवाद विरोधी अभियान चलाया था ।

जैसा की सुरक्षा बलों ने परिसर को घेर लिया था, बारामूला के कोन्गोमदरा गांव के मूल निवासी 32 वर्षीय तेली को पता चला कि फिदायीनों में से एक पुलिस लाइन के टावर 'E' में छिपा हुआ है ।

एक आईईडी विशेषज्ञ के तौर पर, तेली को कांस्टेबल दिनेश दीपक के साथ प्लांट के निचले भाग में विस्फोटक को लगाने का काम सौंपा गया था ताकि इसे उड़ाया जा सके। उसने टावर तक पहुंचने के लिए बड़ी बहादुरी से कई ग्रेनेड लांचर का सामना किया और विस्फोटक को लगाने में कामयाब रहे 

एक सैन्य प्रशिक्षित फिदायीन और शार्पशूटर  ने तीसरी मंजिल से तेली को देख लिया  और उसने सिर को निशाना बनाते हुए गोली चला दी लेकिन इससे पहले  तेली के राइफल शॉट ने भी उसे निशाना बना लिया।

एक वीरता पुरुस्कार नामित तेली की शाहदत  ने घाटी के निवासियों को सुरक्षा बलों  की मौतों पर प्रतिक्रिया देने के तरीके में एक महत्वपूर्ण बदलाव परिलक्षित किया है। रविवार को उनके  गांव में अंतिम संस्कार के दौरान सैकड़ों स्थानीय लोगों ने इकट्ठा हुए और इस बहादुर के लिए प्रार्थना की। एक अधिकारी ने कहा कि किसी सैन्यकर्मी के अंतिम संस्कार में कई सालों में पहली बार इतनी भीड़ देखी गयी।

शनिवार के हमले के बाद के आकलन में यह सामने आया कि तीन फिदाइन तड़के परिसर में घुसे जब भारतीय जवान विश्राम कर रहे थे , तीनो ने टावर के  अलग अलग ब्लॉक मे पोजीशन लेली जहाँ जम्मू कश्मीर पुलिस अफसरों के 36 परिवार रहते हैं ।

सुरक्षा बलों को यह भी सूचित किया गया कि  जम्मू और कश्मीर के दो  पुलिस अधिकारी लापता हैं, और उनका अपहरण होने का अंदेशा था।

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