कश्मीर में किया मौलवी ने बच्चों का रेप लेकिन धारा 370 की वजह से बच्चों को न्याय नहीं मिल सका

26 Sep 2017 23:01:27

 


ये चित्र सांकेतिक है 
 
जम्मू कश्मीर के सोपोर जिले में एजाज शेख नाम के एक मौलवी पर बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगा है। एजाज शेख ने अपने आस पास के क्षेत्र में ऐसा माहौल बनाया था कि सभी उसका सम्मान करते थे। वो कहता था कि उसने एक जिन्न को अपने काबू में कर रखा है और उसकी मदद से सारी परेशानियों को दूर कर सकता है। मौलवी छोटे बच्चों के शोषण के लिए कहता था कि जिन्न केवल 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से ही मिलता है, जिसको सच मानकर आसपास के क्षेत्र वाले अपने बच्चों को मौलवी के पास भेज दिया करते थे। यही नहीं अपने बच्चों के साथ साथ लोग अपने भतीजे, भांजे, और रिश्तेदारों के बच्चों को भी भेज देते थे। इसके बाद मौलवी कई बार जिन्न आने का ढोंग कर तो कई बार खुलेआम अपनी घिनौनी हरकतों को अंजाम देता था। 
 
छोटी सी उम्र के उन मासूम बच्चों के साथ बलात्कार करने वाला मौलवी खुद को क़ुरान और अरबी का ज्ञानी बताता था। पुलिस ने अब मौलवी पर धारा 377 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि जम्मू कश्मीर में लागू धारा 370 की वजह से वहाँ प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज एक्ट (पोस्को) नहीं है, जिसकी वजह से शोषण के शिकार बच्चों को न्याय नहीं मिल पाता। इसी की वजह से ही मौलवी को जल्द ही जमानत भी मिल गई। 
 
छोटी उम्र में शारीरिक शोषण होने का असर :
 
बच्चों को शुरू से ऐसे लोगो द्वारा ब्रेनवॉश किया जाता है। अपने घिनौने कृत्य को अंजाम देने से पहले मानसिक रूप से कमजोर किया जाता है। इससे पीड़ित कई बच्चे जो अब बालिग़ होने जा रहें हैं वो अभी तक इन सदमों से बाहर नहीं निकल सकें हैं। कुछ मनोवैज्ञानिक और बच्चों के जानकार लगातार इन बच्चों की कॉन्सिलिंग कर रहें हैं। बच्चों के मामले के वरिष्ठ जानकार श्री योगेश कुमार से बातचीत में उन्होंने बताया कि उनके अनुसार इस कृत्य के बाफ बच्चों में डर, निराशा, असहजता और डिप्रेशन बढ़ जाता है जिससे उन्हें लगातार कॉन्सिलिंग की आवश्यकता पड़ती हैं इसके अलावा घर परिवार में भी मानसिक रूप से सपोर्ट करने की जरुरत होती है। बच्चों लो ना सिर्फ शारीरिक स्तर पर बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्तर पर भी बच्चों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है जिसकी वजह से इसका असर लंबे समय तक हो सकता है। 
 
जिस धारा 370 की बात कर उसे जम्मू कश्मीर के लोगों के लिए हितकारी बताया जाता है वही 370 असल में जम्मू कश्मीर के लोगो के लिए एक विध्वंसक का काम करता है। आज इसी की वजह से यौन शोषण हो रहे बच्चे और छोटी बच्चियां न्याय से वंचित रह जाती है। POSCO के लागू ना होने से कितने ही परिवार उजड़ जाते हैं, कितने ही बच्चों का भविष्य बर्बाद होता जा रहा है। पॉस्को एक्ट की तरह ही या पॉस्को एक्ट को ही जम्मू कश्मीर में लागू कराना आज जनता के साथ साथ विशेषज्ञों की बड़ी मांग बनती जा रही है।
 
जिस उम्र में बच्चों को खेलना पढ़ना होता है उम्र में उनके साथ हैवानियत कृत्य इसी सोच के साथ किया जाता है कि धारा 370 उन्हें बचा लेगा। और ऐसे लोगो की संख्या को मात्र उँगलियों में गिना जा सकता है। ऐसे दुष्कृत्य करने वाले हैवानों से अपने बच्चों और परिवार को बचाने के लिए हम जम्मू कश्मीर के।निवासियों को ही एक होना होगा। गैरसंवैधानिक नियमों और कानून के आड़ में हो रहे कुकृत्यों से बचने के लिए संविधान के नियमों और प्रावधानों पर पुनर्विचार कर जम्मू कश्मीर के निवासियों के लिए भी न्याय सम्मत बनाना होगा।
 
 
 

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