देश में बने गोला-बारूद से भारत देगा पाक-चीन को जवाब 

14 May 2018 13:24:11

 



बीते साल जुलाई माह में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने संसद में पेश अपनी में कहा था कि युद्ध में इस्तेमाल होने वाले 152 प्रकार के गोला-बारूद में सिर्फ 61 प्रकार के भंडार ही सेना के पास उपलब्ध है और युद्ध की स्थिति में यह सिर्फ 10 दिन चलेगा। जबकि सुरक्षा के निर्धारित ‘सुरक्षा प्रोटोकॉल’ के अनुसार सेना के पास कम से कम 40 दिन तक इस्तेमाल के लिए गोला-बारूद का भंडार होना चाहिए।

अब एक लम्बे समय के बाद सेना हथियारों और टैंकों के गोला बारूद का उत्पादन देश में ही करने के लिए 15,000 करोड़ रुपये की एक बड़ी योजना बनाई है। इस योजना के तहत देश के अन्दर ही सभी महत्वपूर्ण हथियार और टैंक बनाए जाएंगे। सेना अगर अपनी इस योजना में कामयाब हो जाती है तो देश को हथियारों के आयात पर निर्भरता खत्म हो जाएगी। और युद्ध के हालत में देश को किसी भी तरह के युद्ध के लिए हथियारों की कमी भी नहीं पड़ेगी। भारत के पडोसी देश चीन और पाकिस्तान तेजी से अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने में लगे हुए है। इस लिहाज से भी ये योजना देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

सेना ने अपनी इस योजना में देश की 11 निजी कंपनियों को भी शामिल किया है। इस योजना की निगरानी रक्षा मंत्रालय और सेना के शीर्ष अधिकारी करेंगे। इस योजना को 10 साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सूत्रों की माने तो इस योजना में रॉकेट्स और ग्रेनेड लॉन्चर, एयर डिफेंस सिस्टम, आर्टिलरी गन और इंफैंट्री जंगी वाहन बनाए जाने हैं। योजना में हर चरण की समाप्ति के बाद इसके लक्ष्य की समीक्षा की जाएगी। 

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत हमेशा ही दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी थल सेना के लिए हथियार और गोला-बारूद खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दे रहे हैं। वहीं, सेना के एक अधिकारी ने बताया, ‘गोला-बारूद का स्वदेशीकरण परियोजना दशकों में ऐसा सबसे बड़ा कार्यक्रम होगा।’

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