जो जम्मू कश्मीर के बारे में कुछ नहीं जानते। वह सेना के सीजफायर पर ज्ञान दे रहे है।

17 May 2018 15:21:40

 


ये लेख उनको समर्पित है जो जम्मू कश्मीर के बारे में कुछ नहीं जानते, जिनको कुछ पता नहीं है वे रमजान के दौरान सेना के सीजफायर पर ज्ञान दे रहे है।

 

सबसे पहले तो ये बता दें कि ये सीजफायर नहीं है ये सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन (suspension of operation) है।

 

ये जितने ज्ञानी गुणजन हैं, मैं दावे के साथ कहता हूँ कि इन्होंने जिन्दगी में कायदे से जम्मू कश्मीर का नक्शा भी नहीं देखा हैं। हमने भी सालभर पहले नहीं देखा था। वो तो भला हो जेकेएससी यानि जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र वालों का, जिन्होंने छोटी-छोटी सभा-गोष्ठियां कर हमको जम्मू कश्मीर का असली नक्शा दिखाया है। 

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........ और उस नक्शे के साथ कश्मीर की असलियत भी दिखाई। 

 

दरअसल अपने ड्राविंग रूम में बैठकर हम कश्मीर को मीडिया और न्यूज चैनल्स की नजर से देखते हैं, या यू कहें कि सिर्फ इतना देखते हैं जितना मीडिया या न्यूज चैनल्स वाले दिखाते हैं। हमारी कश्मीर के बारे में सिर्फ इतनी सी समझ है जितनी इन न्यूज चैनल्स और समाचार माध्यमों ने बनाई है। 

 

जम्मू कश्मीर का कुल रकबा है लगभग 2 लाख 22000 वर्ग किमी है। इसमें से बमुश्किल 1 लाख वर्ग किमी आज भारत के पास है। उस बचे हुए 1 लाख वर्ग किमी में से सिर्फ 10% इलाका और जनसंख्या ही अशांत है। उस अशांत क्षेत्र में भी सिर्फ कुछ गली या कुछ गांव या शहरी अर्धशहरी कस्बों के मुहल्ले ही अशांत है।

घाटी के सिर्फ 5 जिले  अनंतनाग, पुलवामा, शोपियां, कुलगाम और श्रीनगर ही अशांत हैं। इन जिलों में भी सिर्फ छोटी छोटी गली, कुछ गांव या कुछ मुहल्ले ही अशांत हैं। 

 

आज पाकिस्तान परस्त अलगाववादी इस बात को लेकर परेशान हैं कि उनकी आजादी की लड़ाई सिमट के घाटी के कुछ मुहल्लों तक सीमित रह गयी है। शेष कश्मीर न उससे सहमत है, न उसमें हिस्सा लेता है और न ही वे पाकिस्तान के साथ जाना चाहते है। कश्मीर घाटी की (मैं जम्मू और लेह लद्दाख संभाग की बात नहीं कर रहा हूँ) भी 90% जनसंख्या अलगाववादियों और पत्थरबाजों के साथ नहीं है। आज ये अलगाववादी घाटी में पूरी तरह अलग-थलग हो चुके है।

 

सेना लगातार कश्मीर में गुडविल मिशन चलाती है जिससे आम कश्मीरी अवाम भारतीय सेना को पसंद करती है। पाकिस्तानी एजेंडा घाटी के सिर्फ 5 जिलों की कुछ छोटी-छोटी गली में चलती है और ये जो भी आतंकी या पत्थरबाजी की घटनाएं होती है ये उन्हीं सीमित गलियों में होती हैं।.........शेष कश्मीर को सेना से कोई दिक्कत नहीं है। 

 

ये जो रमजान में भारतीय सेना ने सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन किया है (जी हाँ, ये सीजफायर नहीं है। सीजफायर दो शत्रु देशों की सेनाओं के बीच होता है। कश्मीर हमारा अपना अभिन्न अंग है)। ये सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन उसी आम कश्मीरी अवाम के लिए किया है, ये उसी अवाम को संदेश दिया है कि देख लो........हम तो रमजान में शांति से बैठे है, यही तुम्हारे आतंकी ही रमजान में खून बहाकर एंटी इस्लामिक काम कर रहे हैं........बाकी घाटी में न तो कोई ऑपरेशन रुका है न गोलीबारी .......जैसे पहले गोली का जवाब गोली से दिया जाता रहा है वैसे ही अब भी दिया जा रहा है ......... वैसे भी, गृह मंत्रालय के अधीन पैरा मिलिट्री फोर्सेज होती हैं, आर्मी नहीं। गृह मंत्रालय सेना को सिर्फ सलाह दे सकती है जो सेना के लिए बाध्यकारी नहीं होता। इस पर सेना का बयान भी आ गया है कि सभी ऑपरेशन सस्पेंड नहीं किये जा सकते।

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