जम्मू कश्मीर के विलय की तुलना हैदराबाद व् जूनागढ़ से कर गढ़े गए मिथक

14 Jan 2018 11:37:41

प्रश्नोत्तरी  भाग – 3 

 


प्र० जम्मू-कश्मीर में मुद्दों की उत्पत्ति की बात करें तो क्या इसकी शुरुआत 1947 में भारत विभाजन के साथ हुई थी ?

उ० नहीं। विभाजन  तकनीकी रूप से केवल ब्रिटिश अधिराज्य; अर्थात भारतीय उपमहाद्वीप के 65 प्रतिशत क्षेत्रफल का हुआ था। ब्रिटिश शासन के अंतर्गत भारत की 75 प्रतिशत जनसंख्या 65 प्रतिशत भू-भाग पर रहती थी। यह हिस्सा ब्रिटिश अधिराज्य के रूप में जाना जाता था। शेष 35 प्रतिशत  रियासतों के रूप में जाना जाता था, जहां भारतीय शासकों का शासन था। मैसूर, कोचीन, पटियाला, सौराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, बड़ौदा, आदि इसके कुछ उदाहरण थे। रियासतों के रूप में इस 35 प्रतिशत भारत की अंग्रेजों के साथ संधियां थीं।

 

 

प्र० 1947 के भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम में ब्रिटिश भारत के कौन से प्रांतों को नए पाकिस्तान अधिराज्य के रूप में नामित किया गया था ?

उ० भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम की धारा-2 के अनुसार, पाकिस्तान के क्षेत्र में सिंध, पश्चिमी पंजाब, पूर्वी बंगाल, उत्तर पश्चिमी सीमांत प्रांत और असम का सिलहट जिला शामिल किए गये। शेष भारतीय अधिराज्य के रूप में जाना गया।

 

 

प्र० 1947 के दौरान भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम ब्रिटिश संसद में पारित होने के बाद इसे लागू करने की जिम्मदारी किसकी थी ?

उ० ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतिनिधि के रूप में लार्ड माउंटबेटन ने इसे लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। रियासतों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए माउंटबेटन ने कहा कि ब्रिटेन और रियासतों के बीच हुई सारी संधियां समाप्त हो जाएंगी। संधियों की समाप्ति एवं ब्रिटेन की परमोच्चता समाप्त होने पर तकनीकी रूप से वे स्वतंत्र है, लेकिन चूंकि भारत एक इकाई के रूप में भौगोलिक, आर्थिक और संचार की दृष्टि से एक दूसरे से जुड़ा हुआ है इसलिये दोनों अधिराज्यों में से एक का चयन उनके और उनके नागरिकों के हित में होगा।

माउंटबेटन के अनुसार दो बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए आप भारत या पाकिस्तान में अपने राज्य का विलय कर सकते हैं। पहला यह कि आप जिस भी अधिराज्य में मिलना चाहते है उससे आपके राज्य की भौगोलिक समीपता होनी चाहिए। दूसरा, शासक अपने नागरिकों की इच्छा ध्यान में रखें।

 

 

प्र० क्या हम हैदराबाद और जूनागढ़ के पाकिस्तान में शामिल होने की इच्छा की जम्मू-कश्मीर की भारत में शामिल होने की इच्छा के साथ तुलना कर सकते है ? दोनों के ही शासक अपने निजी विश्वास के आधार पर अपने राज्य का विलय करने के इच्छुक थे।

उ०रू  बिल्कुल नहीं। उस समय हैदराबाद और जूनागढ़ की पाकिस्तान की सीमा के साथ कोई समीपता नहीं थी जबकि विलय के लिये यह एक महत्वपूर्ण पक्ष था जिसकी ओर माउंटबेटन ने स्वयं शासकों का ध्यान आकृष्ट किया था।

दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर में केवल महाराजा ही नहीं अपितु उनके विरोधी शेख अब्दुल्ला भी भारत में विलय के पक्षधर थे। राज्य की जनता भी इसके समर्थन में थी और पाकिस्तान के आक्रमण के पश्चात तो जनता का यह मत और भी दृढ़ हो गया था। पाकिस्तानी सैनिकों और कबायलियों द्वारा किये गये भीषण नरसंहार और अमानवीय अत्याचारों के बाद यह कोई सोच भी नहीं सकता कि वे पाकिस्तान में विलय के इच्छुक भी हो सकते हैं।

 

 

प्र० सीमा की निरंतरता होने की वजह से जब हैदराबाद के निजाम पाकिस्तान में अपने राज्य का विलय नहीं कर सके तो उन्होंने क्या किया?

उ० उन्होनें अनेक देशों और संयुक्त राष्ट्र संघ के समक्ष आवेदन किया कि हैदराबाद को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्वीकृति प्रदान करें। लेकिन भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 में स्वतंत्रता का ऐसा कोई प्रावधान नहीं था। इसलिये ब्रिटेन ने भी निजाम के अनुरोध को नहीं माना।

 

 

प्र० क्या हैदराबाद या जूनागढ़ जैसा कोई उदाहरण पाकिस्तान में भी मिलता है।

उ० हां, कलात के नवाब ने, जो आज पाकिस्तान के बलूचिस्तान का बडा क्षेत्र है, 1947 में भारत से मिलने का प्रस्ताव रखा था किन्तु कलात के साथ भारत की सीमा की निरंतरता न होने के कारण भारत सरकार ने प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

फिर कलात के नवाब ने यह भी मामला उठाया कि पूर्वी पाकिस्तान एवं पश्चिमी पाकिस्तान में भी सीमा की निरंतरता नहीं है। उसी तरह बलूचिस्तान में कलात भी पश्चिमी हिन्दुस्तान हो सकता है। लेकिन भारत सरकार ने फिर यह कहकर इनकार कर दिया कि भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 पूर्वी व पश्चिमी पाकिस्तान को पाकिस्तान के प्रभुत्व के रूप में परिभाषित करता है। विलय के लिए सीमा की निरंतरता आवश्यक है, इसलिए कलात भारत में शामिल नहीं हो सकता।

 

 

प्र० भारत का विभाजन हिन्दू और मुस्लिम जनसंख्या के आधार पर होने सेक्या मुस्लिम बहुल जम्मू-काश्मीर पाकिस्तान में नहीं जाना चाहिए था?

उ० नहीं। क्योंकि जम्मू-काश्मीर ब्रिटिश भारत का हिस्सा नहीं था इसलिए अंग्रेजों ने यह कभी नहीं कहा कि यह पाकिस्तान के साथ जाना चाहिए। अन्य 500 से अधिक रियासतों की तरह निर्णय का अधिकार केवल जम्मू-काश्मीर के महाराजा के पास था। राज्य के अधिसंख्य निवासियों में भी उनके प्रति विरोध की कोई आवाज नहीं सुनाई दे रही थी। इसके अलावा, महाराजा के विलय के निर्णय का शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में कश्मीर घाटी के एकमात्र राजनीतिक दल ने भी समर्थन किया था।

 

 

प्र० जिस तरह जम्मू-कश्मीर मुस्लिमबहुल होते हुए भी भारत का अंग बना, क्या पाकिस्तान में भी कोई हिन्दू राज्य शामिल हुआ था ?

उ० हां। ऐसा भी हुआ था। उदाहरण के लिये भारत में जोधपुर और जैसलमेर से सटा एक राज्य अमरकोट आज पाकिस्तान के सिन्ध प्रान्त में है। 1947 में अमरकोट की 90 प्रतिशत जनसंख्या हिंदू थी। वहां के शासक राणा चन्द्र सिंह हिन्दू थे और राज्य भी हिन्दू बहुल था। फिर भी वहां के राजा ने अपने राज्य का विलय पाकिस्तान में करने का निश्चय किया।

यह वह स्थान है जहां शेरशाह सूरी के हाथों पराजित होकर भाग रहे मुगल सम्राट हुमायूं को अमरकोट के राजपूत शासक राणा प्रसाद ने शरण प्रदान की। यहीं पर 1542 में उसके पुत्र अकबर का जन्म भी हुआ।

 

 

प्र० फिर क्यों जिन्ना और पाकिस्तान के उत्तरवर्ती शासक कहते आए हैं कि मुस्लिम बहुल जम्मू-कश्मीर का पाकिस्तान में विलय होना चाहिए?

उ०रू यह तथ्यात्मक रूप से गलत है। अगर वह सही मायने में इस तरह मानते हैं,  तो उपरोक्त उदाहरण से अमरकोट राज्य भारत का अंग होना चाहिये था। उन्होंने पाकिस्तान में अमरकोट का विलय क्यों स्वीकार किया जबकि उसका शासक हिंदू था और वहां की 90 प्रतिशत जनसंख्या भी हिन्दू थी। साथ ही उस राज्य की सीमा की निरंतरता भारत के राजस्थान राज्य के साथ थी। न केवल पाकिस्तान ने शासक के व्यक्तिगत निर्णय होने के कारण अमरकोट का विलय स्वीकारा, साथ ही राज्य को एक नया इस्लामी नाम देने के लिए कुछ समय पश्चात इसका नाम उमरकोट रख दिया।

 

 

प्र० अमरकोट के विलय को पाकिस्तान किस तरह सही ठहराता है?

उ० भारत स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के अनुसार विलय के निर्णय का एकमात्र अधिकार राज्य के शासक को था जिसके साथ अंग्रेजों की 1947 तक संधि थी। शासक के इसी अधिकार के आधार पर पाकिस्तान उसके पाकिस्तान में विलय को न्यायोचित ठहराता है। संवैधानिक रूप से कोई भी शासक के इस निर्णय को चुनौती नहीं दे सकता था।

 

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