जम्मू कश्मीर पर पाकिस्तान का आक्रमण

23 Feb 2018 16:09:42

 


 

1947 में जम्मू कश्मीर ने भी देश  में स्थापित हो रही नई संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा बनने का निर्णय किया।  पाकिस्तान जम्मू कश्मीर पर बलपूर्वक कब्जा करना चाहता था, इसलिए अक्तूबर 1947  में उसने राज्य पर आक्रमण कर दिया। इसे कबायली आक्रमण का नाम दिया गया। कश्मीर और जम्मू संभाग के अतिरिक्त वह लद्दाख पर भी कब्जा करना  चाहता था। सामरिक लिहाज से लद्दाख अत्यन्त महत्वपूर्ण था। लद्दाख बौद्ध प्रधान क्षेत्र था। पाकिस्तान के कब्जे में चले जाने के बाद बौद्धों की  वहाँ क्या हालत हो सकती है,  इसका सहज अनुमान कुशक बकुला को हो गया था।  भारतीय सेना को इस मुकाबले में स्थानीय युवकों की सहायता की अत्यन्त आवश्यकता थी। कबायलियों के नाम पर पाकिस्तानी सेना लद्दाख की ओर अग्रसर थी। बल्तिस्तान में स्कर्दू के दुर्ग पर उसने कब्जा कर लिया था ।  कुशक  बकुला इस अवसर पर आगे आए। उन्होंने स्थान-स्थान पर जाकर युवकों का संगठन  तैयार किया,  जो नुबरा गार्ड के नाम से प्रसिद्ध हुआ। उन्होंने युवकों से आह्वान किया कि वे मठों में से बाहर आकर देश की रक्षा के लिए कमर कसें।  नुबरा गार्ड भारतीय सेना के लिए अत्यन्त सहायक सिद्ध हुए। स्थानीय होने के  कारण वे वहाँ के भूगोल से परिचित थे। उन्हें पर्वतीय क्षेत्रों में डटे रहने का अभ्यास तो था ही। इसी नुबरा गार्ड ने पाकिस्तानी सेना की तोपें  नष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नुबरा गार्ड ने शत्रु सेना को  नुबरा घाटी में आगे बढ़ने से रोके रखा।

 

[यह उद्धरण कुशोग बकुला पर लिखी पुस्तक "आधुनिक लद्दाख के निर्माता - उन्नीसवें कुशोग बकुला लोबजंग थुबतां छोगनोर" में से लिया गया है, पुस्तक के लेखक हैं डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री, जिनका जम्मू कश्मीर विषय पर गहन अद्धयन है I पुस्तक के बाकी अंश भी आने वाली लेख श्रंखला में प्रकाशित किये जाएंगे]

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