अस्थायी अनुच्छेद 370

19 Jan 2018 15:25:25

प्रश्नोत्तरी भाग - 8

 


 

 

 

प्रश्न: यह कैसे कहा जा सकता है कि अनुच्छेद 370 का दुरुपयोग किया गया?

उत्तर: 2013 तक भारतीय संविधान के मात्र 260 अनुच्छेदों को ही जम्मू-कश्मीर में लागू किया जा सका है। भारतीय संविधान में 444 अनुच्छेद है, 22 भाग है, 13 अनुसूचियां हैं और 118 संशोधन हुए हैं। संयोगवश, भारत के पास मानव इतिहास में अब तक लिखा गया सबसे बडा संविधान है। इसके दुरुपयोग ही साबित होता है कि अनेक लोककल्याणकारी प्रावधान जम्मू-कश्मीर में केवल इसलिए लागू नहीं किये गये क्योंकि वे राज्य सरकार को जवाबदेह ठहराते हैं। इसके विपरीत अनुच्छेद 370 की आड़ में कुछ प्रावधान ऐसे भी जोड़ दिये गये है जो भारतीय संविधान की मूल भावना से मेल नहीं खाते हैं। 

 

 

प्रश्न: क्या अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया जाना चाहिए?

उत्तर: हां, यह भारतीय संविधान को जम्मू-कश्मीर राज्य में पूरी तरह से लागू करने के लिए बनाया गया एक अस्थाई उपबंध था। भारतीय संविधान के जो 134 अनुच्छेद राज्य में लागू नहीं हैं उन्हें तुरंत लागू किया जाना चाहिये। जो प्रावधान पूरे देश के लिये उपयोगी है वे किसी एक राज्य के लिये अनुपयुक्त नहीं हो सकते। इसलिए बिना समय गंवाए उन्हें लागू करने के पश्चात अनुच्छेद 370 को निरस्त कर देना चाहिये। यही भारतीय संविधान को बनाने वाले संविधान सभा के सदस्यों की इच्छा थी।

 

 

प्रश्न: क्या केवल जम्मू-कश्मीर को ही अनुच्छेद 370 ने प्रभावित किया है?

उत्तर: नहीं, अनुच्छेद 370 की आड़ में पूरे देश के साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है।  जैसे कि अनुच्छेद 35-ए, भारतीय संविधान में यह संशोधन बिना संसद को विश्वास में लिए अनच्छेद 370 के अंतर्गत राष्ट्रपति के आदेश द्वारा कर दिया गया। इस अनुच्छेद के कारण भारत के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोगों से जम्मू-कश्मीर में रहने का अधिकार छीन लिया गया। इस बारे में डा. राजेंद्र प्रसाद ने नेहरु को एक पत्र लिखकर यह जानना चाहा था कि क्या अनुच्छेद 370 के जरिए भारतीय संविधान में संशोधन किया जा सकता है? भारतीय संविधान में संशोधन विधायी विशेषाधिकार है लेकिन अनुच्छेद 370 के अंतर्गत हमारे संविधान में संविधान की मूल भावना के विपरीत संशोधन कर दिए गए है।

 

 

प्रश्न: क्या जम्मू कश्मीर में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम पूरी तरह से लागू है?

उत्तर: नहीं, यह आंशिक रुप से लागू किया गया है। इसे मूलस्वरुप और वास्तविक भावना के साथ नहीं लागू किया गया है।

 

 

प्रश्न: 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में संसदीय और विधानसभा की सीटों का नए सिरे से परिसीमन किया गया है। क्या जम्मू-कश्मीर में भी ऐसा हुआ है।

उत्तर: नहीं, परिसीमन अधिनियम 2002 के राज्य में पूरी तरह लागू न होने के कारण परिसीमन आयोग द्वारा जम्मू-कश्मीर में परिसीमन नए सिरे से नहीं किया गया। जम्मू के पास कश्मीर से 60 प्रतिशत अधिक क्षेत्रफल है और यहां जनसंख्या तथा मत भी अधिक है। लेकिन कश्मीर घाटी के सत्ताधीशों ने अधिनायकवादी रुख अपनाते हुए 46 सीटें कश्मीर को दे दीं और जम्मू को मात्र 37 सीटें दी। भारतीय परिसीमन आयोग, जिसके पास परिसीमन को निर्धारित करने का अधिकार था, वह जम्मू-कश्मीर में नए सिरे से परिसीमन नहीं कर सका क्योंकि वहां परिसीमन अधिनियम पूरी तरह से लागू नहीं है।

 

 

प्रश्न: जम्मू-कश्मीर में प्रति विधानसभा सीट कितने मतदाता हैं?

उत्तर: 2005 के आंकड़ों के अनुसार कश्मीर घाटी में प्रति विधानसभा सीट 58 हजार मतदाता हैं। जबकि जम्मू में प्रति विधानसभा सीट 83 हजार मतदाता हैं। जम्मू का क्षेत्रफल भी अधिक है। कश्मीर घाटी केन्द्रित राजनेताओं ने केन्द्रीय सरकार के संरक्षण में आज तक जम्मू और लद्दाख क्षेत्र के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन ही किया है।

 

 

प्रश्न: क्या अनुच्छेद 370 का संबंध दो ध्वज, दो संविधान और राज्य से बाहर के रहने वाले भारतीयों को राज्य में संपत्ति के अधिकार से वंचित किये जाने से है?

उत्तर: नहीं, यह सब प्रत्यक्ष रुप से अनुच्छेद 370 के कारण नहीं हुआ है। किन्तु अप्रत्यक्ष रूप से अनुच्छेद 370 की आड़ में जम्मू-कश्मीर के बाहर रहने वाले शेष भारतीयों के साथ यह छल किया गया है।

 

 

प्रश्न: फिर अनुच्छेद 370 प्रभाव में कैसे आया?

उत्तर: यह भारतीय संविधान में जम्मू-कश्मीर राज्य के लिए किया गया अतिरिक्त प्रावधान है। प्रत्येक राज्य का भारत में विलय रक्षा, संचार और विदेश संबंध जैसे तीन मुद्दों पर हुआ। इसके पश्चात यह तय किया गया कि भारत एक परिसंघ होगा और राज्य संविधान निर्माण की प्रक्रिया में सहभागिता करेंगे। संघीय संविधान का निर्माण संघीय संविधान सभा द्वारा किया जाएगा। इसे पूरा होने के बाद रियासतें अपनी संविधान सभाओं द्वारा इसका अनुमोदन कर इसे लागू कर सकती थी।

भारतीय संघीय संविधान की निर्माण प्रक्रिया 1947 में प्रारंभ हो गयी थी। भारत के स्वतंत्र होने के तुरंत बाद  भारत सरकार अधिनियम 1935 के 1947 में संशोधित रुप को अंतरिम संविधान के रुप में तब तक के लिये स्वीकार कर लिया गया था, जब तक कि भारतीय संविधान सभा अपना कार्य पूरा नहीं कर लेती।

भारतीय संविधान सभा द्वारा 1949 में अपना कार्य पूर्ण किए जाने के समय केवल तीन राज्यों मैसूर, त्रावणकोर-कोचीन और सौराष्ट्र में ही संविधान सभा का गठन हो सका। तब प्रश्न उठा कि भारतीय संविधान का अनुमोदन प्रत्येक राज्य द्वारा किस तरह किया जाय। यह निर्णय लिया गया कि शासक एक उद्घोषणा करके संघीय संविधान को स्वीकृत कर सकेगा। राज्यों के लिये भी एक संविधान तैयार कर अनुच्छेद 298 के रुप में संघीय संविधान में ही समाविष्ट कर दिया गया।

 

उप-प्रधानमंत्री सरदार पटेल ने अक्टूबर में संविधान सभा में यह उद्घोषणा की कि वह सभी राज्य जिन्होंने अभी तक संविधान सभाओं का गठन नहीं किया है, उनकी प्रथम निर्वाचित विधानसभाएं ही उनकी संविधान सभा मानी जाएंगी। वह अगर संशोधन के लिए कुछ प्रस्ताव रखेंगी तो उन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। इसके बाद वह संघीय संविधान को अपने क्षेत्र में लागू कर सकेंगी।

जम्मू-कश्मीर में इस समय युद्ध चल रहा था। इसके कुछ हिस्सों पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा हो चुका था। इसके चलते राज्य की विधानसभा का गठन संभव नहीं था। इसके अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी मामला चल रहा था और वहां पर हमने कुछ वादे भी कर दिए थे। भारत ने कुछ पूर्व शर्तो के साथ सुरक्षा परिषद में जनमत संग्रह कराने की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी। जनमत संग्रह के बिना संविधान को लागू किए जाने से वचन भंग की स्थिति पैदा हो जाती। तब तक हमारे पास केवल एक अंतरिम प्रणाली थी। राज्य के रीजेंट डा. कर्ण सिंह, जो कि राज्य के शासकीय मुखिया भी थे, ने 25 नवंबर को एक उद्घोषणा कर संघीय संविधान को स्वीकृति प्रदान कर दी। किंतु लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था प्रजा सभा के मृतप्राय होने और संविधान सभा के गठन का कोई भी अवसर न होने के कारण भारतीय संविधान को जम्मू-काश्मीर में लागू करने के लिये एक अंतरिम व्यवस्था के रुप में संघीय संविधान सभा ने अनुच्छेद 370 के रुप में एक अस्थाई संक्रमणीय प्रावधान का निर्माण किया।

 

 

प्रश्न: अनुच्छेद 370 के प्रमुख उपबंध क्या हैं?

उत्तर: गोपालास्वामी आयंगर ने एक मसौदा तैयार किया जिसे 306ए के नाम से जाना जाता है, भारतीय संविधान सभा के समक्ष प्रस्तुत किया।

उपबंध 1- महाराजा हरि सिंह द्वारा की गई 5 मार्च 1948 की उद्घोषणा द्वारा परिभाषित राज्य सरकार की सहमति और सलाह से भारतीय संविधान के प्रमुख हिस्सों को जम्मू-कश्मीर में तुरंत लागू किया जाएगा।

उपबंध 2- संघीय संविधान से संबंधी मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक सभा का गठन किया जाएगा।

उपबंध 3- संविधान को पूरी तरह से स्वीकृत और लागू किए जाने के बाद तथा संविधान सभा द्वारा अनुमोदित किए जाने के बाद राष्ट्रपति अनुच्छेद 370 को एक आदेश जारी कर निरस्त कर देंगे अथवा अपनी इच्छा के अनुसार इसमें परिवर्तन करेंगे।

 

 

प्रश्न: यदि ऐसा है तो अनुच्छेद 370 को बहुत पहले निरस्त कर दिया जाना चाहिए था। वह अभी तक प्रभाव में क्यों है।

उत्तर: यह भारत की आज तक चलती आई समझौतों एवं अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की दुर्भाग्यपूर्ण राजनीति के कारण है।

 

 

प्रश्न: आप जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के दुरुपयोग को किस तरह परिभाषित करेंगे?

उत्तर: जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को भारत सरकार द्वारा आज तक गलत ढ़ंग से उद्धृत किया गया है, गलत ढ़ंग से इसे आगे बढ़ाने की कोशिश हुई है और इसके समाधान के प्रयास भी गलत तरीके से करने की कोशिश की गई है। यह स्थिति पिछले छः दशक से अधिक वर्षो से जारी है जिसके कारण संपूर्ण भारत और विशेषकर जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ अन्याय की लंबी सूची बन गई है। साथ ही, ऊपर दिये गए उदाहरणों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि अनुच्छेद 370 अपने आप में तो एक सहज विधिक प्रावधान है किंतु इसे आधार बनाकर जो संवैधानिक संशोधन अथवा विधि निर्माण किया गया है वह न तो संविधान निर्माताओं की इच्छा की पूर्ति करता है और न ही भारतीय संविधान की मूल भावना के अनुकूल है।

 

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