सर्जिकल स्ट्राइक को हुए एक साल, जाने क्या और कैसे हुआ

30 Sep 2017 16:30:42

 


 


शुभम उपाध्याय
 
सितंबर माह का यह आखिरी हफ्ता भारतीय सेना के लिए किसी गौरव से कम नहीं है। पिछले वर्ष 28-29 सितम्बर की रात में भारतीय सेना ने आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू कश्मीर क्षेत्र (पीओजेके) घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक किया था। पाकिस्तान जिस तरह लगातार आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा था, कश्मीर के क्षेत्र में अस्थिरता का महौल पैदा कर रहा था उसकी वजह से यह सर्जिकल स्ट्राइक वाकई में आवश्यक था। भारतीय सेना दुनिया की सबसे बेहतरीन सेना में से एक है इसका परिचय उन्होंने उस दिन अच्छे से दे दिया था। और आज उसी सर्जिकल स्ट्राइक का परिणाम है कि पाकिस्तान और उसके सानिध्य में रहने वाले आतंकियों में भय का माहौल है। 
 
उड़ी में हुआ आतंकी हमला था तात्कालिक कारण :
 
सर्जिकल स्ट्राइक होने की तात्कालिक रूप रेखा 18 सितंबर 2016 को जम्मू कश्मीर के उड़ी क्षेत्र में हुए आतंकी हमले के बाद तैयार की गई थी। पिछले 20 वर्षों में यह सेना पर सबसे बड़ा हमला था जिसमें 18 जवान शहीद हुए थे। सेना के जवानों के सोते समय ताबड़तोड़ फायरिंग कर सुनियोजित तरीके से सीमा पार बैठे आतंकियों ने सेना के कैंप पर फिदायीन हमला किया था। मुख्यालय के मेडिकल यूनिट में घुसकर आतंक मचाने और ऑफिसर मेस में घुसकर खुद को उड़ाने के इरादे से आये इन आतंकी के मंसूबे को पैरा स्पेशल कमांडों द्वारा नाकाम कर दिया गया था। इसी घटना के 10 दिन बाद भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक कर पूरी दुनिया के सामने यह सन्देश दे दिया था कि अब वह अपने हितों की रक्षा के लिए बड़े स्तर पर कदम उठा सकता है। वहीं सर्जिकल स्ट्राइक के बाद सेना का बयान था क़ि "हमने पाकिस्तान में नहीं अपने क्षेत्र में जाकर सर्जिकल स्ट्राइक किया है, वह क्षेत्र पाकिस्तान के कब्जे में है लेकिन हमारा ही है।' यह बयान भी बताता है कि भारतीय सेना पीओजेके को भारत में शामिल करने के लिए कितनी प्रतिबद्ध है।
 

 
कैसे हुई थी सर्जिकल स्ट्राइक :
 
भारतीय सेना के घातक प्लाटून ने मध्य रात्रि में पाक अधिक्रांत जम्मू कश्मीर क्षेत्र में जाकर लगभग 5 घंटे में सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था। इस सर्जिकल स्ट्राइक में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के शरण में पनपने वाले आतंकियों के 4 लॉन्च पैड्स को उड़ाया था और 40 के करीब आतंकियों को ढेर किया था। सबसे खास बात यह थी कि इस सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान भारतीय सेना का कोई भी जवान ना शहीद हुआ था ना ही घायल हुआ था।
 
 
50 गज से हुई थी फायरिंग की शुरआत : 
 
सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान जब भारतीय सेना के कमांडों आतंकियों के लॉन्च पेड के करीब पहुँच चुके थे तो उन्होंने लगभग 50 गज की दूरी से पहली गोली चलाई थी। इसके बाद आगे बढ़ते हुए लगातार भारतीय सेना ने गोलियों की बौछार करते हुए आतंकियों के ठिकानों को पूरी तरह ध्वस्त कर आतंकियों को मार गिराया।


 
सर्जिकल स्ट्राइक तो हो गई, लेकिन वापस आना मुश्किल था :
 
सर्जिकल स्ट्राइक पर लिखी गई पुस्तक 'इंडियाज़ मोस्ट फ़ियरलेस - ट्रू स्टोरीज़ ऑफ़ मॉडर्न मिलिट्री हीरोज़' के लेखक राहुल सिंह और शिव अरूर ने बहुत से जनरलों और स्पेशल फ़ोर्स के अधिकारीयों से बातचीत के बाद पुस्तक में लिखा है कि सीमा पार आतंकियों के ठिकानों को ध्वस्त करने की ज़िम्मेदारी एलीट पैरा एसएफ के टूआईसी मेजर माइक टैंगो (सुरक्षा कारणों से असली नाम नहीं बताया जा सकता, यह सांकेतिक नाम है) को दी गई थी। माइक टैंगो ने बताया था कि इस अभियान में सर्वश्रेष्ठ जवान थे लेकिन हताहत होने की 99.99% संभावना थी, जिसके लिए मानसिक रूप से सभी सैनिक तैयार भी थे। आतंकियों पर हमला होने के कारण पाकिस्तानी सैनिकों को इसकी जानकारी मिल चुकी थी जिसकी वजह से भारतीय सेना के जवानों को वापस आने में ही सबसे ज्यादा मुश्किलें आई। कमांडों की टीम ने सुबह 4:30 बजे भारतीय क्षेत्र में कदम रखा जिसके बाद भारतीय सेना ने उनको पूरी तरह कवर फायर देना शुरू किया, और इस तरह भारत के कमांडों पूरी तरह से सर्जिकल स्ट्राइक करने में सफल रहे।
 
 
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान :
 
भारतीय सेना प्रमुख विपिन रावत ने हाल ही में बयान दिया कि 'सर्जिकल स्ट्राइक बड़े स्तर पर कामयाब रहा था और इसका कड़ा संदेश पाकिस्तान को गया था। यदि आवश्यकता पड़ी तो दोबारा ऐसा ही कुछ करने के लिए हम सक्षम हैं।' पाकिस्तान सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से लगातार छटपटाहट में है और उसने इस बीच कई बार सीजफायर और छोटे आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश की है लेकिन भारतीय सेना ने हर बार पाक के नापाक मंसूबों पर पानी फेरा है।
 
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद विश्व पटल पर भारत :
 
वहीं पूर्व सेनाध्यक्ष दलबीर सिंह सुहाग का कहना है कि "सर्जिकल स्ट्राइक राष्ट्रीय गौरव की घटना रही है, इसके बाद से ही राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर देश की प्रतिष्ठा कई गुना बढ़ गई है। सर्जिकल स्ट्राइक सफल रहा था और इसकी मंजूरी देना प्रधानमंत्री का काफी कद्दावर निर्णय था।" 
 
 
सर्जिकल स्ट्राइक में भारत की विदेश नीति :
 
भारत के सर्जिकल स्ट्राइक करने की खबर जैसे ही मिलिट्री ऑपरेशन के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल रणवीर सिंह ने मीडिया के सामने रखी उसके बाद दिल्ली से लेकर वाशिंगटन और इस्लामाबाद से लेकर मॉस्को, बीजिंग और लंदन तक दुनिया जैसे आवक रह गई। लेकिन भारत के द्वारा पाकिस्तान पर अपनाए गए इस कड़े रुख के बाद भी दुनिया के किसी भी देश ने पाकिस्तान की ओर से भारत की आलोचना नहीं की। ना ही किसी देश ने पाकिस्तान का सीधा या परोक्ष रूप से समर्थन किया। भारत की विदेश में बढ़ती धाक और सफल विदेश नीति ने भी सर्जिकल स्ट्राइक में अहम योगदान दिया था।
 
 
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद आतंरिक बदलाव :
 
भारतीय सेना द्वारा किये गए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद सेना का मनोबल बढ़ा हुआ है। आतंकवाद के मुद्दे पर जम्मू कश्मीर से लेकर म्यांमार सीमा क्षेत्र तक भारतीय सेना फ्रंट फूट पर है। जम्मू कश्मीर क्षेत्र में भी आतंकियों के लगातार सफाए की खबर आती जा रही है जिससे आतंकियों की कमर पूरी तरह टूट चुकी है। मीडिया में आई एक रिपोर्ट के अनुसार जम्मू कश्मीर क्षेत्र में आतंकी संगठनों में नए लोगो के भर्ती में बड़े स्तर पर गिरावट आई है। लश्कर, अलकायदा और हिजबुल जैसे आतंकी संगठनों के मुख्य आतंकियों को सेना द्वारा लगातार मार गिराया जा रहा है। एक आँकड़ें के हिसाब से 2016-17 में ही जम्मू कश्मीर में 242 आतंकियों को सेना ने मार गिराया है।

JKN Twitter