आतंकवाद नहीं रुकने तक जारी रहेगी भारत की कार्यवाही :- भारतीय सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत

15 Jan 2018 14:44:26


आशुतोष मिश्रा

भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने एक फिर से कश्मीर में शांति केवल राजनीतिक प्रयासों से नहीं आएगी इसके साथ ही साथ सेना को कई बार सैन्य अभियान भी चलाना पड़ेगा।  इन दोनों प्रकार के प्रयासों के साथ काम करने से ही हम कश्मीर में शांति ला सकते हैं। जम्मू कश्मीर में सीमा पार से चलाये जा रहे आतंकवाद को रोकने के लिए एक निर्णायक कार्यवाही पाकिस्तान के ऊपर करनी पड़ेगी। सेना और अन्य सुरक्षा बलों  सीमा पर कार्य अंजाम देते हुए कई बार नई  प्रकार की रणनीति को प्रयोग में लाना पड़ता है। क्योकि सीमा पर परिस्थिति हमेशा एक जैसी नहीं रह सकती है।

आज भी घाटी में कुछ युवा कट्टरपंथी लोगों के प्रभाव में आ कर आतंक की रह पर बढ़ रहे हैं। सेना अपनी पूरी ताकत  लगा कर ये प्रयास कर रही है की देश के युवा देश के विकास में अपनी भूमिका बनाये ना कि आतंकी संगठनों में शामिल हो। आतंकी संगठनों पर भी पूरी कार्यवाही की जा  रही है जिससे युवाओं को आतंकी बनने से रोका जा सके।

पिछले कई सालों की कश्मीर में स्थितियों में कई बदलाव आये हैं। आज घाटी पूरी तरह से हमारे कंट्रोल में है लेकिन इसको जारी रखने के लिए कई उपाय करने होगे क्योंकि सीमा पार से पाकिस्तान अभी भी  घुसपैठ कर रहा हैं।

जम्मू कश्मीर में आतंक के सफाए के लिए शुरू किए गए ऑपरेशन ऑलआउट में सेना का धयान दक्षिण कश्मीर पर था। लेकिन इस वर्ष सेना अपना ध्यान उत्तर कश्मीर में भी रहेगा।  ऑपरेशन ऑल आउट में सेना और सुरक्षा बलों ने 120 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया है। जिससे घाटी में घाटी में आतंकी घटनाओं में कमी आई हैं।

वर्ष 2017 में सुरक्षा बलों ने 220 आतंकी मार गिराये हैं। जिसमे से 72 आतंकवादी नियंत्रण सीमा रेखा पर तथा अन्य 148 आंतकवादियो को कश्मीर में किये गए अभियानों में मार गिराया हैं। जबकि 2017 में वायु सेना के 3 गरुड़ कमांडो समेत भारतीय सेना के कुल 61 जवान शहीद हुए। इनमें से 30 ने आतंकियों से लड़ते हुए शहादत हासिल की।

वही पत्रकार वार्ता में कश्मीर शिक्षा विभाग द्वारा पढ़ाये जा रहे दो नक्शों और एजुकेशन सिस्टम को सुधारने वाले बयान पर  जम्मू कश्मीर सरकार में एजुकेशन मिनिस्टर अल्ताफ अहमद बुखारी को आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत के बयानबाजी को गलत बताया है और आगे से ऐसा करने से बचने की सलाह भी दे डाली है। बुखारी ने कहा आर्मी चीफ एक सम्मानीय अफसर हैं। मेरा मानना है कि वे शिक्षाविद् नहीं इसलिए उन्हें शिक्षा पर उपदेश नहीं देना चाहिए। यह राज्य का मामला है। हमें पता है कि यह हमारे एजुकेशन सिस्टम को कैसे चलाना है।

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