रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण से जीतेगा भारत

16 May 2018 13:48:55


आशुतोष मिश्रा 

केन्द्रीय रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण पर जोर देते हुए कहा कि उधार की प्रौद्योगिकी के साथ रक्षा उपकरणों का विनिर्माण नहीं किया जा सकता। रक्षामंत्री ने रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (DRDO) के वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए यह बात कही।

रक्षामंत्री ने कहा कि रक्षा विनिर्माण में स्वदेशीकरण का एजेंडा शीर्ष पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया के सबसे बड़े हथियार खरीदार की भूमिका से निकलकर विनिर्माण हब बनना है। रक्षामंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों के दौरान सरकार ने स्वदेशीकरण पर जोर दिया है। भारत विश्व में हथियारों के सबसे बड़े आयातकों में से एक है। सीतारमण ने सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल का हवाला देते हुए कहा कि‘रक्षा उपकरणों का सबसे बड़ा खरीदार भारत के होने के नाते स्वदेशीकरण पर जोर दिया जाना चाहिए, 2014 से ठीक यही हो रहा है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की अंतरिक्ष के क्षेत्र में स्वर्णिम उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने दुनिया भर में अपना लोहा मनवाया है और वे निरंतर आगे बढ़ते हुए नये रिकार्ड बना रहे हैं। रक्षा वैज्ञानिकों को भी इसी तरह नई बुलंदियों को छूना होगा।

रक्षामंत्री ने रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (DRDO) के वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए कहा कि विषम परिस्थितियों में भी भारतीय वैज्ञानिक बेहतरीन काम करने में सक्षम हैं। इस संदर्भ में उन्होंने बीस वर्ष पहले पोखरण परीक्षणों का जिक्र करते हुए कहा कि सारी दुनिया की निगाहें भारत पर थी लेकिन वैज्ञानिकों ने किसी को भनक भी नहीं लगने दी और परमाणु परीक्षण कर लिया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार से डिफेंस कॉरीडोर को धरातल पर लाने के लिए 20 हजार करोड़ रुपये की वित्तीय मदद मिलेगी। इस कॉरीडोर से ढाई लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। कॉरीडोर में टेक्सटाइल, लेदर सेक्टर से जुड़े उद्योग स्थापित हों इसके लिए उद्यमियों को वह जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी है जिनकी उन्हें दरकार है। एक ही प्लेटफार्म पर उन्हें संबंधित विभागों से एनओसी और लाइसेंस मिल जाए, इस कार्य में इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आइआइए) मदद करेगा।

JKN Twitter