लेफ्टिनेंट कैप्टन सौरभ कालिया की शहादत से शुरू हुआ कारगिल युद्ध

16 May 2018 20:41:29

 

 


 

 

आशुतोष मिश्रा 

आज से 19 साल पहले कैप्टन सौरभ कालिया और उनके गश्त दल के पांच अन्य सैनिकों की कारगिल युद्ध की शुरुआत से पहले पाकिस्तानी घुसपैठियों ने अपहरण कर निर्ममता से हत्या कर दी थी।

मई के पहले सप्ताह में सब कुछ सामान्य दिख रहा था लेकिन जब स्थानीय लोगों ने भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा बनाए गए बंकरों में सेना की वर्दी में पाकिस्तानी घुसपैठियों को देखा तो वे डर गए। उन्होंने इसकी सूचना भारतीय सेना को दी और सेना ने इसकी जानकारी तुरंत रक्षा मंत्रालय को दी।

15 मई,1999 को सेना के 4 जाट रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट कैप्टन सौरभ कालिया और पांच अन्य सैनिक अर्जुन राम, भंवर लाल बागरिया, भीका राम, मूला राम और नरेश सिंह काकर क्षेत्र में बजरंग पोस्ट पर पेट्रोलिग कर रहे थे। सेना ने घुसपैठ की प्रमाणिकता के लिए कैप्टन सौरभ कालिया को जांच का आदेश दिया। जैसे ही वे टाइगर हिल की पहाड़ियों पर पहुंचे, ऊंचाई पर बंकरों में बैठे घुसपैठियों ने भारी फायरिंग की। उसके बाद पाकिस्तानी घुसपैठियों ने कैप्टन सौरभ और उनके पांच साथियों को बंदी बना लिया और पाकिस्तान भेज दिया। वहां 22 दिनों तक कैप्टन सौरभ और उनके साथियों को अत्यधिक यातना का सामना करना पड़ा। पाकिस्तान ने युद्ध अपराधियों से संबंधित सभी नियमों का उल्लंघन किया। आखिरकार, इऩ छह सैनिकों को गोली मार दी गई। तीन हफ्ते बाद सेना को उनके शव क्षत-विक्षत अवस्था में मिलें। 09 जून,1999 को कैप्टन सौरभ कालिया के पिता एन.के. कालिया को कैप्टन सौरभ का शव मिला। पोस्टमार्टम के बाद यह पता चला कि उनके शरीर को सिगरेट से जलाया गया था, नाखूनों को अलग कर दिया गया था, हड्डियों को तोड़ा गया था, कानों में गर्म रॉड डालकर पर्दे में छेद किया गया और जब वे जीवित थे तभी उनकी आंखें भी फोड़ दी गई थी। पाकिस्तानी सेना की क्रूरता इस पर भी नहीं रुकी। पाकिस्तानी सेना ने उन्हें मारने से पहले उनके अंगों और निजी अंगों को काटा गया था। कैप्टन सौरभ कालिया और उनके साथियों की देशभक्ति की पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों ने भी तारीफ की और कहा कि इतनी यातना के बावजूद उन्होंने कभी भी भूगोल, हथियार और भारतीय सेना की तैनाती के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। विज्ञान का कहना है कि एक मानव शरीर केवल 45 डेल (इकाइयों) का ही दर्द सहन कर सकता है, जबकि इन जवानों के दर्द अकल्पनीय हैं।

कैप्टन सौरभ स्वभाव से एक शर्मीले व्यक्ति थे, जो बहुत कम बात करते थे। रेजिमेंट सेंटर में भाषण देने का एक मामला दिलचस्प है, जिसमें सौरभ को भी सभी नए अधिकारियों की तरह  भीड़ को संबोधित करना था। वहां ज्यादातर अधिकारियों ने दस-दस मिनट लंबे भाषण दिए, मगर सौरभ ने सिर्फ एक बयान दिया और बैठ गये। उन्होंने कहा, “आज, मुझे गर्व है कि मैं 4 जाट रेजिमेंट में शामिल हो गया हूँ, एक दिन आएगा जब यह यूनिट हम पर गर्व करेगी।”

कैप्टन सौरभ कालिया भारतीय सेना के पहले अधिकारी थे, जिन्होंने कारगिल में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के अन्दर भारतीय सीमा में पाकिस्तानी सेना और विदेशी घुसपैठियों के बारे में जानकारी इकट्ठा कर भारतीय सेना को दिया।

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