पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू कश्मीर पर पाकिस्तानी दमनकारी नीतियों के खिलाफ कराची में गूंजी आवाज 

11 Jan 2018 17:23:34


 

आशुतोष मिश्रा

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू कश्मीर में पाकिस्तानी प्रशासन के खिलाफ दिनों दिन लोगों का गुस्सा लागतार  बढता जा रहा है। ये वो हिस्सा है जो भारत का है और 1947 में पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया था।

अब एक बार फिर पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू कश्मीर (पीओजेके) की एक राजनीतिक कार्यकर्ता निश्र्रत कुरैशी ने पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू कश्मीर के राष्ट्रपति मसूद खान को झूठा कहा है। आगे बोलते हुए कहा की इस क्षेत्र के शीर्ष राजनेताओं ने दशकों से पाकिस्तान की अधीनता को स्वीकार किया है।

कराची में एक कार्यक्रम को संबोधित करते उन्होंने कहा कि, इस क्षेत्र को हाशिए पर रखने के लिए इस्लामाबाद ने  हमेशा से दमनकारी नीतियों को उपयोग में लाया है इतना ही नहीं तो उन्होंने कुछ स्थानीय अधिकारियों को अपने तरफ भी कर लिया है। ये सभी अधिकारी इस्लामाबाद के इशारे केवल कुछ राजनीतिक संरक्षण और पैसा हासिल करना चाहते हैं और इसीलिए वे वहां पर उनकी नीतियों पर काम कर रहे हैं।

नुसरत ने एक बार फिर से याद दिलाया की ये क्षेत्र हमेशा से ही पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला क्षेत्र है और  पाकिस्तान अपने फायदे के लिए इस पर अवैध कब्ज़ा बना कर रखा है। जो की पाकिस्तान की सतत राजनीतिक षड्यंत्र हिस्सा भी रहा है।

आज हमारे क्षेत्र जिस कश्मीर में हम रहते हैं उसको पाकिस्तान अपने नाम में 'आजाद कश्मीर' कहता है, जिसका मतलब ये 'आजाद' या मुक्त क्षेत्र है। लेकिन मैं यह बहुत निराशा से कह रहा हूं कि यह विशेष शब्द आजादी के बदले पाकिस्तान ने हमारे क्षेत्र को बदसूरत करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ा है। जिसे भी ये क्षेत्र 'आज़ाद' लगता है हो पाकिस्तान के संविधान का अधिनियम 74 देख कर आगे की बात किया करे। पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू कश्मीर जो भारत का हिस्सा है और पाकिस्तान उसे 'आज़ाद कश्मीर' कहता है, उसके  प्रधानमंत्री भी इस्लामाबाद द्वारा नियुक्त  अधिकारियों के अन्दर ही काम कर रहे होते हैं। हमारा सर्वोच्च न्यायालय उधार अधिकारी के अधीन है ।

 


 

आशुतोष मिश्रा

पाकिस्तान की राजनैतिक पार्टियों को उनके अवैध कब्जे वाले जम्मू कश्मीर में जगह देने के गिलगित-बाल्तिस्तान और मीरपुर मुजफ्फराबाद में विभाजित किया गया है। और ये केवल पाकिस्तान द्वारा इस क्षेत्र पर अपना अवैध  कब्जा जारी रखने के लिए एक जानबूझकर प्रयास है। इस क्षेत्र की जनसांख्यिकी को भी इस्लामाबाद ने आज बदल दिया है।

पाकिस्तान ने इस क्षेत्र के लोगों को सात दशकों से अधिक समय से गुमराह किया है। इस क्षेत्र में एक प्रधान मंत्री और राष्ट्रपति हैं, लेकिन वे केवल इस्लामाबाद की कटपुतली की तरह है, जो उनके खजाने को भरने में मदद कर रहे हैं। आज तक इस क्षेत्र के लोगों को मूल मौलिक अधिकारों से वंचित किया गया है और अगर वे मांग करते हैं तो  क्रूरता के साथ उनके आन्दोलन को दबा दिया जाता है।

JKN Twitter