ब्रिक्स में पाकिस्तानी आतंकी संगठनो के खिलाफ प्रस्ताव पास।

05 Sep 2017 15:06:15


Neeraj Mishra

चीन की शियामेन  में जारी ब्रिक्स सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी शिरकत कर रहे हैं।  इस दौरान प्रधानमंत्री ने भारत का पक्ष उठाते हुए आतंकवाद और साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण और अहम मुद्दे उठाए।  आतंकवाद के मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा की इस मुद्दे पर ब्रिक्स देशों को एक साथ आना होगा क्यूंकि आतंकवाद सिर्फ भारत का नहीं बल्कि एक वैश्विक समस्या बन चूका है। पाकिस्तान द्वारा पोषित आतंकवादी जम्मू कश्मीर के साथ देश के अन्य हिस्सों में भी आतंकी घटनाओं को अंजाम देते आए हैं।  पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद,  हिजबुल मुजाहिद्दीन और जमात-उल-दावा जैसे आतंकी संगठन घाटी के अमन चैन को बर्बाद करने में प्रमुख है। गौरतलब है  भारत ने इन आतंकी संगठनों और उनके आकाओं पर नकेल कसने के लिए संयुक्त राष्ट्र और दूसरे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दबाव डाला है परंतु चीन हर बार अपने वीटो पावर का इस्तेमाल करते हुए अड़ंगा लगा देता है।

ब्रिक्स सम्मेलन के संयुक्त घोषणापत्र में लश्कर-ए-तैयबा जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों का नाम आना भारत की बड़ी जीत है इससे चीन के लिए इन  आतंकी संगठनो के प्रति हमदर्दी निभाना आसान नहीं रह जायेगा।  इससे पहले चीन पाकिस्तान से अपनी दोस्ती निभाने के लिए  कई बार जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र में प्रतिबंध लगाने की दिशा में रोक लगा चुका है।  मसूद अजहर पठानकोट समेत  कश्मीर में हुए कई बड़े आतंकी हमलों का जिम्मेदार माना जाता है।  इस संयुक्त घोषणापत्र में पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के खिलाफ पास हुए  प्रस्ताव से एक बार फिर कश्मीर में उनके कुचक्रों का पर्दाफाश हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस घोषणापत्र का दूरगामी परिणाम होगा और इन आतंकी संगठनों पर नकेल कसने की दिशा में भी प्रयास होगा। 

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