जम्मू कश्मीर का विलय पूर्ण एवं अंतिम

13 Jan 2018 12:39:39

 

प्रश्नोत्तरी  भाग - 1

 


प्र० :  क्या जम्मू-कश्मीर की तथाकथित समस्या का हल असंभव है?

उ० :  जम्मू-कश्मीर के प्रश्न का समाधान असंभव नहीं है। यह बहुत पहले ही हल हो गयी होती यदि निहित स्वार्थों के वशीभूत हो कुछ भ्रम न फैलाये गये होते और उन्हें बनाये रखने के लिये कुछ मिथक न गढ़े गये होते। प्रमुख रूप से तीन मिथक हैं जिन्होंने समस्या को जटिल बनाया है। पहला, अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को एक विशेष दर्जा देता है। दूसरा, जम्मू-कश्मीर का विलय अपूर्ण, सशर्त अथवा विवादित है। तीसरा, कश्मीर पूरे जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व करता है और यह भारत से स्वतंत्र होना चाहता है।

 

प्र. : क्या इसका आशय है कि जम्मू-कश्मीर में ऐसे नागरिक भी हैं जो भारत में बने रहने के इच्छुक हैं ? यदि हैं, तो क्या उनकी उपस्थिति इतनी प्रभावी है जिसके आधार पर कहा जा सके कि जम्मू-कश्मीर भारत में रहना चाहता है ?

उ. : हाँ। इसका आशय यही है। दुनियां में कहीं भी लाखों लोगों को उनकी इच्छा के विरुद्ध बंधक बना कर नहीं रखा जा सकता। सेना के बल पर भी नहीं। भारत जैसी पंथनिरपेक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था में तो बिल्कुल भी नहीं। जम्मू-कश्मीर में आज भी, और सदैव उन लोगों का बहुमत रहा जो भारत में अपना भविष्य देखते हैं। इसीलिये जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय हुआ और इसीलिये वह आज भी भारत का अभिन्न अंग है।

भारत विभाजन के समय हुए घटनाक्रम को देखें तो हम पाते हैं कि जम्मू-कश्मीर में उस समय दो ही पक्ष प्रभावी थे, राज्य के महाराजा हरि सिंह और कश्मीर घाटी के जननेता शेख अब्दुल्ला। वैचारिक और राजनैतिक धरातल पर दोनों परस्पर विपरीत ध्रुव पर थे। दोनों के बीच सहमति का एकमात्र बिंदु था - भारत में विलय। महाराजा जहां भारत में विलय की पहल कर ही चुके थे वहीं शेख अब्दुल्ला ने भी सार्वजनिक रूप से जिन्ना के द्विराष्ट्रवाद के सिद्धांत का खंडन किया था।   

 

प्र. :  यदि ऐसा है तो जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय विवादित कैसे हो गया ?

उ. :  भारत में जम्मू-कश्मीर का विलय संपूर्ण और अंतिम है। तकनीकी और संवैधानिक दृष्टि से इस पर कोई विवाद नहीं है। विलय की निर्धारित प्रक्रिया को अन्य रियासतों की भांति ही जम्मू-कश्मीर के द्वारा भी पूरा किया गया और उसे तत्कालीन गवर्नर जनरल ने स्वीकार किया।

विलय को विवादित बताना तब शुरू हुआ जब शेख अब्दुल्ला अंग्रेज-अमेरिकी कूटनीति का शिकार होकर अपनी स्वतंत्र शेखशाही के सपने देखने लगे। यह सब विलय के समय नहीं बल्कि उसके अनेक वर्ष बाद प्रारंभ हुआ।

 

प्र०- फिर बार-बार जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह की बात क्यों उठती है ?

उ०  इसका एक कथित कारण यह है कि भारत में राज्य का विलय स्वीकार करने के बाद गवर्नर जनरल लार्ड माउंटबेटन के पत्र के माध्यम से और बाद में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर के नागरिकों की इच्छाओं का ध्यान रखने के लिए अपनी तरफ से प्रतिबद्धता प्रकट की थी। वास्तविकता यह है कि जनता की इच्छा जानने की यह प्रतिबद्धता कांग्रेस पार्टी की नीति के अनुसार 1947 में सभी अन्य रियासतों के समान ही थी और यह प्रतिबद्धता भारत द्वारा 1954 में ही पूरी कर दी गई है।

 

प्र० पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर हमेशा दावा करता है कि जम्मू-कश्मीर पर उसका हक है ?

उ०रू नहीं। पाकिस्तान ने यह दावा कभी नहीं किया है और न ही वह कर सकता है। जम्मू-कश्मीर राज्य का वैधानिक विलय भारत में उसी प्रक्रिया के तहत हुआ है जिसका पालन आजादी के समय सभी 600 रियासतों द्वारा भारत और पाकिस्तान में से किसी एक के साथ अपना विलय करने के लिए किया गया था।

 

प्र० क्या संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव द्वारा जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय को चुनौती नहीं दी गई ?

उ० कभी नहीं। इस विषय पर स्पष्टता के लिए सुरक्षा परिषद में तत्कालीन रक्षामंत्री वी. के. कृष्णा मेनन के ऐतिहासिक भाषण को अवश्य पढ़ें जो विषय के हर पहलू को स्पष्ट करता है। संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में यह सबसे लंबा भाषण है।

 

प्र० जम्मू-कश्मीर द्वारा भारत में शामिल होने की प्रक्रिया और अन्य राज्यों की विलय प्रक्रिया में क्या अंतर था ?

उ० कोई नहीं। जम्मू-कश्मीर राज्य द्वारा भी उन्हीं नियमों, विनियमों और कागजी कार्रवाई का पालन किया गया था जिनका अनुसरण मैसूर, ग्वालियर, पटियाला, कोचीन और अन्य सभी रियासतों द्वारा किया गया था। जब इन सभी राज्यों को भारत में कोई समस्या नहीं है  तो जम्मू-कश्मीर को कोई विशेष समस्या क्यों होनी चाहिए?

 

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