मिथक से परे जम्मू कश्मीर का विलय

17 Jan 2018 12:07:14

प्रश्नोत्तरी भाग - 4

 


प्रश्न – जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय कब हुआ था?

उत्तर - 26 अक्टूबर, 1947 को भारत स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के प्रावधान के अनुसार 500 से अधिक अन्य रियासतों के शासकों की तरह जम्मू-कश्मीर के महाराजा ने भी समान विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर राज्य का भारतीय अधिराज्य में विलय का प्रपत्र प्रस्तुत किया था। 27 अक्टूबर 1947 को भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ने विलय को स्वीकृति प्रदान की।

 

प्रश्न – क्या भारत के साथ जम्मू-कश्मीर का विलय सशर्त था?

उत्तर – बिलकुल नहीं। राज्य का भारत में विलय वैसे ही हुआ था जैसे कोचीन, सौराष्ट्र या मैसूर का हुआ था। किसी भी प्रकार की कोई शर्त नहीं थी। भारत स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के अंतर्गत यह एक पूर्ण और अंतिम विलय था। विलय पत्र का मसौदा भारत सरकार के राज्य मंत्रालय द्वारा तैयार किया गया था और जो सभी राज्यों के लिए एक सा ही था। अधिनियम के अन्तर्गत सशर्त विलय का कोई प्रावधान ही नहीं था।

 

प्रश्न – क्या जम्मू-कश्मीर के भारत के साथ विलय पर कोई विवाद है?

उत्तर – कोई नहीं। यह एक वैधानिक प्रक्रिया थी जिसे 26 अक्टूबर, 1947 को अंतिम रूप दे दिया गया था और 27 अक्टूबर 1947 को भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा जम्मू-कश्मीर को स्थायी रूप से भारतीय भू-भाग घोषित कर दिया गया था।

अधिनियम के अनुसार राज्य के शासक द्वारा निष्पादित विलय पत्र को महामहिम की स्वीकृति के साथ ही राज्य का संघ में विलय पूर्ण माना जायेगा। यह विलय अंतिम तथा अपरिवर्तनीय था और भविष्य में यह स्वयं शासक और उसके उत्तराधिकारी पर भी बाध्यकारी था। अतः एक बार विलय की वैधानिक प्रक्रिया सम्पन्न होने के पश्चात स्वयं विलयकर्ता को भी इस पर पुनर्विचार का अधिकार नहीं था। इस स्थिति में किसी अन्य द्वारा इस पर विवाद उत्पन्न करने अथवा विलय को विवादित बताने का अवसर ही नहीं है।

 

 

प्रश्न - पाकिस्तान और अलगाववादियों के विभिन्न धड़े जम्मू-कश्मीर के लोगों की इच्छा के बारे में लार्ड माउंटबेटन के पत्र की बात करते है। वह क्या है?

 

उत्तर - एक साधारण तथ्य पर ध्यान दें। जम्मू-कश्मीर का विलय भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के प्रावधानों के अनुसार हुआ था। माउंटबेटन के हस्ताक्षर के साथ ही विलय की वैधानिक प्रक्रिया पूरी हो गयी। विलय की प्रक्रिया का माउंटबेटन के पत्र से कोई संबंध नहीं और न ही इस पत्र को कानूनी दस्तावेज माना जा सकता है। इसके अलावा माउंटबेटन का पत्र विशेष रूप से महाराजा हरिसिंह के लिए नहीं लिखा गया था। वह कांग्रेस सरकार की नीति के अनुसार हर रियासत को लिखा गया था।

 

प्रश्न - माउंटबेटन के पत्र में क्या लिखा गया था?

उत्तर - वह उस समय कांग्रेस दल और सरकार के नीतिगत निर्णय पर आधारित परिपत्र था जो कि जम्मू-कश्मीर सहित सभी रियासतों के लिए लिखा गया था। स्वीकृत प्रक्रिया के तहत हर रियासत को भारत या पाकिस्तान में विलय की पुष्टि के लिए एक संविधान सभा गठित करनी थी। इस संविधान सभा को अपने राज्य के लिए संविधान का निर्माण भी करना था। इसके अलावा रियासतों की संविधान सभा को विलय के बाद राज्य में संघ के संविधान को स्वीकृत करना तथा उसे संविधान के रूप में अपनाना था।

 

प्रश्न – क्या जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा ने अन्य सभी राज्यों की तरह भारत के साथ विलय की पुष्टि की थी?

उत्तर – हां। 6 फरवरी 1954 को जम्मू-कश्मीर के लोगों द्वारा निर्वाचित संविधान सभा ने 1947 में राज्य के महाराजा द्वारा हस्ताक्षरित वैधानिक विलय पत्र की पुष्टि की थी। इसके साथ ही भारत व जम्मू-कश्मीर ने भारत के प्रथम गवर्नर जनरल लार्ड माउंटबेटन के द्वारा निर्धारित प्रतिबद्धता को पूरा किया।

 

प्रश्न – जम्मू-कश्मीर का मुद्दा हमेशा कुछ व्यक्तियों के इर्द-गिर्द ही क्यों घूमता रहता है। क्या इससे यह किसी समाधान तक पहुंच सकेगा?

 

उत्तर - यह इतिहास के लेखकों की त्रासदी है। समय की मांग है कि जम्मू-कश्मीर को लार्ड माउंटबेटन, जवाहरलाल नेहरू, महाराजा हरिसिंह और शेख अब्दुल्ला की कहानियों से बाहर निकाला जाए। इन चार लोगों के अलावा भी जम्मू कश्मीर में बहुत कुछ है। क्योंकि एकीकरण और विलय कानूनी प्रक्रियाओं के रूप में थे, हमें चाहिए कि हमारी बहस केवल वैधानिक प्रपत्रों पर केंद्रित हो। जम्मू-कश्मीर से सम्बन्धित वैधानिक प्रपत्र निम्नवत है-

1 - भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम तथा इसके पूरक के रूप में कैबिनेट मिशन योजना, 1946 तथा 26 जून 1947 को ब्रिटिश क्राउन की ओर से लार्ड माउंटबेटन द्वारा चैम्बर आफ प्रिंसेस को संबोधन

2 - 1947 में संशोधित भारत सरकार अधिनियम, 1935

3 - विलय पत्र तथा गवर्नर जनरल लार्ड माउंटबेटन द्वारा हस्ताक्षरित स्वीकृति पत्र

4 - 5 मार्च 1948 की उद्घोषणा – महाराजा हरिसिंह द्वारा

5 – 21 जून 1949 की उद्घोषणा - महाराजा हरिसिंह द्वारा

6 – 25 नवम्बर 1949 की उद्घोषणा – युवराज कर्ण सिंह द्वारा।

7 – 1 मई 1951 की उद्घोषणा – युवराज कर्ण सिंह द्वारा।

8 – भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370

 

प्रश्न – यदि विधिक रूप से जम्मू-कश्मीर राज्य का विलय भारत में हो गया था और संविधान सभा द्वारा इसका अनुमोदन भी कर दिया गया तो भारत इस मामले को अनुमोदित होने से पहले ही संयुक्त राष्ट्र में क्यों ले गया?

 

उत्तर –  संयुक्त राष्ट्र संघ चार्टर के अनुच्छेद 35 के अधीन इस मसले को उठाया था। यह जम्मू-कश्मीर के कुछ भाग में पाकिस्तान के आक्रमण से संबंधित था। इसका वैधानिक स्थिति, भारत के साथ राज्य के विलय अथवा पाकिस्तान के साथ विवाद से कुछ भी लेना-देना नहीं था। भारत का वाद था कि उसके भू-भाग पर पाकिस्तान ने आक्रमण किया है और उसके सैनिक और नागरिक वहां पर कब्जा करके बैठ गए है। अपना भू-भाग खाली कराने के लिए भारत को सैनिक कार्रवाई करनी होगी जिससे युद्ध भड़कने का भय है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में अपना पक्ष रखते हुए उससे अपने प्रभाव का उपयोग कर भारतीय भू-भाग को खाली कराने की अपील की थी। ताकि संभावित युद्ध को टाला जा सके।

 

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