Article 35A: A Legal Perspective by Sr. Advocate, Jagdeep Dhankar

11 Jan 2018 18:27:48

 

 


 

 

[This is a transcription of an Oral Speech given by Sr. Advocate, Jagdeep Dhankar (Former Cabinet Minister) at release of a Documentary #Article 35A @ Nehru Memorial Museum and Library, Teen Murti, New Delhi on 2nd Sep, 2017]

 

आदरणीय जगमोहन जी के दाहिनी ओर बैठकर जितना सुकून मिला उतना ही खतरा आपके बाद बोलने का कर रहा हूं। The first one was the situation of totally comfort and the second one is not. मैं कामाख्या जी को बधाई देना चाहूंगा उन्होंने बहुत मुश्किल काम किया है। इस प्रकार की डॉक्यूमेंट्री करने का कोई Incentive नहीं होता है। इतनी परेशानी के काम को उन्होंने इतने बखूबी तरीके से किया है कि मुझे नहीं लगता कि अब इस विषय पर ज्यादा बोलने की आवश्यकता है कि Article 35A के क्या दुष्परिणाम हैं। लोगों को कितनी परेशानियाँ हो रही हैं, वह कितनी दिक्कत महसूस कर रहे हैं, उनके मानवीय अधिकारों का कितना घोर उल्लंघन है, ऐसी परिस्थिति में मैं कुछ मुद्दों पर अपने आप को ‘Confine’ करूँगा।

 

जम्मू एंड कश्मीर स्टडी सेंटर इस विषय में बहुत जबरदस्त काम कर रहा है। मैं इस संस्था को बहुत ही authentic Think tank मानता हूँ और Fact-tank मानता हूँ। क्योंकि दोनों में इन्होंने बहुत जबरदस्त काम किया है। कुछ साल पहले मेरी जम्मू कश्मीर स्टडी सेंटर में माननीय अरुण कुमार जी से मुलाकात हुई, आशुतोष जी भी थे और पूछा Article 35A के बारे में आपको क्या कहना है ? शायद उन्होंने इसलिए पूछा होगा कि मैं सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता हूं। मैंने उन्हें तुरंत कहा there is no Article 35A in the Indian Constitution." बहुत अनुभवी व्यक्ति हैं उन्होंने सोचा इस विषय पर ज्यादा चर्चा की आवश्यकता नहीं है  "Let him go and Study”, I came back home. You will not find article 35A in the text of Indian Constitution. Our students are not aware of it. May be our professors are not aware of it and that applies to our legislators also. पर जब आकर मैंने देखा तो मैं दंग रह गया, there is an Article 35A and it occupies enough space.  जब इस Article को मैंने पढ़ा तो मैंने सोचा कि जिन लोगों ने Article 35A को भारत के संविधान में स्थापित किया है, I don't want to go into the background, अनुच्छेद 35A कहां है ? Article 35A, Part-III of the Indian Constitution में है, that part consist itself as fundamental rights. और यह कहता क्या है ? Article 35A कहता है कि उन सब कानूनों को कवच दिया जाएगा जो जम्मू कश्मीर में हैं, उन कानूनों को भी कवच दिया जाएगा जो बाद में जम्मू एंड कश्मीर में आ सकते हैं, अगर वह पार्ट-3 का violation करते हैं तो। Fundamental Rights चैप्टर के अंदर एक ऐसा Article स्थापित कर दिया गया जो जम्मू कश्मीर की legislature को छूट देता है कि आप बेहिचक Fundamental Righs को violate करने वाला कानून बना सकते हो। उसको चुनौती नहीं दी जा सकती। This is most unfortunate. The leadership point at that time is miserably failed. ऐसा दुनिया में कहीं नहीं होता है क्योंकि बहुत कुछ दिखाया जा रहा है। मैं सीमित करूंगा अपने आप को।  जम्मू कश्मीर में कुछ लोग हैं, संख्या हजारों में है, वो आज के दिन लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं, वो लोकसभा का चुनाव जीत सकते हैं, वो भारत की संसद में बैठ सकते हैं, और theoretically उनमें से कोई प्रधानमंत्री भी हो सकता है, केंद्र में मंत्री हो सकता है, यह स्थिति है, पर यह लोग लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं, MP बन सकते हैं, मंत्री बन सकते हैं, प्रधानमंत्री बनने की योग्यता रखते हैं, उनको पंचायत में वोट देने का अधिकार नहीं है ! उनको विधानसभा में वोट देने का अधिकार नहीं है, मुझे बताइए दुनिया के कौन से कोने में इस बात को countenance किया जा सकता है। जम्मू एंड कश्मीर स्टडी सेंटर से जुड़ा हुआ एक विद्यार्थी UK पढ़ने गया उसने कहा उसके पास चिट्ठी आई है वहाँ के इलेक्शन डिपार्टमेंट की। कि आप यहां कुछ समय हो would you like to be a voter ? और यहां generation after generation क्या ? Are we a democratic nation ? मैं आपका समय नहीं लेना चाहता, but Article 35A outrages every word of Indian Constitution and preamble. Indian Constitution की Preamble में जो कुछ भी लिखा हुआ है उसको ताक पर रख दिया गया है। अब मुझे constitutional aspect पर कुछ कहना है। वैसे तो मैंने जगमोहन जी की किताब पढ़ी है और मैं आपका बहुत बड़ा admirer हूँ। आपने यह सब कुछ देखा है। आपने इसको mitigate करने की कोशिश की है। और मुझे नहीं लगता कि जो जीवित लोग हैं उनमें इस विषय पर आपसे ज्यादा बोलने का कोई अधिकार रखता है So i will confine to absolute aspect. Indian Constitution History में एक turning point आया, Major milestone आया, and that was Kesavanand Bharti case. 13 judges of Indian supreme court, by a sharp decision of 7-6, उन्होंने decide किया कि Parliament को Constitution amend करने का अधिकार है पर Parliament Fundamental features of Constitution को amend नहीं कर सकता। Basic structure touch नहीं कर सकती और इसमें कोई दो राय नहीं है कि Indian Constitution का Preamble और Fundamental Rights से बेसिक तो कुछ हो ही नहीं सकता। जब 1973 के अंदर यह निर्णय आ गया Parliament by its amending power can't tinker with basic structure of Indian Constitution. मैं अपने आप से प्रश्न पूछता हूँ, क्या Article 370 में, मैं इस मुद्दे पर नहीं जाता कि Article 370 सही है या ग़लत है, Indian Constitution में एक ही Article है जिसको temporary कहा गया है, पर उसके बारे में कंफ्यूजन है, कभी कोई Special कह देता है, कभी कुछ। But it's temporary, and its labelled as temporary. मैं नहीं जानना चाहता कि can this be done under article 370 or not. I raise a larger issue. Is President under Article 370 can do something which Indian Parliament cannot do ? यदि पूरी Parliament एकमत से आज बैठकर यह काम नहीं कर सकती how can the president do it ? और यह हमारे लिए बहुत खतरनाक मामला है कि इतना भयानक scene हमारे देश के एक कोने में है और वह व्यक्ति इसलिए इसको suffer करते हैं क्योंकि वहाँ रहते हैं, वह देश के किसी और कोने में रहते तो उन्हें यह समस्या नहीं आती। So Article 35A does not deserve to be on the statute book. अब क्या है कि न्यायपालिका को भी assertively कुछ ना कुछ कहना पड़ता है, आज से 30 साल पहले और मैं आपको थोड़ा सा पढ़कर बताऊंगा जब यह मुद्दा आया तो सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा, the petitioners उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सामने Article 32 का petition किया था। The petitioners have a justifiable grievance. यह सुप्रीम कोर्ट कह रहा है ‘justifiable grievance.’ “They constitute nearly seven to eight per cent of the population of the State. Surely, they are entitled to expect to be protected by the State. The Union of India, in the peculiar context of the State also owes an obligation to make some provision for the advancement of cultural, economic and educational rights of these persons.

We do hope that the claims of persons like the petitioner and others to exercise greater rights of citizenship will receive due consideration from the Union of India and the State of Jammu & Kashmir. We are, however, unable to give any relief to the petitioners.”

 अब यह जो लास्ट लाइन है ना “We are unable to give” इस पर मुझे एक बात ध्यान में आ गई US के अंदर, there used to be a great judge Justice Scalia, he died in 2016. He was a judge for very long tenure. Justice Scalia ने कहा कि अमेरिकन Supreme Court का जो judicial right का जो sweep है उसको यूरोपियन courts envy करती हैं। मतलब अमेरिकन सुप्रीम कोर्ट के पास judicial review का बहुत Power है। एक बहस के दौरान मैंने सुप्रीम कोर्ट के 9 judge बेंच को कहा Scalia was wrong ? जो पावर आपके पास है उतना तो दुनिया में किसी के पास नहीं है how can that Supreme Court say, we are unable to give any relief to the petitioners ? I'm sure जो 2-3 petitions pending हैं, they are bound to go to the constitution bench by virtue of Constitutional Provisions. The constitutional issues addressed to be very effectively and I think we'll see some change. Second aspect, Indian Constitution को अगर आप ध्यान से देखेंगे तो Indian Constitution किसी के अधिकारों पर कुठाराघात नहीं करता है। सबको right of equality है, equal opportunity है, कोई discrimination नहीं है, कुछ लोगों की मदद करता है अब SC/ST के बारे में affirmative action कर दीजिए, provide करता है। आप women के बारे में कर दीजिए, other backward classes के बारे में कर दीजिए, it provides. But it does not operate negatively. Article 35A ने उसको बिल्कुल उल्टा किया है। Injustice to whom? Women, आपने देखा property का, injustice to whom? Valmikis, the affirmative action concept which is inbuilt in the Indian Constitution is being operated in the reverse. मैं मानकर चलता हूँ कि “Time for big change has come.” I was ignorant about Article 35A and I don't regard myself as a person who doesn't study. But it was never there in my constitution book. आज भी Universities में नहीं है। Therefore while expressing my gratitude to Jammu and Kashmir Study Centre, मैं यहाँ हर व्यक्ति से एक अनुरोध करुंगा that the finest brain available in the country, Jagmohan ji has very passionately given us a core, let us take it forward. There are legal professionals here, उन लोगों के सामने बोलना बड़ा मुश्किल है जिनको आप जानते हो कि वो बहुत योग्य हैं, हमारे सुप्रीम कोर्ट BAR के दो former General Secretary है, ऐश्वर्या भाटी, अशोक अरोड़ा। बहुत distinguished lawyers आए है, I am naming only two for the purpose. यह बाद में आने वाले स्पीकर he is young brilliant journalist, मुझे बड़ा अजीब लगता है जब Article 370 के ऊपर Debate होती है, Article 35A पर Debate होती है, I think we need to tell our journalist friends with folded hands, Please it’s a very serious issue, you need to study it, you can't anchor it rudderless and that is something we should be doing. I will conclude by saying it’s a great privilege for me to be on the right side of Jagmohan ji.

 

It’s a matter of privilege, which I will ever cherish and I am sure each and every one present here is a piece of brilliant Human Resource. Please take this message forward on the Facebook, on the Twitter, use it massively and let us resolve it will not be on the statute book for long. Public opinion matters to everyone, every structured organ under the Indian Constitution.

 

 

 

 

 

 

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