उरी हमले का एक साल: 18 शहीदों को नमन, आतंक से निर्णायक युद्ध जारी

18 Sep 2017 12:04:18


 

 

रवि पाराशर

जम्मू-कश्मीर के उरी में सैनिक ठिकाने पर हुए हमले को एक साल हो रहा है। पिछले साल 18 सितंबर को उरी में पाकिस्तानी आतंकियों के हमले में 18 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। ख़ुफ़िया इनपुट है कि आतंकवादी 18 सितंबर के आसपास फिर हमले कर सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। दरअस्ल, कश्मीर में आतंक के ख़िलाफ़ लड़ाई पिछले साल आठ जुलाई को हिज़्ब सरगना बुरहान वानी के एनकाउंटर पर हुई अप्रत्याशित प्रतिक्रिया के बाद कई स्तरों पर तेज़ की गई थी, लेकिन उरी में सैनिक ठिकाने पर धावा बोले जाने के बाद से भारतीय सुरक्षा और दूसरी सामरिक एजेंसियों ने पाकिस्तान को सबक़ सिखाने की निर्णायक मुहिम शुरू की, जो अब रंग ला रही है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने अभी-अभी कश्मीर दौरा किया है।

पाकिस्तान के दोस्त चीन के शियामेन शहर में हुए नौंवें ब्रिक्स सम्मेलन का संयुक्त घोषणा पत्र इसका सबसे ताज़ा और पुख़्ता सुबूत है। घोषणा पत्र में कहा गया कि सभी देशों को मिलकर आतंकवाद से लड़ना होगा। इसमें 16 बार आतंकवाद शब्द आया है। साथ ही लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद आतंकवादी संगठनों का नाम शामिल किया गया है। ऐसा इसके बावजूद संभव हुआ है कि सम्मेलन से पहले चीन ने कोशिश की थी कि भारत पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के मुद्दे को तूल न दे। लेकिन आख़िरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक जीत हुई। अब शायद पठानकोट हमले के मास्टरमाइंड जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र के ज़रिए अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कराने की भारत की कोशिश का चीन विरोध न करे। कई मौक़ों पर चीन वीटो के ज़रिए इस कोशिश को पलीता लगा चुका है। ब्रिक्स में चीन की बर्फ़ पिघलने के बाद अब पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ और सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा के सुर भी बदल गए हैं।

बहरहाल, 18 सितंबर को उरी हमले के बाद जिस तरह भारतीय फ़ौज ने बदले की स्पष्ट कार्रवाई की, उससे सैनिकों का मनोबल काफ़ी बढ़ा और इसके नतीजे कश्मीर घाटी में आतंकियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई में भी दिखाई दे रहे हैं। 28-29 सितंबर, 2016 की रात भारतीय सैनिक दस्ते ने पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की और आतंकियों के कई ट्रेनिंग कैंप ध्वस्त कर दिए। बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए। हालांकि अगले दिन दोपहर में फ़ौज ने जब मीडिया को बुलाकर यह ऐलान राजधानी दिल्ली में किया, तो विपक्षी पार्टियों ने शंका जताई। पाकिस्तान को तो इसे झुठलाना ही था। पिछले हफ़्ते सात सितंबर को उत्तरी कमान के जनरल ऑफ़िसर-कमांडर-इन-चीफ़ लेफ़्टिनेंट जनरल देवराज आंबू ने चेताया है कि ज़रूरत पड़ी, तो सेना दोबारा सर्जिकल स्ट्राइक से चूकेगी नहीं। उन्होंने कहा कि भारत पर हमलावर आतंकवादियों के ख़ात्मे के लिए नियंत्रण रेखा तोड़ी भी जा सकती है।

कश्मीर में आतंक के पूरी तरह सफ़ाए के लिए कई स्तर पर कार्रवाई चल रही है। नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी यानी एनआईए की टैरर फंडिंग के ख़िलाफ़ ताबड़तोड़ कार्रवाई भी असर दिखाने लगी है। नोटबंदी ने तो कश्मीर में आतंक की कमर तोड़ी ही, साथ ही पाकिस्तान में छप रही जाली करेंसी के ज़रिए सीमाई इलाक़ों में अर्थव्यवस्था पर हमले को भी मुंहतोड़ जवाब दिया। एक टीवी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में अलगाववादी ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कुछ नेताओं ने जब माना कि कश्मीर में आतंकवाद का बढ़ावा देने के लिए मुस्लिम देशों से हवाला के ज़रिए फ़ंडिंग होती है, तो एनआईए ने जाल बुनने में देर नहीं लगाई। एनआईए की कार्रवाई से ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का कथित संयुक्त नेतृत्व सैयद अली शाह गीलानी, मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ और यासीन मलिक बौखला गया है। सुर्ख़ियां बटोरने के लिए उन्होंने नौ सितंबर को दिल्ली में एनआईए मुख्यालय पर प्रदर्शन का ऐलान किया, लेकिन ऐसा कर नहीं पाए।

आतंकी फंडिंग की हवाला कड़ियों को तोड़ने के लिए एनआईए ने पिछले हफ़्ते छह और सात सितंबर को कश्मीर, दिल्ली और गुरुग्राम में 38 ठिकानों पर छापे मारे। एजेंसी इससे पहले भी कश्मीर और देश के कई हिस्सों में छापेमारी कर कई संदिग्धों को गिरफ़्तार और बहुत से दस्तावेज़ ज़ब्त कर चुकी है। गिरफ़्तार किए गए लोगों में हुर्रियत के पाकिस्तान परस्त कट्टरपंथी सैयद अली शाह गीलानी का दामाद अल्ताफ़ फंटूश भी शामिल है। हुर्रियत का एक और प्रमुख नेता शब्बीर अहमद शाह भी शिकंजे में है। हवाला कारोबारियों के तार सऊदी अरब तक फैले हैं। ऐजेंसी ने कहा है कि उसके पास हुर्रियत के बड़े नेताओं के ख़िलाफ़ सुबूत हैं, उन्हें वक़्त आने पर गिरफ़्त में लिया जाएगा। कहा जा सकता है कि 90 के दशक में कश्मीर में हथियारबंद आतंकवाद की शुरुआत के बाद आतंक के ख़िलाफ़ इतनी कड़ी और समग्र कार्रवाई पहली बार हो रही है। जम्मू-कश्मीर पुलिस प्रमुख एसपी वैद्य ने भी कहा है कि आतंकवाद के सफ़ाए के लिए ‘ऑपरेशन ऑलआउट’ जारी रहेगा।

गत 10 जुलाई की रात अमरनाथ यात्रियों पर हमले के विरोध में घाटी में जिस तरह साझा प्रतिक्रिया आई, उससे भी साफ़ है कि आम कश्मीरी आतंक से आज़िज़ आ चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाल के अमेरिका दौरे में बड़ी सफलता मिली। पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर से भारत के ख़िलाफ़ अघोषित युद्ध कर रहे और पूरे विश्व में आतंकवाद के बीज बो रहे हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन के मुखिया सैयद सलाहुद्दीन को अमेरिका ने वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया। अमेरिका ने यह घोषणा 26 जून को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रधानमंत्री मोदी से शिखर वार्ता से ठीक पहले कर जता दिया कि वह आतंक के ख़ात्मे के मामले में हर तरह से भारत के साथ है।

ईद के मौक़े पर सामने आए दो वीडियो ने फिर दुनिया के सामने साफ किया कि पाकिस्तान की ज़मीन पर आतंक के कटीले झाड़ फल-फूल रहे हैं। एक वीडियो सैयद सलाहुद्दीन का था, जिसमें वह कश्मीर के हिज़्ब सरगना रहे बुरहान वानी की बरसी पर ख़ून-ख़राबा करने और विरोध प्रदर्शनों के लिए आतंकियों को हुक्म देता सुनाई दिया। जमात-उद-दावा के मुखिया और 26 / 11 को मुंबई पर हमले के मास्टरमाइंड हाफिज़ सईद का एक क़रीबी रिश्तेदार दूसरे वीडियो में श्रीनगर के पंथाचौक इलाके के डीपीएस स्कूल में हुई मुठभेड़ के दौरान फंसे दो आतंकियों के लिए दुआ करता हुआ सुनाई दिया। वीडियो में जमात-उद-दावा का एक्टिंग चीफ़ अब्दुल रहमान मक्की भी दिखाई दिया। गत 24 जून को सीआरपीएफ़ के दल पर हमला करने वाले दो आतंकी डीपीएस स्कूल में छुप गए थे। हमले में सीआरपीएफ़ के सब इंसपेक्टर शहीद हो गए। बाद में 17 घंटे चली मुठभेड़ में दोनों आतंकी ढेर कर दिए गए।

सेना, सीआरपीएफ़ और जम्मू-कश्मीर पुलिस घाटी में सक्रिय आतंकियों को चुन-चुन कर मारने के लिए कटिबद्ध हैं। ‘ऑपरेशन ऑलआउट’ शुरू करते वक्त सुरक्षा बलों ने कश्मीर के 13 ज़िलों में सक्रिय 258 स्थानीय और विदेशी आतंकवादियों की लिस्ट तैयार की थी। यह भी जान लीजिए कि जमात-उद-दावा प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा का ही मुखौटा संगठन है। हाफिज़ सईद की पत्नी का भाई वीडियो में डीपीएस स्कूल में फंसे लश्कर के आतंकियों की सलामती की दुआ कर रहा है, तो यह बात और पुख़्ता हो जाती है।

‘ऑपरेशन ऑलआउट’ के तहत एक-एक आतंकी से जुड़ी सारी जानकारियां जुटाई गई हैं। इस काम में अमनपसंद कश्मीरियों ने भी मदद की है। साथ ही बंदूक उठा चुके स्थानीय आतंकियों के परिवारों और मित्रों के ज़रिए उन पर आत्मसमर्पण के लिए भावनात्मक स्तर पर भी दबाव डलवाया जा रहा है। यह ऑपरेशन आनन-फ़ानन में नहीं शुरू किया गया, बल्कि काफ़ी समय से आतंक के संहार की इस योजना पर काम चल रहा था। इसका ही नतीजा है कि गत सात जून को जम्मू कश्मीर पुलिस ने जानकारी दी कि हिज़्ब सरगना सब्ज़ार भट के जनाज़े में दिखाई दिए आतंकी दानिश अहमद ने सरेंडर कर दिया। वह उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा का रहने वाला है। पुलिस के मुताबिक़ दानिश के माता-पिता उसके खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन पर उसे मनाने के लिए मान गए। दूसरे कई स्थानीय आतंकियों के परिवार भी बेटों को मनाने में लगे हैं।

सेना के ‘ऑपरेशन ऑलआउट’ को प्रभावी बनाने के लिए दक्षिण कश्मीर में सुरक्षा बलों के दो हज़ार अतिरिक्त जवान तैनात किए गए। इसके अलावा ख़बर यह भी है कि जम्मू कश्मीर पुलिस को सौ बख्तरबंद गाड़ियां इस महीने तक मुहैया करा दी जाएंगी। आतंकियों को खत्म करने के लिए बनाए गए मास्टरप्लान के तहत जो लिस्ट बनाई गई, उसमें सबसे ज्यादा 136 आतंकी लश्कर के थे। हिज्ब के 95, जैश-ए-मोहम्मद के 23 और अलबद्र के एक आतंकी की पहचान की गई। लिस्ट में शामिल जम्मू कश्मीर के 13 जिलों में सक्रिय 130 आतंकी स्थानीय थे और 128 विदेशी, ख़ासकर पाकिस्तानी थे। सबसे ज्यादा 39 आतंकी सोपोर में थे, जिनमें 24 विदेशी थे। इसके बाद कुपवाड़ा में सक्रिय 34 आतंकियों में से 32 विदेशी थे। हंदवाड़ा में 28 विदेशियों समेत 31, शोपियां में 26, कुलगाम (एक विदेशी), पुलवामा (छह विदेशी) और अवंतीपोरा (पांच विदेशी) में 25-25 आतंकी, बारामूला में सात विदेशियों समेत 11, श्रीनगर में छह विदेशियों समेत नौ, अनंतनाग में एक विदेशी समेत नौ, गांदेरबल में चार (तीन विदेशी) और बडगाम में कुल चार स्थानीय आतंकियों की पहचान की गई। इनमें से कई आतंकी अभी तक मारे जा चुके हैं।

कड़ी चौकसी की वजह से पाकिस्तान से घुसपैठियों की संख्या में भी कमी आई है। उत्तरी कमान के लेफ़्टिनेंट जनरल देवराज आंबू ने सात सितंबर को जानकारी दी कि एलओसी के पास 250 और पीर पंजाल इलाक़े में सीमा पार 225, कुल 475 आतंकी घुसपैठ की तैयारी में हैं। ज़ाहिर है कि सेना को इतनी सटीक जानकारी है, तो घुसपैठ रोकने के लिए पुख़्ता इंतज़ाम किए ही गए होंगे। आने वाले दिनों में मौसम प्रतिकूल होने से यह संख्या और घटेगी। इसके अलावा पीओजेके और गिलगिट-बल्तिस्तान में भी पाकिस्तान के ख़िलाफ़ आंदोलन तेज़ हुए हैं। ऐसे में सुरक्षा बलों का विजयी अभियान सफल होने की पूरी उम्मीद है। भारत के सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के ताज़ा बयान से सेना की तैयारियां समझ में आती हैं। छह सितंबर को उन्होंने दिल्ली में कहा कि चीन और पाकिस्तान से एक साथ युद्ध की आशंका ख़ारिज नहीं की जा सकती। कश्मीर में निर्णायक संघर्ष जारी और ऐसे में पाठकों के लिए एक सवाल है- मंत्रिमंडल विस्तार पर मोदी की तारीफ़ में किए गए नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला के ट्वीट को क्या कश्मीर की बदलती सियासी फ़ज़ा का संकेत माना जा सकता है?

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