भारत इजराइल की दोस्ती से चिढ़ा पाकिस्तान

17 Jan 2018 15:22:28

 

आशुतोष मिश्रा

भारत और इजराइल के बीच बढते रिश्तों से का असर अब भारत के विरोधियो में दिखने लगा है। एक बार फिर से पाकिस्तानी विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि भारत और इजरायल के बीच सैन्य गठजोड़ के बावजूद पाकिस्तान अपने देश की रक्षा करने में सक्षम है।

 

ख्वाजा ने आगे बोला कि इजरायल ने मुस्लिमों की जमीनों को कब्ज़ा करने की कोशिश में लगा है, और वैसे ही भारत ने कश्मीर घाटी में मुस्लिमों की जमीनों पर कब्जा कर रहा है। इसलिए ये दोनों देश एक साथ आर रहे है क्योकि इजरायल और भारत का समान उद्देश्य है।

 

पाकिस्तान ने कभी भी इजरायल को मान्यता नहीं दी है। भारत इजराइल के साथ अपने रिश्ते इसलिए और बढ़ा रहा है क्योकि दोनों ही देश पूरी दुनिया में 'इस्लाम' को बदनाम करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते है। इन दोनों देशों का ये गठजोड़ दोनों के 'इस्लाम विरोधी' होने को साफ़-साफ़ प्रदर्शित करता है।

 

लेकिन उसका सबसे अच्छा दोस्त चीन लगातार  मुस्लिमों पर निशाना साधता रहता है। कुछ दिन पहले ही उसने चीन के पश्चिमी शहर काशगर में मस्जिदो में मेटल डिटेक्टर लगा दिया था।  ये कानून चीन के शिनजियांग प्रांत की सरकार ने उइगर मुस्लिम आबादी पर रोक लगाने के लिए किया है। इससे पहले भी चीन ने इसी प्रांत में दाढ़ी रखने और खुले में नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी है। मस्जिद आने वाले लोगों को रास्ते पर रोक कर कई चेक प्वाइंट पर रोककर तलाशी ली जा रही है। उन्हें इस प्रकार से भी परेशान किया जा रहा है की लोग मस्जिद में आना बंद या कम कर दे।

 

चीन की सरकार कहती है कि ऐसे कड़े इंतजाम इस्लामी कट्टरपन को रोकने और अलगाववाद को ताकत न मिलने देने के लिए किए जा रहे हैं। दुनिया भर के विश्लेषक मानते हैं कि उइगर बहुल शिनजियांग प्रांत अब खुली जेल की तरह हो गया है। यहां पर लोग रहते घरों में हैं और खुले आकाश के नीचे सांस लेते हैं लेकिन उन्हें हर काम पुलिस और सुरक्षा बलों की बंदिशों के बीच करना होता है। चीन सरकार ने प्रांत में कड़ाई की शुरुआत सन 2009 में उरुमकी शहर में हुए दंगों के बाद की जिसमें 200 लोग मारे गए थे। लेकिन फिर भी  पाकिस्तान लगतार भारत को घेरने के लिए चीन का साथ देता रहा हैं।  

 

हमारे देश पाकिस्तान के लोगों और सरकार का हमेशा से ही फिलिस्तीन के लोगों के साथ भावनात्मक संबंध है, जबकि कश्मीर का विषय पाकिस्तान के अस्तित्व का ही विषय है।पाकिस्तान के सभी सुरक्षा बलों  आतंक के खिलाफ लड़ रहे और देश की रक्षा क्षमता को बढ़ा रहे है। हमने बड़ी संख्या में बलिदान के बाद आतंक के खिलाफ सफलता प्राप्त की है।

 

पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की बात कर रहा है, लेकिन पाक पीएम शाहिद खाकान अब्बासी ने एक चैनल से बातचीत के दौरान कहा, 'पाकिस्तान में कोई केस हाफिज सईद साहब के खिलाफ नहीं है।'

 

इन सब बातों के बाद भी पाकिस्तान ने कभी भी आतंकवाद के समर्थन नहीं बंद किया है तभी तो आज भी दुनिया भर के कई देशों के वांछित आतंकवादी पाकिस्तान में खुले आम घूम रहे हैं। और पूरे पाकिस्तान में अपनी सभा और जलसे कर रह हैं।

 

इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि इस्लामाबाद भारत और इजरायल के बढ़ते गठजोड़ पर पैनी नजर बनाये हुए हैं।  

 

इजराइल और भारत के बीच राजनयिक संबंधों को 25 साल पूरे हो रहे हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत के दौरे पर भारत के साथ फ्री ट्रेड पैक्ट की शुरुआत कर रहे हैं। इजराइली प्रधानमंत्री के दिल्ली हवाई अड्डा पहुचने पर  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़ गले लगकर जोरदार स्वागत किया।

 

आज़ादी के बाद जवाहर लाल नेहरू की सरकार ने विदेश नीति को दुनिया में एकता और अहिंसा के सिद्धांत को प्रमुखता दी गई थी। और इस कारण ही  भारत फलस्तीन का खुलकर समर्थन करता रहा। लेकिन 1948 में आजाद घोषित करने के बाद इजराइल को भारत ने 1950 में एक देश के रूप में अपनी मान्यता दे दी थी।  90 के दशक में दुनिया में ख़त्म हुए शीत युद्ध  के बाद दुनिया की परिस्थितियां और भारत की जरूरतें के हिस्साब से भारत ने इजराइल से सैन्य संबंध बढ़ाना शुरू कर दिया था।

 

इजराइल के साथ रिश्तों की शुरुआत 1960 के दशक से ही हो गई थी। उसने 1962, 1965 और 1971 के युद्ध में भारत को सैन्य मदद की थी। और उसने ही भारत को खुफिया एजेंसी रॉ बनाने के लिए पर सहयोग किया था। इजराइल दुनिया का पहला देश था जिसने 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध के बाद बांग्लादेश को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी थी।

 

भारत ने इजराइल के साथ अपने राजनयिक संबंध 1992 में नरसिम्हा राव के समय में स्थापित किया गया था। उसके बाद 1997 में पहली बार इजराइली राष्ट्रपति एजर वेजमैन भारत आये और 2000 में पहली बार उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी एक शीर्ष मंत्री के रूप में इजराइल के दौरे पर गए थे। विदेश मंत्री जसवंत सिंह इजराइल का दौर करने वाले देश के पहले मंत्री बने थे।

 

अब दोनों देशों ने अपने बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर संयुक्त रूप से कार्य करने को लेकर सहमति बना रहे हैं। इस बार साइबर सुरक्षा के अलावा फिल्म निर्माण, पेट्रोलियम, इनवेस्ट इंडिया इनवेस्ट इजरायल को लेकर दोनों देशों के बीच समझौता हुआ है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे।

 

इसके साथ ही सांस्कृतिक संबंधों और पर्यटन उद्दयोग को बढ़ावा देने सहित भारत में डिफेंस क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई का लाभ इजरायल और भारत दोनों को रक्षा क्षेत्र में होगा।

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