भारत ही 'जम्मू कश्मीर' के लिए सब कुछ है

11 Jan 2018 16:21:20

 


आशुतोष मिश्रा

जम्मू कश्मीर के भारत में  विलय पर प्रश्नचिन्ह लगाने वालों को कड़ा संदेश देते हुए राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि राज्य अपनी तकदीर लिख चुका है। उन्होंने कहा कि अलगाववादी व मुख्यधारा वाली राजनीतिक पार्टियां समझ लें बीते समय में हमें जो भी मिला है वो भारत से ही मिला है और अब आने वाले समय में भी जम्मू कश्मीर को  भी मिलेगा वह भारत से ही मिलेगा। महबूबा ने कहा, 'हम जम्मू कश्मीर के संविधान को, मुल्क के संविधन को नहीं मानते तो किस को मानते हैं?

 

विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर हुई बहस का जवाब दे रही मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने आगे कहा कि जम्मू कश्मीर की विधानसभा आज देश भर में सबसे मजबूत विधानसभा है। आज पूर देश में वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) लागू हो गया लेकिन जम्मू कश्मीर राज्य में इसे विधानसभा में  अच्छी तरह से चर्चा करने के बाद ही इसे लागू किया। याद रहे की 9 जनवरी को ही जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री ने भारत और पाकिस्तान से बातचीत करने की अपील की थी, ताकि घाटी में खूनखराबे को रोका जा सके।  

 

आजादी के बाद जम्मू कश्मीर के लोगों ने देश का ताज बनने का फैसला किया था। जब राज्य का भारत में विलय हुआ तो लोगों के प्रतिनिधि के रूप में शेख अब्दुल्ला को महात्मा गांधी जी ने बुलाया था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रयासों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह जम्मू कश्मीर के लोगों की खातिर पाकिस्तान के दरवाजे तक गए थे। वाजपेयी किसी से डरते नहीं थे, उनका दिल राज्य के लिए धड़कता था। लेकिन उस समय शांति न चाहने वालों ने बाधा डालने की कोशिश की थी।

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कश्मीर मसले का समाधान करने की काबलियत रखते हैं। इसलिए ही उन्होंने दिनेश्वर शर्मा को कैबिनेट सेक्रेटरी का दर्जा देकर बातचीत की पहल की। उनकी नियुक्ति में स्पष्ट लिखा है कि राज्य से जुड़ा कोई भी व्यक्ति बातचीत के लिए आ सकता है। कोई बातचीत के लिए न आए तो क्या किया जा सकता है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि 120 करोड़ देशवासियों का जनादेश हासिल करने वाले कश्मीर के बिगड़े हालात में नागरिकों, सुरक्षाकर्मियों, लेफ्टिनेंट उमर फैयाज आदि की मौतों का हवाला देते हुए महबूबा ने कहा कि इंसानियत का तकाजा है कि राज्य में सब मिलजुलकर इस मसले का हल तलाशें। हम घोडे़ को पानी के पास ले जा सकते हैं, लेकिन उसे पानी पीने के लिए मजबूर नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम बातचीत के लिए तैयार हैं, सबको बातचीत के लिए आना चाहिए।

 इससे पहले विधानसभा में महबूबा मुफ्ती जब भाषण देने आई तो नेशनल कांफ्रेस और कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने उनके भाषण का बहिष्कार किया।

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