बंदूक से नहीं मिलेगा कोई लक्ष्य: सेना प्रमुख

16 Apr 2018 16:02:38


आशुतोष मिश्रा  

 

घाटी में कुछ स्थानीय युवकों के आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने की खबरों के बीच सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा कि आतंकवाद के रास्ते पर बढ़े युवकों को बहुत जल्द यह समझ में आने लगेगा कि बंदूक से किसी को कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है। ‘जम्मू कश्मीर लाइट इंफेन्ट्री’ की स्थापना के सात दशक पूरे होने के उपलक्ष्य पर आयोजित कार्यक्रम में सेना प्रमुख ने कहा कि अब वह समय जल्द ही आने वाला है जब जम्मू कश्मीर राज्य के हालत सामान्य हो जायेगे। कुछ अलगावादी और धार्मिक लोगों के बहकावे में आकर कुछ युवक देश की मुख्यधारा से भटक गये हैं और वे यह सोच रहे है कि बंदूक से वह अपना लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि बंदूक उठाने से कुछ हासिल होने वाला नहीं है। इन लोगों का मिशन बंदूक से सफल नहीं होने वाला। जनरल रावत ने अपने सेवाकाल का बहुत लंबा समय जम्मू कश्मीर में व्यतीत किया है। वह कश्मीर घाटी के हालात से बहुत अच्छी तरह से वाकिफ हैं।

सेना प्रमुख ने 70 वर्षों से देश में सेवारत इस रेजिमेंट के योगदान की सराहना की। इससे पहले जेकेएलआई के कर्नल ऑफ रेजिमेंट लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि आजादी के बाद स्थानीय स्वयंसेवकों के गुटों ने पाकिस्तानी हमलावरों के जम्मू कश्मीर पर हमलों का डटकर मुकाबला किया और उन्हें मुंहतोड जवाब दिया। लड़ाई के बाद इन्हें ‘जे एंड के मिलिशिया’ नाम दिया गया। उस समय यह राज्य में अर्धसैनिक बल की तरह काम करती थी। पाकिस्तान के साथ 1971 की लड़ाई में ‘जे एंड के मिलिशिया’ की तीन बटालियनों ने युद्ध पदक जीते और 1972 में इसे सेना का हिस्सा बनाया गया तथा 1976में इसका नाम ‘जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फेंट्री’ रखा गया।

 

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