जवानों ने आत्मरक्षा में चलाई थी गोली

31 Jan 2018 14:41:20

 


आशुतोष मिश्रा

मेजर आदित्‍य और 10 गढ़वाल यूनिट के एक सैनिक पर हत्‍या और हत्‍या के प्रयास का मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही राज्य और शेष भारत की राजनीति में एक बार फिर से भूचाल सा आ गया है। राज्य की सरकार द्वारा दर्ज किये गए इस केस का पूरे भारत भर में तीव्र विरोध हो रहा है। शोपिया में शनिवार को करीब 200 लोगों की भीड़ ने सेना के काफिले पर हमला कर दिया। जवाबी कार्यवाही में सेना ने भी फायरिंग की जिसमें 2 युवाओं की मौत हो गई और एक युवक घायल हो गया।

सच जो देश के सामने आना चाहिये

अब इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आने लगी है। घटना के दिन 27 जनवरी को 10 गढ़वाल के मेजर आदित्‍य अपनी एक यूनिट ले कर एक काफिले के साथ शोपियां के बालापुरा से घनपुरा की ओर जा रहे थे। सेना के इस काफिले में 20 बस और 3 त्वरित प्रतिक्रिया टीम थी।

जब सेना का ये काफिला घनपुरा की ओर जा रहा था तब ही एक मोड़ पर काफिले में शामिल तीन वाहन गलत मोड़ लेकर एक गलत रास्ते पर बढ़े। ये वाहन अभी अधिकतम 100 मीटर ही आगे गए थे की काफिले में शामिल त्वरित कार्यवाही टीम ने इन वाहनों को वापस लौटने का आदेश दिया।

इन वाहनों को सही मार्ग पर ले जाने के लिए सेना का एक जूनियर कमिशन ऑफिसर वाहन से नीचे उतर कर वाहनों को वापस मोड़ने का संकेत देने लगा। सेना वाहनों के चालक वाहन को मोड़ कर सही मार्ग पर ले जाने का प्रयास ही कर रहे थे की तभी लगभग 150-200 की भीड़ ने वाहनों को घेर लिया।

इन युवकों ने तुरंत पत्थरबाजी शुरू कर दी जिसके कारण वाहन से नीचे उतरे जूनियर कमिशन ऑफिसर के सिर पर चोट लग गई और वे घायल हो गये। जिसके बाद सेना के जवानों ने तुरन्त मोर्चा संभाल लिया। सभी जवानों ने सेना अभियानों के 'मानक संचालन प्रक्रिया'(SOP) का पालन करते हुए 3-4 राउंड हवाई फायर किया। लेकिन पत्थरबाजों ने इस चेतावनी को अनसुना करते हुए सेना के जूनियर कमिशन ऑफिसर की हत्या करने का प्रयास करते हुए उसके पास लगभग 20 मीटर पास आ गए। जिसके बाद जवानों ने अपने अधिकारी और अपनी जान बचने के लिए गोली चलाई। जिसमें 2 युवाओं की मौत हो गई थी।

घटना स्थल पर नहीं थे मेजर

पुलिस ने अपनी प्राथमिकी में मेजर आदित्य को भी दोषी बनाया है जबकि मेजर घटना स्थल पर मौजूद ही नहीं थे। मेजर आदित्य इस काफिले के सेनानायक थे और सेना की 'मानक संचालन प्रक्रिया' के अनुसार काफिला सेनानायक को काफिले के प्रारंभ में होना होता है।         

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