उच्चतम न्यायालय आज सुनेगा सेना  के खिलाफ दर्ज केस रद्द करने की याचिका

09 Feb 2018 15:16:07


आशुतोष मिश्रा

जम्मू कश्मीर राज्य में तैनात सेना के मेजर आदित्य कुमार के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मेजर आदित्य कुमार के खिलाफ जम्मू कश्मीर राज्य सरकार द्वारा दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने के लिए उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल की है। उच्चतम न्यायालय इस याचिका पर आज सुनवाई करेगा।

उच्चतम न्यायालय में मेजर आदित्य के पिता कर्मवीर सिंह ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष याचिका दाखिल की है। बीते दिनों घाटी में मेजर आदित्‍य और 10 गढ़वाल यूनिट के एक सैनिक पर हत्‍या और हत्‍या के प्रयास का मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही जम्मू कश्मीर राज्य और शेष भारत की राजनीति में एक बार फिर से भूचाल सा आ गया है। राज्य की सरकार द्वारा दर्ज किये गए इस केस का लगतार पूरे देश में तीव्र विरोध हो रहा है। 27 जनवरी को करीब 200 लोगों की भीड़ ने सेना के काफिले पर हमला कर किया। सेना ने आत्मरक्षा के लिए फायरिंग की जिसमें 3 पत्थरबाज युवको की मौत हो गई थी। जिसके बाद पुलिस अधिकारियों ने इन सभी सेनाकर्मियों पर धारा 302 (हत्या) और 307 (हत्या का प्रयास) के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। यह प्राथमिकी सेना की 10 गढ़वाल वाहिनी के जवानों के खिलाफ दर्ज की गई है।

उसके बाद राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती सरकार ने इस पूरी घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे कर और पुलिस से 20 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है। पुलिस ने अपनी प्राथमिकी में मेजर आदित्य को भी आरोपी बनाया है जबकि मेजर घटना स्थल पर मौजूद ही नहीं थे। मेजर आदित्य इस काफिले के सेनानायक थे और सेना की 'मानक संचालन प्रक्रिया' के अनुसार काफिला सेनानायक को काफिले के प्रारंभ में होना होता है।         

सेना की उत्तरी कमान के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल देवराज अन्बु ने इस मामले पर पहले ही कह दिया है कि  ‘हमारा रुख इस बारे में बिल्कुल साफ है कि अगर उकसावे वाली कार्रवाई होती है, तो आत्मरक्षा के लिए हम जवाब देंगे। इस केस में एफआईआर की कोई जरूरत नहीं थी। अब जांच के बाद सच सामने आ जायेगा। शोपियां में फायरिंग सिर्फ आत्मरक्षा के लिए की गई थी।’

जनरल अन्बु ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस केस में कोई गिरफ्तारी नहीं होगी, लेकिन मेजर आदित्य से पूछताछ की जा सकती है पहले ही सेना के बड़े अधिकारियों ने इस मामले में मेजर लीतुल गोगोई की तरह एफआईआर के घेरे में आए सैनिकों का साथ देने का फैसला किया है।

 

सैनिकों का मानवाधिकार क्यों नहीं...

 

अब एक नई बात की शुरुआत हुई है क्योकि सैनिकों के बच्चों ने अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया है। सैनिकों पर दर्ज हो रही प्राथमिकी की घटनाओं से परेशान सैनिकों के बच्चों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाकर सेना के जवानों के मानवाधिकारों के संरक्षण की मांग रखी है। बच्चों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से पूछा है कि आखिर क्यों हमेशा पत्थरबाजों से प्यार दर्शाया जा रहा है जबकि सैनिकों पर अत्याचार हो रहा है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि घाटी में लगातार सैनिकों के मानव अधिकारों का हनन हो रहा है जबकि उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। सेना के जवानों के बच्चे प्रीति, काजल और प्रभाव ने यह पत्र राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को लिखा है।

बच्चों ने पत्र लिखकर कहा है कि जम्मू कश्मीर में राज्य सरकार सिर्फ और सिर्फ पत्थरबाजों के पक्ष में खड़ी होकर उनका समर्थन कर रही है जबकि सैनिकों की जानमाल को हमेशा खतरा बना रहता है। घाटी के लोगों के साथ-साथ सरकार भी सैनिकों के जान की दुश्मन बनी है।

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