अल्पसंख्यक समाज को डराने में लगा पाक

10 Mar 2018 11:37:21


आशुतोष मिश्रा   

 

पाकिस्तान के उच्च न्यायालय ने मार्च को दिए अपने एक आदेश में कहा है कि देश में अब किसी भी सार्वजनिक पद को संभालने जा रहे व्यक्ति को अपनी धार्मिक आस्था बतानी होगी। उच्च न्यायालय के इस आदेश को पाकिस्तान में मुस्लिम कट्टरपंथियों की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के जज शौकत अजीज सिद्दीकी ने निर्वाचन कानून 2017 में खत्म-ए-नबुव्वत में विवादित बदलाव से जुड़े एक केस में यह आदेश पारित किया। खत्म-ए-नबुव्वत इस्लामी आस्था का मूल बिंदू है जिसका मतलब यह है कि मोहम्मद आखिरी पैगंबर हैं और उनके बाद कोई और पैगंबर नहीं होगा।

 

उच्च न्यायालय के जज ने कहा कि यदि कोई पाकिस्तानी नागरिक सिविल सेवासशस्त्र बल या न्यायपालिका में शामिल होने जा रहा होता है तो उसके लिए अपनी आस्था के बाबत शपथ लेना अनिवार्य है। सिद्दीकी ने अपने संक्षिप्त आदेश में कहासरकारी संस्थाओं में नौकरियों के लिए अर्जियां देने वालों को एक शपथ लेनी होगी जिससे सुनिश्चित हो कि वह संविधान में मुस्लिम एवं गैर- मुस्लिम की परिभाषा का पालन करता है।

 

जज सिद्दीकी ने इस मामले की सुनवाई तब शुरू की थी जब कुछ कट्टरपंथी धर्मगुरुओं ने पिछले साल नवंबर में शपथ में बदलावों के खिलाफ राजधानी इस्लामाबाद की तरफ जाने वाले एक प्रमुख राजमार्ग को जाम कर दिया था। सरकार की ओर से कानून मंत्री जाहिद हमीद को बर्खास्त करने के बाद कट्टरपंथियों ने अपना विरोध प्रदर्शन खत्म किया था।

 

अभी कुछ दिन पहले ही कृष्णा कुमारी कोहली ने पाकिस्तान की राजनीति में नया इतिहास रच दिया था। क्योंकि पाकिस्तान के सिंध प्रांत में थार की रहने वाली दलित हिंदू महिला कृष्णा कुमारी कोहली मुस्लिम बहुल देश की पहली हिंदू महिला सीनेटर बनी हैं। कृष्णा कुमारी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की तरफ से चुनी गई हैं। 

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की स्थापना जुल्फिकार अली भुट्टो के नेतृत्व में हुई थी। उसी समय से इस पार्टी का नेता हमेशा कोई भुट्टो-जरदारी परिवार का सदस्य ही रहा है। पार्टी का केंद्र पाकिस्तान के दक्षिणी सिंध प्रान्त में हैजहां भुट्टो परिवार की जड़ें हैं। पाकिस्तान के तीन शासक- जुल्फिकार अली भुट्टोबेनजीर भुट्टो और आसिफ अली जरदारी इसी पार्टी से सम्बंधित रहे हैं।

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