जम्मू-कश्मीर के भू-भाग पर चीन का कब्जा

17 Jan 2018 23:58:00

प्रश्नोत्तरी भाग 7

 

 

 

प्रश्न: क्या यह सत्य है कि भारत की चीन के साथ एक परिभाषित सीमा रेखा नहीं है?

 

उत्तर: यह पूरी तरह गलत है। ऐतिहासिक रूप से 1947 तक भारत की उत्तर-पश्चिमी सीमा पर जम्मू-कश्मीर राज्य तथा तिब्बत और चीन के बीच कोई भी सीमा-विवाद नहीं था।

 

प्रश्न: क्या ब्रिटिश भी चुशूल की संधि का हिस्सा थे?

 

उत्तर: हां, 1846 में उस समय भारत पर शासन करने वाली ईस्ट इंडिया कंपनी भी 1842 की चुशूल संधि का हिस्सा बन गई। इस प्रकार जम्मू-कश्मीर, तिब्बत, चीन और ब्रिटेन इस संधि के विधिक पक्षकार थे। एक सामान्य दृष्टिकोण के लिए इन पक्षकारों के बीच दस्तावेजों का आदान-प्रदान भी हुआ।

 

 

प्रश्न: क्या अक्साई-चीन जिसे अब चीन अधिकृत जम्मू-कश्मीर कहा जाता है विधिक दृष्टि से भारत का हिस्सा है?

 

उत्तर: निश्चित रूप से, अक्साई-चीन जम्मू-कश्मीर का अभिन्न हिस्सा है जिसका विधिक तरीके से भारत में विलय हुआ है। 1947 तक जम्मू-कश्मीर के महाराज मानसर गांव से राजस्व एकत्रित करते रहे थे, जो कि दुर्गम अक्साई-चीन का एकमा़त्र गांव है। चीन ने भारत के राजस्व संग्रह पर कभी भी आपत्ति नहीं प्रकट की।

 

 

प्रश्न: क्या जम्मू-कश्मीर के पश्चिमी हिमालयी क्षे़त्र में भारत और चीन के बीच कभी विवाद रहा है?

 

उत्तर: कभी भी नहीं, 1842 में भारत, चीन और तिब्बत के बीच सीमाओं के निर्धारण के बाद इस तरह का विवाद कभी भी नहीं रहा। अरुणाचल के समीप के पूर्वी क्षेत्र में चीन जरूर विवाद की बात करता रहा जो मैकमोहन रेखा निर्धारित होने के बाद भी हल नहीं हुआ।

 

 

प्रश्न: फिर अक्साई-चीन अधिकृत जम्मू-काश्मीर कैसे बन गया?

 

उत्तर: जब चीन ने तिब्बत पर कब्जा किया तो भारत ने उसे चुपचाप स्वीकार कर लिया?  इसके बाद चीन को बुद्धिस्ट तिब्बत को अपने दक्षिणी-पश्चिमी जिनजियांग प्रांत से जोड़ने के लिए एक रणनीतिक सडक की आवश्यकता अनुभव हुई। जिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों की बहुलता है। वह आठ मार्गी राजपथ, जिसे पश्चिमी महामार्ग के नाम से जाना जाता है, अब अक्साई-चीन से होकर गुजरता है जो कि जम्मू-काश्मीर के लद्दाख क्षेत्र का एक हिस्सा है। 1950 के दशक में इस राजपथ को बनाने के लिये चीन ने अपने पश्चिमी महामार्ग हेतु अक्साई-चीन पर अपना दावा करना शुरु कर दिया।

 

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