राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने किया कश्मीरी फोटोजर्नलिस्ट की जमानत का विरोध

02 Feb 2018 13:11:16


आशुतोष मिश्रा

 

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने दिल्ली अदालत को बताया कि घाटी में  सुरक्षाबलों पर होने वाली पत्थरबाजी और अन्य सभी तरह के अपराधों के लिए पिछले साल गिरफ्तार फोटोजर्नलिस्ट सभी तरह के अलगाववादी नेताओं और आतंकवादी समूहों को पैसे पहुचने के लिए विशेष रूप से कार्य कर रहा था।

 

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश तरुण शेरावत से कामरान यूसुफ की जमानत याचिका का विरोध किया, एजेंसी ने कहा कि हमारे पास आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत है, जो बहुत ही गंभीर है।

 

विशेष सरकारी अभियोजक और राष्ट्रीय जांच एजेंसी के अधिवक्ता सिद्धार्थ लुथरा ने कहा यूसुफ इन सभी समूहों को पैसे के साथ ही उनके इरादों को सुगम बनाने के लिए हर तरह की व्यवस्था भी उपलब्ध करता था। ये देश की सुरक्षा की खिलाफ होने वाले षड्यंत्र का पूर्णतया हिस्सा था।

 

यूसुफ ऐसे व्हाट्सएप समूह में सक्रिय था जो सीमा पार के आतंकवादी संगठनों के साथ संबंध रखते है। इन समूहों में यह पत्थरबाजी और राष्ट्र विरोधी नारे के लिए युवओं को उकसाता था। अभियुक्त के वकील वारिस फरसास ने जम्मू कश्मीर को 'संघर्ष-क्षेत्र' कहा जिस पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी के वकील ने आपत्ति जताई और कहा कि वहां केवल कानून और व्यवस्था की समस्या हैं।

 

अदालत ने अपना आदेश आरक्षित कर लिया है, एनआईए ने लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद और हिजबुल मुजाहिद्दीन के सैयद सलाहुद्दीन सहित 12 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया हैं। पुलवामा के निवासी यूसुफ को पिछले साल सितंबर में कुलगाम निवासी जावेद अहमद भट्ट के साथ अलगाववादी गतिविधियों के वित्तपोषण में एनआईए ने गिरफ्तार किया था।

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