अस्थायी है भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370:- इन्द्रेश कुमार  

12 Jan 2018 12:27:51

 


 आशुतोष मिश्रा

जम्मू कश्मीर राज्य में लागू अनुच्छेद 370 का भारतीय संविधान में दर्जा "अस्थायी" है और ये अब भी अस्थाई है आगे कभी भी इसे हटाया जा सकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इंद्रेश कुमार ने कल गुरुवार जयपुर में कहा कि चीन और पाकिस्तान द्वारा भारतीय भूमि पर कब्ज़ा असंवैधानिक और अवैध है। पाकिस्तान और चीन  के अवैध कब्जे वाले जम्मू कश्मीर की सरकारे भी पूरी तरह से असंवैधानिक है।

 

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का जब भारत में विलय हुआ, तब वहां युद्ध चल रहा था। और आजादी के समय की व्यवस्था के अनुसार संविधान सभा बन नहीं सकती थी। 1951 में संविधान सभा का निर्वाचन हुआ और इस संविधान सभा ने 6 फरवरी 1954 को राज्य के भारत में विलय के आदेश को सत्यापित कर दिया था। जिसके बाद 14 मई 1954 को भारत के राष्ट्रपति ने संविधान के अस्थायी अनुच्छेद (धारा) 370 के अंतर्गत संविधान आदेश जारी किया और वहां कुछ अपवादों और सुधारों के साथ भारत का संविधान लागू हुआ।

 

इसके बाद यह धारा समाप्त कर जम्मू-कश्मीर में भी भारत का सामान्य संविधान लागू होना अपेक्षित था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि, धारा 370 के कुछ प्रावधान अन्य राज्यों के नागरिकों के मूलभूत अधिकारों का हनन करने वाले हैं। लेकिन फिर भी जम्मू-कश्मीर के राजनेताओं के लिए अत्यंत फायदेमंद है। अत: उनका धारा 370 कायम रखने का आग्रह है. लेकिन, धारा 370 के कारण, 1947 में पाकिस्तान से राज्य में आए हिंदू शरणार्थी तथा भारत के अन्य राज्यों से वहां जाकर वर्षों से रहने वाले लाखों नागरिक राजनीतिक, आर्थिक और शिक्षा से संबंधी अधिकारों से वंचित हैं. अनुसूचित जनजाति के नागरिकों को भी राजनीतिक आरक्षण नहीं मिलता। आज भी वहां भारतीय संविधान की 135 धाराएं लागू नहीं है।

 

भारत पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद और अलगाववाद से पीड़ित रहा है जबकि इसके कारण 1972 के बाद 66 हजार से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके थे।

 

लेकिन अब सरकार के प्रयासों के कारण जम्मू और कश्मीर में युवाओं को मुख्यधारा में लाने के प्रयासों से सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। और दूसरी तरफ अलगाववादी नेताओं की असलियत को समाज के सामने लाने के सरकार की नीतियों के कारण आतंकवादी गतिविधियों में कमी आई है।

 

80 के दशक के अंत में जम्मू-कश्मीर में शुरू हुआ हिंसाचार अब बहुत कम हुआ है. राज्य का कारगिल, लेह, लद्दाख, जम्मू यह बहुत बड़ा क्षेत्र (लगभग 85%) अलगाववाद से दूर और शांत है। श्रीनगर और घाटी के कुछ क्षेत्र में अलगाववादी सक्रिय हैं। लेकिन उनकी गतिविधियों को मीडिया में अतिरंजित प्रसिद्धि मिलती है, इस कारण पूरे राज्य में अशांति है, ऐसा गलत चित्र निर्माण होता है, यह वास्तविकता के विपरीत है। इस लिए लोग जम्मू-कश्मीर की वास्तविक स्थिति को जानें और वहां संपूर्ण सामान्य स्थिति निर्माण करने में सहयोग दें।

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