किशनगंगा पनबिजली परियोजना का उद्घाटन करेंगे प्रधानमंत्री

30 Apr 2018 14:17:35


 आशुतोष मिश्रा

पाकिस्तान से लगती नियंत्रण रेखा के पास भारत द्वारा बनाई गई किशनगंगा जलविद्युत परियोजना की कुल 330 मेगावाट क्षमता की तीनों इकाई मार्च 2018 से कार्य करना शुरू कर दिया है। यह न केवल भारतीय तकनीकी की बल्कि देश की एक बड़ी कूटनीतिक जीत भी है। आगामी मई माह में प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी किशनगंगा पनबिजली परियोजना का उद्घाटन कर सकते है।

यह परियोजना सीस्मिक जोन 4 में स्थित है और ब्रिटिश कम्पनी हाल्क्रो के द्वारा इसे डिजाइन किया गया है जो भूकम्प को भी झेलने में सक्षम है। परियोजना को बनाने की जिम्मेदारी एनएचपीसी को दी गई थी जिसने आईआईटी रूड़की से परियोजना को सही रूप देने के लिए सलाह ली थी।

इस परियोजना के शुरू होने के समय पाकिस्तान वर्ल्ड बैंक के सामने जम्मू कश्मीर में भारत के किशनगंगा और राटले पनबिजली परियोजना का मुद्दा कई बार उठा चुका है। पाक ने राटले, किशनगंगा सहित भारत द्वारा बनाए जा रहे 5 पनबिजली परियोजनाओं के डिजाइन को लेकर चिंता जाहिर की थी और वर्ल्ड बैंक से कहा था कि यह डिजाइन सिंधु जल समझौते का उल्लंघन करते है। इससे पहले पाकिस्तान ने साल 2016 में विश्व बैंक को शिकायत कर पंचाट के गठन की मांग की थी।

विश्व बैंक की मध्यस्थता से 1960 में पाकिस्तान और भारत के बीच हुए सिन्धु जल सन्धि के अनुसार हिमालय क्षेत्र की 6 प्रमुख नदियों में से 3 पश्चिम नदियों सिन्धु, झेलम और चिनाब के पानी के प्रयोग का हक पाकिस्तान और 3 पूर्वी नदियों सतलुज, रावी और व्यास के प्रयोग का हक भारत को दिया गया है। किशनगंगा परियोजना झेलम की सहायक नदी पर स्थित रन ऑफ द रिवर प्रोजेक्ट है जिसकी अनुमति इस संधि में दी गई है।

वर्ष 2010 में पाकिस्तान ने हेग नीदरलैंड स्थित स्थायी मध्यथता न्यायालय में इसके विरोध में अपील दायर कर अड़ंगा लगाने की कोशिश की परन्तु 20 दिसम्बर 2013 को न्यायालय ने पाकिस्तान के आरोपों को बेबुनियाद मानते हुए भारतीय परियोजना को चालू रखने की अनुमति दे दी थी।

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