मेजर आदित्य के खिलाफ नही होंगी जांच

06 Mar 2018 12:21:34


आशुतोष मिश्रा

जम्मू कश्मीर के शोपिया में हुए पत्थरबाजी के मामले में मेजर आदित्य के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर सुनवाई करते हुए को सर्वोच्च  न्यायलय ने मेजर किसी भी तरह की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। सर्वोच्च  न्यायलय  के निर्णय के बाद जम्मू कश्मीर सरकार ने अपने पहले के रुख पर यू टर्न ले लिया है। राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायलय से कहा कि मेजर का नाम प्राथमिकी में दर्ज नहीं है। न्यायलय ने केन्द्र एवं राज्य सरकार से दो हफ्तों के अंदर जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होगी। 

गौरतलब है कि शोपिया में सेना के काफिले पर स्थानीय युवकों द्वारा पत्थरबाजी की गई थी जिसके बाद अपनी सुरक्षाबलों द्वारा की गई फायरिंग में 2 स्थानीय युवकों की मौत हो गई थी। उसके बाद मुख्यमंत्री ने इस घटना की जांच का आदेश दिया था। जिसके बाद राज्य पुलिस ने मेजर आदित्य कुमार समेत सेना की 10 गढ़वाल यूनिट के कर्मियों पर रणबीर दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 307(हत्या के प्रयास) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी है।

मेजर आदित्य के पिता लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) करमवीर सिंह ने सर्वोच्च  न्यायलय में अपने बेटे के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने की याचिका दायर की थी। लेफ्टिनेंट कर्नल करमवीर सिंह ने अपनी याचिका में कहा है कि 10 गढ़वाल राइफल्स में मेजर उनके बेटे को एफआईआर में गलत और मनमाने ढंग से नामजद किया गया है, क्योंकि यह घटना अफस्पा वाले एक क्षेत्र में सैन्य ड्यूटी पर जा रहे सैन्य काफिले से जुड़ी है। इस सैन्य काफिले को घेरकर भीड़ ने उस पर पथराव किया जिससे कई सैन्य वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। मेजर आदित्य के पिता ने कहा कि उनके बेटे का मकसद तो सिर्फ सैनिकों और सरकारी संपत्तियों को नुकसान से बचाना था। स्थिति नियंत्रण के बाहर हो जाने के बाद ही गोली चलाने के आदेश दिए गए थे। उन्होंने इसके लिए पिछले साल भीड़ द्वारा डीएसपी अयूब पंडित की पिटाई का भी उदाहरण दिया।

JKN Twitter