सत्तर सालों में पाक अधिक्रान्त कश्मीर में मूलभूत सुविधाएँ ना देने वाले पाकिस्तान को जम्मू कश्मीर का मुद्दा उठाते शर्म आनी चाहिए।

28 Sep 2017 19:41:03

 

एक तरफ पकिस्तान का विकास और दूसरी और भारत के विकास

Neeraj Mishra

भारत और पाकिस्तान को अलग हुए 70 साल बीत गए। विभाजित दोनों देशों ने तरक्की और विकास की अपनी यात्रा  अलग –अलग तरीके से शुरू की। जहां भारत ने अपनी ताकत और सामर्थ्य शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, इंफ्रस्ट्रक्चर का निर्माण और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों को विकसित करने में लगाया वहीं पाकिस्तान ने अपनी ताकत और संसाधनों का इस्तेमाल जम्मू कश्मीर में अशांति फैलाने, गिलगित बाल्टिस्तान पर बलात कब्जा करने और हिज्बुल मुजाहिदीन , लस्कर ए तय्यबा , हक्कानी नेटवर्क, जमात उल दावा  तथा तालिबान जैसे आतंकी संगठनों को खड़ा करने में लगाया। भौगोलिक दृष्टि से दक्षिण एशिया के यह दोनों देशों का आपसी टकराव आज़ादी के समय से शुरु होता है।

अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति के तुरंत पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर पर हमला कर दिया। कबिलाई लोगों का चोला पहने पाकिस्तानी सेना श्रीनगर तक पहुंच गई थी। कानूनी रूप  भारतीय सेना तब तक जम्मू कश्मीर में दाख़िल नहीं हो सकती थी जब तक महाराजा विलय पत्र पर हस्ताक्षर ना कर दे।  इससे पहले पाकिस्तान के ही द्वारा छद्म तरीके से फैलाई गई अशांति और नेहरू, माउंटबेटन तथा अब्दुल्लाह के षड्यंत्रों की वजह से महाराजा विलय पत्र के मसौदे पर हस्ताक्षर नहीं कर पाए थे। महाराजा ने  26 अक्टूबर 1947 के दिन रियासत का भारत में विलय कर दिया और उसी दिन भारतीय सेना ने अपनी कार्यवाही प्रारंभ की और पाकिस्तानी सेना को खदेड़ना शुरू कर दिया। दिन प्रतिदिन परास्त होती पाकिस्तानी सेना ने युद्ध विराम की मिन्नते करना शुरू कर दिया जिसे नेहरू ने स्वीकार कर लिए फलस्वरूप जम्मू कश्मीर का बहुत बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में ही रह गया। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर में मीरपुर , मुज्जफराबाद, शक्षगम घाटी,  गिलगित और बाल्टिस्तान वाला क्षेत्र आता है। पाकिस्तान के कब्जे वाला क्षेत्र जिसे हम पाक अधिक्रांत जम्मू कश्मीर के नाम से जानते है, सामरिक और भूराजनैतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। संपूर्ण जम्मू कश्मीर का फैलाव 2,22,236 वर्ग किमी  है जिसमें पाकिस्तान के कब्जे में 78,114 वर्ग किमी तथा चीन के कब्जे में 37,555 वर्ग किमी है। 

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की महासभा के 72वें अधिवेशन  में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने हमेशा की तरह इस बार भी कश्मीर में  तथाकथित मानवाधिकार उल्लघंन का राग अलापा परन्तु वह यह भूल गए कि संचार के इस आधुनिक युग में पाकिस्तानी सेना और आईएसआई  के  द्वारा पाक अधिक्रांत जम्मू कश्मीर में फैलाई जा रही अशांति और हिंसा के बहुत सारे प्रमाण मौजूद है।पाक अधिक्रान्त जम्मू कश्मीर में इस क्षेत्र के लोगों के साथ  पाकिस्तान द्वारा हो रही क्रूरता, अमानवीय व्यवहार और  विकास कार्यों में हो रहे भेदभाव के खिलाफ आवाज़े उठती रही है। किन्तु कुछ सालों में विरोध प्रदर्शन काफी बढ़ें है। जिसकी तात्कालिक वजह उपर्युक्त कारण  हो सकते है परन्तु दूसरी वजह भारत के राज्य में चलाये जा रहे  नीतिगत विकास कार्यो का प्रभाव भी हो सकता है।  ये तो स्वाभाविक भी है की  जब पाक अधिक्रान्त जम्मू कश्मीर के लोग भारत के इस तरफ के विकास और  तरक्की  तुलना करते है तो उनका दर्द निकलकर  खुद बाहर आ ही जाता है ।  हाल ही में  विकास से अछूते और पाकिस्तानी सरकार द्वारा प्रायोजित हिंसा की दोहरी मार के शिकार हो रहे पाक अधिक्रांत जम्मू कश्मीर के नागरिकों का एक वीडियो सामने आया है जिसमें  तरफ पाक अधिक्रान्त जम्मू कश्मीर में लोग अपनी समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे दूसरी तरफ भारत सरकार  द्वारा राज्य के विकास कार्यों को दिखाया गया। (https://www.youtube.com/watch?v=9wvUV1gluko&feature=youtu.be)

 

पाक अधिक्रान्त जम्मू कश्मीर के मुज्जफराबाद के पास स्थित चिनारी  में हो रहे इस विरोध प्रदर्शन में वहां के स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर  आक्रोश था की इतने सालो में पाकिस्तान की हुकूमत ने यहां एक भी अस्पताल तक नहीं खोला। 2005 से पहले तक यहां 10 बेड वाला एकलौता अस्पताल था परन्तु 2005 में आये भूकंप में वह भी नहीं रहा।  3 लाख की आबादी वाले चिनारी जिले में  लड़कियों के लिए सिर्फ एक स्कूल है वह भी सिर्फ हाई स्कूल तक। लड़को को भी 12वीं के बाद बाहर जाना पड़ता है।  इतना ही नहीं अभी तक यहां पानी की निकासी के लिए सीवर लाइन तक नहीं डाली गयी। सड़के भी बेहद खस्ताहाल में हैं जबकि चिनारी श्रीनगर और इस्लामाबाद को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। इनलोगो का विरोध प्रदर्शन सिर्फ विकास आधारित मुद्दे पर ही नहीं है। ये लोग पाकिस्तान से अपनी आज़ादी को लेकर भी समय-2 पर विरोध करते आये हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पाकिस्तान ने उस भूभाग पर कब्ज़ा तो कर लिया परन्तु वहां के लोगो को अपना स्वीकार नहीं किया। उनके साथ हमेसा दोयम दर्जे के नागरिकों जैसा व्यव्हार ही किया है। इसलिए पाकिस्तानी हुकूमत जान  बूझकर पुरे पाक अधिक्रान्त जम्मू कश्मीर वाले क्षेत्र को विकास से वंचित रखा है। पाकिस्तानी अत्याचार और कुशासन से त्रस्त स्थानीय निवासी अपनी आज़ादी के लिए पिछले 70 सालों से आंदोलनरत है परन्तु पाकिस्तानी सरकार सेना के सहयोग से उनके आंदोलनों को दबाती आयी है। हाल ही में पाक अधिक्रान्त पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और गिलगिल बाल्टिस्तान के मुख्यमंत्री द्वारा संयुक्त प्रेस वार्ता में आज़ादी की मांग उठाये जाने के बाद आंदोलन को काफी बल मिला।

वहीँ दूसरी तरफ भारत के अधिकार क्षेत्र वाले जम्मू कश्मीर पर अगर नज़र डालें तो पाएंगे की आज जम्मू कश्मीर विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह से जुड़ चूका है। भारत सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए राज्य में  हजारों करोड़ का निवेश किया है।   राज्य में तकनीकी शिक्षा के लिए  आईआईटी और एनआईटी जैसे इंस्टिट्यूट है तो प्रबंधन की पढाई के लिए  आईआईम भी। दूसरी तरफ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए  एम्स जैसे विश्व स्तरीय संस्थान भी उपलब्ध है। सामान्य शिक्षा के लिए  3 केंद्रीय विश्वविद्यालय व् 9 अन्य विश्वविद्यालय वाला जम्मू कश्मीर शिक्षा के क्षेत्र में भी अग्रणी है। ढांचागत विकास में भी जम्मू कश्मीर पाक अधिक्रान्त जम्मू कश्मीर से मीलों आगे है। फोर लेन सड़कें , टनल, रेलवे पटरियां, बिजली जैसे कार्यों के लिए भारत सरकार हमेशा से प्रयासरत रही है जिसका परिणाम यह है की राज्य के अधिकतम हिस्से राजमार्गो से जुड़ चुके है या जुड़ रहे है। विश्व के सबसे दुरूह रास्तो में से एक जम्मू श्रीनगर राजमार्ग फोरलेन का निर्माण इंजीनियरिंग की अद्भुत मिशाल मानी  जाती है। सर्दिओं में बर्फ से ढके इस राजमार्ग की कुल लम्बाई 300 किमी जिसे ६ चरणों में पूरा किया गया है। इसे बनाने में सैकड़ो छोटे बड़े पुलों और टनलों का निर्माण भी किया गया। जिसमे 9 किमी की भी एक हाईवे टनल भी बनायीं गयी है।

  
 पिछले सत्तर सालों में इन बेचारे नागरिकों के पास ना पढ़ाई के लिए स्कूल है और  ही इलाज के लिए अस्पताल। दूसरी तरफ भारत वाले जम्मू कश्मीर के लोग तरक्की और खुशहाली की राह पर हैं। विडम्बना यह है कि मानवाधिकार संगठनों और मीडिया भी स्थानीय लोगों पर हो रहे अत्याचारों पर कुछ नहीं बोलती। ये लोग भारत के नागरिक है परन्तु दुर्भाग्यवश पाकिस्तानी हुकूमत के अत्याचारों , कुटिल षड्यंत्रों और दमनकारी नीतियों को सहने को विवश है। भारत की संसद ने 1994 में एक प्रस्ताव पारित करके यहां के नागरिकों को भारतीय नागरिक घोषित किया था परन्तु सिर्फ इतने से ही काम नहीं चलने वाला। विश्व में मौजूद हर एक  मंच पर अपने नागरिकों के हक के लिए  आवाज़ उठानी चाहिए और  ये भारतीय नागरिक अपने पुराने भारतीय समुदाय के साथ एकीकृत हो सके ऐसा प्रयास भारत सरकार को करना चाहिए।

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