किशनगंगा जलविद्युत परियोजना के उद्घाटन से पाक परेशान

22 May 2018 14:28:25

 


आशुतोष मिश्रा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 19 मई को अपने जम्मू कश्मीर दौरे पर किशनगंगा जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन किया। पाकिस्तान से लगती नियंत्रण रेखा के पास भारत द्वारा बनाई गई किशनगंगा जलविद्युत परियोजना की कुल 330 मेगावाट क्षमता की तीनों इकाई मार्च 2018 से कार्य करना शुरू कर दिया है। यह न केवल भारतीय तकनीकी की बल्कि देश की एक बड़ी कूटनीतिक जीत भी है।

लेकिन इसके बाद एक बार फिर से पाकिस्तान ने भारत पर विश्व बैंक के साथ सिंधु जल संधि के भारत के कथित उल्लंघन के मुद्दे को फिर से उठाया है।  पाक राजदूत एजाज अहमद चौधरी ने मीडिया को बताया कि पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल (एजीपी) अश्तर औसाफ अली के नेतृत्व में चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल विश्व बैंक के अध्यक्ष के साथ बातचीत करने के लिए वाशिंगटन में है। उन्होंने कहा कि किशनगंगा बांध के निर्माण के मुद्दे पर बैठक में चर्चा की जाएगी। किशनगंगा जलविद्युत बिजली संयंत्र के उद्घाटन का पाकिस्तान ने विरोध किया था, और कहा कि इससे पाकिस्तान में बहने वाली नदी परियोजना जल आपूर्ति को बाधित करेगी।

विश्व बैंक की मध्यस्थता से 1960 में पाकिस्तान और भारत के बीच हुए सिन्धु जल सन्धि के अनुसार हिमालय क्षेत्र की 6 प्रमुख नदियों में से 3 पश्चिम नदियों सिन्धु, झेलम और चिनाब के पानी के प्रयोग का हक पाकिस्तान और 3 पूर्वी नदियों सतलुज, रावी और व्यास के प्रयोग का हक भारत को दिया गया है। किशनगंगा परियोजना झेलम की सहायक नदी पर स्थित रन ऑफ द रिवर प्रोजेक्ट है जिसकी अनुमति इस संधि में दी गई है।

वर्ष 2010 में पाकिस्तान ने हेग नीदरलैंड स्थित स्थायी मध्यथता न्यायालय में इसके विरोध में अपील दायर कर अड़ंगा लगाने की कोशिश की थी परन्तु 20 दिसम्बर 2013 को न्यायालय ने पाकिस्तान के आरोपों को बेबुनियाद मानते हुए भारतीय परियोजना को चालू रखने की अनुमति दे दी थी। इससे पहले पाकिस्तान ने साल 2016 में विश्व बैंक को शिकायत कर पंचाट के गठन की मांग की थी।

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