जम्मू कश्मीर का गिलगित-बल्तिस्तान क्षेत्र

17 Jan 2018 23:43:03

प्रश्नोत्तरी भाग 6

 


 

 

प्रश्न: अब भूगोल की तरफ रुख करते हैं। कृपया शक्सगाम घाटी के बारे में बताएं?

 

उत्तर: यह जम्मू-कश्मीर का उत्तरी भाग है और सियाचिन ग्लैशियर से सटा हुआ है। यह विश्व की दूसरी सबसे उंची चोटी के-2 के सामने स्थित है। 1947 में गिलगित और बल्तिस्तान के साथ शक्सगाम घाटी पर भी पाकिस्तान ने गैर- कानूनी रूप से कब्जा जमा लिया। 1963 में अपने फायदे के लिए पाकिस्तान ने इसे उपहारस्वरुप चीन को दे दिया। शक्सगाम घाटी को चीन को देना पूरी तरह से गैर-कानूनी है।

 

 

प्रश्न: यदि यह भारत का भू-भाग है तो पाकिस्तान के साथ संधि के लिये चीन कैसे तैयार हो गया?

 

उत्तर: यह पाकिस्तान और चीन के बीच जम्मू-कश्मीर के एक हिस्से को लेकर हुई संधि थी, जोकि चीन के जिनजियांग प्रांत से सटा हुआ है, और वर्तमान में पाकिस्तान के नियंत्रण में है। यह पूरी संधि गैर-कानूनी है क्योंकि जम्मू-कश्मीर का संबंध न तो पाकिस्तान से है और न ही चीन से है। संधि में यह दावा भी नहीं किया गया है कि चीन को सौंपा गया क्षे़त्र पाकिस्तान का हिस्सा है। इससे इस संधि की अवैधानिक स्थिति का खुलासा होता है।

 

संधि की शब्दावली से भी यह स्पष्ट होता है। इसके अनुच्छेद 6 में उल्लेख है कि इस क्षेत्र पर अधिपत्य का विवाद हल होने की स्थिति में इस भू-भाग पर जिसकी संप्रभुता स्थापित होगी, चीन उससे वार्ता कर नई संधि करेगा। सीधा अर्थ है कि वह पाकिस्तान के नियंत्रण में होने के कारण उससे संधि तो कर रहा है किन्तु उस पर पाकिस्तान की संप्रभुता स्वीकार नहीं करता। 

 

 

प्रश्न: जम्मू-कश्मीर के गिलगित और बल्तिस्तान क्षे़त्र के बारे में बताएं?

 

उत्तर: भारत के लिए भू-रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र पर पाकिस्तान ने 1947 में अवैध रूप से कब्जा कर लिया। ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो मध्य एशिया से भारत पर होने वाले कई आक्रमण इसी मार्ग से हुए थे। भविष्य में भी इस दिशा से संभावित किसी आक्रमण को रोकने के लिए गिलगित, जोकि जम्मू-कश्मीर का एक भाग है, पर भारत का नियंत्रण आवश्यक है। परम्परागत रूप से हिंदूकुश पर्वत श्रृंखला हमारी सीमा रही है और उसे बनाये रखने में ही भारत की सुरक्षा निहित है।

 

 

प्रश्न: गिलगित और बल्तिस्तान रणनीतिक दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण क्यों हैं?

 

उत्तर: जम्मू-कश्मीर राज्य के इस उत्तरी क्षे़त्र की सीमाएं पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन के जिनजियांग और तिब्बत से सटी हुई हैं। ताजाकिस्तान की सीमा को भी यह लगभग स्पर्श करता है। इस क्षेत्र के जरिए भारत की सीमाएं व्यावहारिक रूप से तीन देशों की सीमाओं को स्पर्श करती हैं और ताजाकिस्तान, जो कि पहले सोवियत संघ का हिस्सा था, यहां से मात्र 25 किलोमीटर दूर है।

 

 

प्रश्नः क्या गिलगित और बल्तिस्तान का आर्थिक महत्व भी है?

 

उत्तर: यह क्षेत्र भारत को प्राचीन रेशम पथ से जोडने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। सैकडों, हजारों वर्षों तक, इस महत्वपूर्ण व्यापारिक पथ के कारण विश्व के कुल सकल घरेलू उत्पाद में भारत की हिस्सेदारी निरंतर 25 से 30 प्रतिशत तक बनी रही। उस समय भारत विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति हुआ करता था। यह क्षेत्र पश्चिमी एशिया, केंद्रीय एशिया, भारत, चीन, दक्षिण पूर्व एशिया और पूर्व एशिया का सम्मिलन स्थल है। सडक मार्ग से गिलगित से इरान की दूरी लगभग 1 हजार किलोमीटर है। यह दूरी गिलगित से दिल्ली की दूरी के लगभग बराबर है। गिलगित से मास्को की दूरी लगभग 3500 किलोमीटर है जो कि सड़क मार्ग से गिलगित से चेन्नई की दूरी से मात्र 300 किलोमीटर अधिक है। यहां से सड़क मार्ग से लंदन की दूरी 5952 किलोमीटर है। वास्तविक रुप से गिलगित एशिया, यूरोप और यहां तक कि अफ्रीका के कई क्षेत्रों को जोडने वाला प्रमुख मध्यबिंदु है।

 

 

प्रश्नः वायुयान के वर्तमान दौर में मध्य एशियाई स्थल पथ इतने महत्वपूर्ण क्यों बने हुए है?

 

उत्तर: हवाई अथवा जलीय परिवहन की बेहतरीन उपलब्धता भी सडक अथवा रेलगाडी से होने वाले परिवहन के लाभों का स्थान नहीं ले सकती। इसीलिए ब्रिटेन ने भी लंदन से लेकर मीरपुर तक के लिए बस यात्रा का प्रस्ताव रखा है। हालांकि इस दूरी को तय करने में बस को 7 दिन लगेंगे।

 

 

प्रश्न: पाकिस्तान के अवैध कब्जे में गिलगित रहने के कारण भारत ने क्या खोया है

 

उत्तर: भारत ने मध्य एशिया, चीन, पश्चिमी एशिया और यूरोप तथा अफ्रीका तक सड़क मार्ग की संभावनाओं को खो दिया है। गिलगित सदैव से भारतीय परिसंघ का हिस्सा रहा है, विशेषकर प्रसिद्ध रेशम पथ के युग के दौरान।

 

 

प्रश्न: इसके अतिरिक्त गिलगित किस दृष्टि से भारत के लिए महत्वपूर्ण है।

 

उत्तर: इसके अतिरिक्त गिलगित-बल्तिस्तान तथा तिब्बत, एशिया में ताजे पानी के सबसे बडे स्रोत हैं। अब भारत ने तिब्बत की संप्रभुता को चीन के हाथों सौंप दिया है। इसलिए भारत के पास अब एकमात्र विकल्प गिलगित-बल्तिस्तान का है। भारत की सर्वाधिक 10 उंची चोटियों में से 8 गिलगित-बल्तिस्तान के क्षे़त्र में पडती हैं, जिस पर अब पाकिस्तान का कब्जा है। विश्व की दूसरी सबसे उंची चोटी के-2 बल्तिस्तान में है। सोने की खानें भी गिलगित में हैं। शायद इसी बात को ध्यान में रखते हुए अब चीन ने इस क्षेत्र के सभी खनन अधिकारों को पाकिस्तान से अपने हाथों में ले लिया है। ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से हम तापी परियोजना के तहत तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान और भारत तक गैस पाईप लाइन बिछा सकते हैं। लेकिन पाकिस्तान भारत को ऐसा न करने देने के लिए निरंतर इनकार की मुद्रा अपनाए हुए है।

 

 

प्रश्न: जब तक भारत-पाक-चीन के बीच सीमा का निर्धारण न हो तब तक क्या समस्या का हल संभव है?

 

उत्तर: हमारी सीमाएं अनिर्धारित हैं, यह भी एक प्रकार का भ्रम ही है। 1842 में जम्मू-कश्मीर, तिब्बत और चीन के बीच चुशूल की संधि हुई। यह संधि जम्मू-कश्मीर के महाराज और तिब्बत तथा चीन के बीच हुई। इससे पहले 1684 में भी तिब्बत और लद्दाख के बीच सीमा के निर्धारण के लिए एक संधि हुई थी। 1947 में भारत विभाजन के साथ ही पाकिस्तान एवं भारत के भू-भाग निर्धारित हो गये थे। रेडक्लिफ अवार्ड से पंजाब, बंगाल एवं असम की सीमाएं भी निर्धारित हो गयी थीं। वास्तव में जम्मू-काश्मीर के क्षेत्रों पर पाकिस्तान का कब्जा अवैध है। प्रश्न सीमा-निर्धारण का नही अपितु अपने क्षेत्रों को खाली करवाना एवं अपने पक्ष को तर्कपूर्ण ढ़ंग से मजबूती के साथ रखने का है। 

 

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